मां श्री महासरस्वती की आराधना का पावन पर्व बसंत पंचमी आज मनाया जा रहा है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जिस तरह सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही सभी देवता, नाग, राक्षस, गंधर्व आदि एक माह के लिए पृथ्वी आते हैं। उसी प्रकार सूर्य के कुम्भ राशि में प्रवेश से ॠतुओं के राजा बसंत का पर्व रतिकाम महोत्सव का शुरुआत होता है। वैसे तो बसंतऋतु की पूरी अवधि महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका आरम्भ सर्वाधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि, इस दिन ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती का प्राकट्यपर्व भी मनाया जाता है।
Basant Panchami 2021: स्वयंसिद्ध मुहूर्त बसंत पंचमी आज, जपें यह मंत्र और पाएं मां सरस्वती की कृपा
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बसंत ऋतु को मधुमास भी कहा जाता है इसके आरम्भ होने के साथ सर्दी का समापन शुरू हो जाता है। इस मौसम में संसार के लगभग सभी वृक्ष पुरानी पत्तियों को त्यागकर नई पत्तियों व पुष्पों को जन्म देते हैं। फलों में श्रेष्ठ आम में पुष्प (बौर) भी इसी दौरान दिखाई देता है। चारों ओर हरियाली और पुष्प ही पुष्प ही नज़र आते हैं। मधुमक्खियों और भौरों का झुण्ड पुष्प लताओं पर मंडराता नज़र आता है। वातावरण में भीनी-भीनी सुगंध की मस्ती छा जाती है। मौसम में भारी परिवर्तन दिखाई देता है।
चूँकि बसंतपंचमी के दिन ही माँ सरस्वती का भी प्रादुर्भाव हुआ है। अतः इस दिन उनकी पूजा का विशेष महत्व है। श्रृष्टि में जड़ता तोड़कर चेतनता प्रदान करने वाली माँ सरस्वती का जो कोई भी इस दिन पूजन करता है, वह विद्या व ज्ञान प्राप्त करता है। चारों ओर उसका आदर-सत्कार होता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन दस प्रमुख श्लोकों से माँ सरस्वती की आराधना करने से सभी कार्यों में सिद्धि प्राप्त होती है। शिक्षण संस्थानों एवं विद्यार्थियों के लिए यह दिन वरदान की तरह है इस दिन कोई भी विद्यार्थी श्रद्धा-विश्वास से माँ की आराधना करता है तो वह परीक्षा अथवा प्रतियोगिताओं में कभी फेल नहीं होता, सभी श्लोक न आते हों तो इस दसवें श्लोक से भी माँ को प्रसन्न कर सकता है जो श्लोक इस प्रकार है...
अर्थात- मातृगणो में श्रेष्ठ, नदियों में श्रेष्ठ, देवियों में श्रेष्ठ हे माँ सरस्वती ! हमें प्रशस्ति यानी ज्ञान, धन व संपति प्रदान करें। यहाँ नदीरूपा सरस्वती का आध्यात्मिक भाव सुषुम्ना नाडी से है, जो इड़ा व पिंगला दोनों के मध्य भाग में स्थित है। यह मूलाधार में दोनों के साथ युक्त है।