Sawan: सावन के पहले सोमवार से शुरू करें सोलह सोमवार व्रत, जानिए संकल्प से उद्यापन तक के जरूरी नियम
सोलह सोमवार व्रत भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के सबसे महत्वपूर्ण व्रतों में माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि यदि इसकी शुरुआत श्रावण के पहले सोमवार से की जाए और पूरे विधि-विधान के साथ व्रत का पालन किया जाए, तो मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। जानिए व्रत शुरू करने की सही विधि, जरूरी नियम और उद्यापन का तरीका।
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विस्तार
भगवान शिव को समर्पित सोलह सोमवार व्रत हिंदू धर्म में अत्यंत फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि श्रद्धा, विश्वास और नियमपूर्वक इस व्रत को करने से भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। खासतौर पर श्रावण मास के पहले सोमवार से इस व्रत की शुरुआत करना बेहद शुभ माना गया है। हालांकि, व्रत का पूरा फल तभी प्राप्त होता है, जब इसे शास्त्रों में बताए गए नियमों के अनुसार किया जाए। तो आज की इस खबर में हम आपको इसी के बारे में बताने जा रहे हैं।
क्या है नियम?
धार्मिक मान्यताओं की मानें तो सोलह सोमवार व्रत शुरू करने से पहले विधिवत संकल्प लेना चाहिए। इसके लिए ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और भगवान शिव के समक्ष बैठकर हाथ में जल, अक्षत और बेलपत्र लेकर संकल्प लें कि आप श्रद्धा और भक्ति के साथ लगातार सोलह सोमवार तक व्रत और पूजा करेंगे। शास्त्रों में संकल्प और नियमितता को व्रत की सफलता का आधार माना गया है।
शिव जी की पूजा से मिलेगा फल
हर सोमवार भगवान शिव की विधिपूर्वक पूजा करें। शिव परिवार के समक्ष घी के पांच दीपक जलाएं और 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जप करें। भगवान शिव को बेलपत्र, भांग, धतूरा, पुष्प, जल, पंचामृत, रोली और अक्षत अर्पित करें। पूजा में बिल्व पत्र का विशेष महत्व बताया गया है। वहीं, मौसमी फलों के साथ घेवर का भोग भी लगाया जा सकता है।
तीन बार पूजा के प्रसाद को बांटे
पूजा के बाद प्रसाद को तीन बराबर भागों में बांटने की परंपरा है। पहला भाग गाय को खिलाएं, दूसरा परिवार के सदस्यों में वितरित करें और तीसरा भाग स्वयं ग्रहण करें। धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से व्रत का पुण्य बढ़ता है और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। व्रत के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करना, प्रत्येक सोमवार एक ही समय पर पूजा करना और फलाहार या सात्विक भोजन ग्रहण करना शुभ माना गया है। कई श्रद्धालु इस दिन नमक का भी त्याग करते हैं।
ब्राह्मणों को भोजन कराना है जरूरी
सोलह सोमवार पूरे होने के बाद अगले सोमवार व्रत का उद्यापन किया जाता है। शास्त्रीय मान्यता की मानें तो यह प्रक्रिया प्रातःकाल से सुबह 11 बजे के बीच पूरी कर लेनी चाहिए। इस दिन भगवान शिव की विधिवत पूजा के बाद हवन, तर्पण, मार्जन और विसर्जन जैसे धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। अंत में ब्राह्मणों को भोजन कराकर श्रद्धानुसार दक्षिणा और दान देने के साथ व्रत का समापन किया जाता है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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