सावन का महीना शुरू होते ही मंदिरों में 'हर-हर महादेव' और 'बम-बम भोले' के जयकारे गूंजने लगते हैं। शिवालयों में जलाभिषेक के लिए भक्तों की लंबी कतारें दिखाई देती हैं और घर-घर में व्रत, पूजा और शिव आराधना का माहौल बन जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस पवित्र महीने में कई घरों में कढ़ी क्यों नहीं बनाई जाती? आखिर दही और बेसन से बनने वाली यह लोकप्रिय डिश सावन में खाने से लोग क्यों बचते हैं? इसके पीछे एक धार्मिक मान्यता जुड़ी हुई है।
Sawan 2026: सावन में क्यों नहीं खानी चाहिए कढ़ी? भगवान शिव की पूजा से जुड़ी है इसकी खास वजह
Sawan 2026: सावन में भगवान शिव की पूजा के साथ खानपान के भी कई नियम माने जाते हैं। इन्हीं में से एक है कढ़ी न खाना। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसके पीछे भगवान शिव की पूजा, दही के धार्मिक महत्व और सात्विक जीवनशैली से जुड़ी मान्यता है।
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सावन के महीने में होती है भोलेनाथ की पूजा
धार्मिक मान्यता है कि देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु चार महीने के लिए क्षीरसागर में शेषनाग की शैया पर योगनिद्रा में चले जाते हैं। इस अवधि में सृष्टि के संचालन का दायित्व भगवान शिव को सौंपा जाता है। यही कारण है कि सावन का पूरा महीना भोलेनाथ की विशेष आराधना के लिए समर्पित माना जाता है।
ये चीजें मानी जाती हैं पूजा के लिए पवित्र
इस दौरान शिव भक्त भगवान शिव को कच्चा दूध, दही और बाकी दुग्ध पदार्थ अर्पित करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार ये सभी चीजें पूजा के लिए काफी पवित्र मानी जाती हैं। इसलिए कई लोग पूरे सावन इनका सेवन करने से परहेज करते हैं। चूंकि कढ़ी बनाने में दही का उपयोग किया जाता है, इसलिए इस महीने इसे न खाने की परंपरा प्रचलित है।
सावन में इसलिए नहीं खानी चाहिए कढ़ी?
धार्मिक मान्यता है कि सावन केवल पूजा-पाठ करने का महीना नहीं है, बल्कि यह आत्म संयम, सादगी और सात्विक जीवन अपनाने का भी संदेश देता है। यही वजह है कि इस दौरान लोग हल्का, शुद्ध और आसानी से पचने वाला भोजन करना पसंद करते हैं। मान्यता है कि ऐसा भोजन शरीर और मन दोनों को शांत रखता है, जिससे भगवान शिव की भक्ति और पूजा में मन अधिक एकाग्र रहता है।
खट्टा खाने से रहते हैं दूर
इसके अलावा सावन में अधिक खट्टे और भारी भोजन से बचने की भी सलाह दी जाती है। कढ़ी दही से बनती है और इसका स्वाद खट्टा होता है। यही वजह है कि कई लोग धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए पूरे सावन इसे अपने भोजन से दूर रखते हैं। हालांकि, यह एक धार्मिक मान्यता है और इसका पालन पूरी तरह व्यक्ति की आस्था और परंपरा पर निर्भर करता है। जो लोग इन मान्यताओं का पालन करते हैं, वे सावन में सात्विक भोजन और भगवान शिव की भक्ति को विशेष महत्व देते हैं।
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।