Sawan First Somwar 2026: सावन का पहला सोमवार व्रत 3 अगस्त 2026 को पड़ रहा है, जो भगवान शिव के भक्तों के लिए बेहद शुभ और विशेष माना जा रहा है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से भगवान शिव का पूजन, जलाभिषेक और उपवास करने से सभी कष्ट दूर होते हैं। साथ ही सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का आगमन जीवन में होता है। ज्योतिषियों की मानों, तो इस बार सावन का पहला सोमवार बेहद खास है, क्योंकि इस दिन उत्तराभाद्रपद नक्षत्र और सुकर्मा योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सुकर्मा योग में किए गए शुभ कार्य अवश्य सफल होते हैं। ऐसे में यह दिन शिव पूजा के लिए अत्यंत फलदायी माना जा रहा है। ऐसे में आइए सावन के पहले सोमवार की संपूर्ण पूजा विधि जानते हैं।
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Sawan First Somwar 2026: खास रहेगा इस बार सावन का पहला सोमवार, जानें पूजा विधि और शुभ मुहूर्त
Fri, 31 Jul 2026 12:54 PM IST
मेघा कुमारी
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: मेघा कुमारी
Updated Fri, 31 Jul 2026 12:54 PM IST
सार
Sawan First Somwar 2026: इस साल सावन का पहला सोमवार बेहद शुभ संयोग में रहेगा। इस दिन पूजा-पाठ करने से महादेव की कृपा और अन्य मनचाहे परिणामों की प्राप्ति हो सकती हैं। ऐसे में आइए सावन के पहले सोमवार की संपूर्ण पूजा विधि को जानते हैं।
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Sawan First Somwar 2026
- फोटो : अमर उजाला AI
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Sawan First Somwar 2026
- फोटो : अमर उजाला
पूजा विधि
- सावन सोमवार की पूजा के लिए सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
- इस दिन सफेद या हल्के रंग के साफ वस्त्र धारण करें और महिलाएं सोलह श्रृंगार के साथ पूजा करें।
- अब पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें और व्रत का संकल्प लें।
- सबसे पहले शिवलिंग पर शुद्ध जल और गंगाजल अर्पित करें।
- इसके बाद पंचामृत तैयार कर शिवलिंग का अभिषेक करें।
- अब शिवलिंग पर कुछ फूल चढ़ाएं और मंत्र जाप करें।
- फिर बेलपत्र, मिठाई, अनाज और भांग चढ़ाएं।
- देवी पार्वती को सुहाग की सामग्री जैसे चुनरी, सिंदूर और मेंहदी अर्पित करें।
- अब भगवान शिव को फल का भोग अर्पित करें और महामृत्युंजय मंत्र का भी जाप करें।
- अंत में घी का दीपक जलाकर भगवान शिव की आरती करें।
Sawan First Somwar 2026
- फोटो : adobe
सावन सोमवार के 4 शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:19 बजे से 05:01 बजे तक रहेगा।
- अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:00 बजे से 12:54 बजे तक रहेगा।
- प्रदोष काल शाम 06:26 बजे से 07:56 बजे तक रहेगा।
- निशिता काल रात्रि 11:33 बजे से 12:21 बजे तक रहेगा।
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Shiv Ji Ki Aarti
- फोटो : Amar Ujala
शिवजी की आरती : ॐ जय शिव ओंकारा
जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव...॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव...॥
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव...॥
अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी ।
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव...॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव...॥
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥ ॐ जय शिव...॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव...॥
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव...॥
त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ जय शिव...॥
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव...॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव...॥
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव...॥
अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी ।
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव...॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव...॥
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥ ॐ जय शिव...॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव...॥
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव...॥
त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ जय शिव...॥