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Shattila Ekadashi 2021: षटतिला एकादशी व्रत आज, जानें मुहूर्त, महत्व और कथा

Sun, 07 Feb 2021 08:02 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रुस्तम राणा Updated Sun, 07 Feb 2021 08:02 AM IST
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Shattila Ekadashi 2021 muhurat, vrat vidhi, religious significance and katha of Shattila Ekadashi
षटतिला एकादशी 2021 - फोटो : अमर उजाला

Shattila Ekadashi 2021: आज रविवार के दिन षटतिला एकादशी व्रत है। यह व्रत हर साल माघ माह में कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि के दिन रखा जाता है। षटतिला एकादशी व्रत जगत के पालनहार विष्णु जी का आशीर्वाद पाने के लिए किया जाता है। पौराणिक शास्त्रों के अनुसार, माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी 'षटतिला' या 'पापहारिणी' के नाम से विख्यात है, जो समस्त पापों का नाश करती है। जितना पुण्य कन्यादान, हजारों वर्षों की तपस्या और स्वर्ण दान से मिलता है, उससे अधिक फल षटतिला एकादशी करने से मिलता है। इस व्रत को करने से घर में सुख-शांति का वास होता है एवं मनुष्य को इस लोक में सभी सुखों की प्राप्ति होकर अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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षटतिला एकादशी मुहूर्त 2021 - फोटो : सोशल मीडिया
षटतिला एकादशी मुहूर्त
एकादशी तिथि प्रारंभ- 7 फरवरी 2021 सुबह 06 बजकर 26 मिनट से
एकादशी तिथि समाप्त- 8 फरवरी 2021 सुबह 04 बजकर 47 मिनट तक
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षटतिला एकादशी 2021 व्रत विधि - फोटो : अमर उजाला।
षटतिला एकादशी व्रत विधि

जो लोग षटतिला एकादशी का व्रत रखना चाहते हैं। उन्हें प्रातः सूर्योदय से पहले उठकर नित्यक्रिया के बाद तिल का उबटन लगाकर पानी में तिल मिलाकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद भगवान श्री कृष्ण को तिल का प्रसाद अर्पित करें और तिल से ही हवन करें। इस एकादशी के व्रत में तिल का दान करना उत्तम बताया गया है। जल पीने की इच्छा हो तो जल में तिल मिलाकर पिएं। जो लोग व्रत नहीं कर सकते हैं उनके लिए जितना संभव हो तिल का उपयोग करें। तिल खाएं, तिल मिला हुआ पानी पिएं। तिल का उबटन लगाकर स्नान करें और तिल का दान भी करें। अगर इतना सबकुछ करना संभव नहीं हो तो सिर्फ तिल का उच्चारण ही करें तो भी पाप कर्मों के अशुभ प्रभाव में कमी आएगी।

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षटतिला एकादशी 2021 - फोटो : अमर उजाला।
षटतिला एकादशी के उपाय

षटतिला एकादशी के दिन काली गाय और तिल के दान का विशेष महत्व है। मान्यता के अनुसार, षटतिला एकादशी के दिन व्यक्ति अगर तिल का प्रयोग 6 प्रकार से करे तो पाप कर्मों से मुक्त होकर हजारों वर्षों तक परलोक में सुख भोग प्राप्त करता है। इस दिन साधक को प्रात:काल स्नान करके भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। भगवान विष्णु को तिल और उड़द मिश्रित खिचड़ी का भोग लगाना चाहिए। 

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षटतिला एकादशी व्रत कथा - फोटो : अमर उजाला
षटतिला एकादशी व्रत कथा

कथा के अनुसार एक नगर में एक ब्राह्मणी रहती थी। वह भगवान विष्णु में परम भक्त थी और उनके निमित्त सभी व्रत रखती थी जिससे उसका शरीर तो शुद्ध हो गया था लेकिन कभी अन्न दान नहीं देने के कारण मृत्यु के बाद वह बैकुंठ में तो पहुंच गई लेकिन उसे खाली कुटिया मिली। स्त्री ने भगवान से पूछा कि प्रभु बैकुंठ में आकर भी मुझे खाली कुटिया क्यों मिली है। तब भगवान विष्णु ने बताया कि तुमने कभी कुछ दान नहीं किया और जब मैं तुम्हारे उद्धार के लिए दान मांगने तुम्हारे पास आया तो तुमने मुझे मिट्टी का एक ढेला पकड़ा दिया जिससे तुम्हें यह फल मिला है। अब इस समस्या का एक मात्र उपाय है कि तुम विधि पूर्वक षट्तिला एकादशी का व्रत करो। तब तुम्हारी कुटिया भर जाएगी। तब उस महिला ने षटतिला एकादशी व्रत का विधि पूर्वक व्रत किया और इस व्रत से महिला की कुटिया अन्न धन से भर गई।

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