Pradosh Vrat 2026: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत पुण्यदायी व्रत माना जाता है। यह हर माह की त्रयोदशी तिथि पर रखा जाता है, जिसमें सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में महादेव की पूजा का विधान है। मान्यता है कि, इस समय विधि-विधान से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से शिवजी शीघ्र प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं। शास्त्रों के मुताबिक, प्रत्येक माह के प्रदोष का अपना अलग महत्व होता है और इसे करने से न केवल जीवन की बाधाएं दूर होती हैं, बल्कि सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति भी होती है। यही नहीं वैवाहिक जीवन में मधुरता और रिश्तों में प्रेम, विश्वास और आपसी समझ बढ़ती है। ऐसे में आइए जानते हैं कि, माघ माह में यह व्रत कब रखा जाएगा।
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Pradosh Vrat 2026: 16 या 17 जनवरी कब है प्रदोष व्रत ? जानें तिथि, मुहूर्त और पूजन विधि
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: मेघा कुमारी
Updated Wed, 14 Jan 2026 05:05 PM IST
सार
Pradosh Vrat 2026: माघ माह का पहला प्रदोष व्रत बेहद खास होने वाला है। इस दिन महादेव की पूजा करने से साधक को अच्छे परिणामों की प्राप्ति हो सकती हैं और साथ ही मनचाहे परिणामों की प्राप्ति के भी योग बनेंगे।
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Pradosh Vrat 2026
- फोटो : अमर उजाला
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Pradosh Vrat 2026
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जनवरी प्रदोष व्रत 2026
- पंचांग के मुताबिक, माघ कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 15 जनवरी 2026 की शाम 08:16 बजे से शुरू होगी
- यह तिथि 16 जनवरी 2026 की रात 10:21 बजे तक रहेगी।
- तिथि के मुताबिक, 16 जनवरी 2026 को प्रदोष व्रत रखा जाएगा।
- इस तिथि पर शुक्रवार होने के कारण यह शुक्र प्रदोष व्रत के नाम से मान्य होगा।
- प्रदोष पर मूल नक्षत्र और ध्रुव योग का संयोग रहने वाला है।
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Pradosh Vrat 2026
- फोटो : freepik
पूजा विधि
- प्रदोष व्रत के दिन सुबह ही स्नान कर लें और घर में गंगाजल का छिड़काव करें।
- अब शाम को प्रदोष काल में पूजा के लिए एक साफ चौकी लेकर उसपर लाल रंग का वस्त्र बिछाएं।
- अब इसपर महादेव संग पूरे शिव परिवार की स्थापना करें।
- फिर सभी को वस्त्र पहनाएं और फूलों की माला अर्पित करें।
- अब आप भगवान शिव के नामों का स्मरण करते हुए शुद्ध जल, दूध, दही, घी, शहद और गुड़ व शक्कर से शिवलिंग का अभिषेक करें।
- फिर महादेव को 11 बिल्वपत्र चढ़ाएं। इस दौरान प्रभु को धतूरा और पुष्प भी चढ़ा दें।
- अब आप “ॐ नमः शिवाय”का जाप करते हुए शिवलिंग पर चंदन लगाएं।
- अब मौसमी फल अर्पित करें और प्रदोष व्रत की कथा का पाठ करें।
- महादेव की आरती करें और सफेद चीजों को दान करें।
- अंत में सुख-समृद्धि की कामना करते हुए प्रार्थना करें और सभी को प्रसाद बांट दें।
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Pradosh Vrat 2026
- फोटो : Amar Ujala
भगवान शिव की आरती
जय शिव ओंकारा ऊँ जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥
ऊँ जय शिव...॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥
ऊँ जय शिव...॥
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे॥
ऊँ जय शिव...॥
अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी।
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी॥
ऊँ जय शिव...॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥
ऊँ जय शिव...॥
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥
ऊँ जय शिव...॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका॥
ऊँ जय शिव...॥
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी॥
ऊँ जय शिव...॥
त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे॥
ऊँ जय शिव...॥
जय शिव ओंकारा हर ऊँ शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अद्धांगी धारा॥ ऊँ जय शिव ओंकारा...॥
जय शिव ओंकारा ऊँ जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥
ऊँ जय शिव...॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥
ऊँ जय शिव...॥
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे॥
ऊँ जय शिव...॥
अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी।
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी॥
ऊँ जय शिव...॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥
ऊँ जय शिव...॥
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥
ऊँ जय शिव...॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका॥
ऊँ जय शिव...॥
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी॥
ऊँ जय शिव...॥
त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे॥
ऊँ जय शिव...॥
जय शिव ओंकारा हर ऊँ शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अद्धांगी धारा॥ ऊँ जय शिव ओंकारा...॥
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