Sawan Somwar 2026: सावन में महादेव की पूजा करने से व्यक्ति को कई गुना शुभ फल की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यता है कि, इस माह सच्चे मन से की गई आराधना कभी व्यर्थ नहीं जाती और साधक प्रभु से खास जुड़ाव महसूस करता है। खासतौर पर सावन सोमवार पर की गई पूजा जीवन में कई बदलाव लेकर आती हैं, इसलिए इसका महत्व सबसे अधिक माना गया है। कहते हैं कि, इस दिन व्रत रखने और शिव नाम जपने से भाग्य के बंद द्वार खुलने लगते हैं। साथ ही सफलता के नए रास्ते और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। वहीं, इस दिन भगवान शिव के प्रिय महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से कई तरह के ग्रह दोष भी शांत होते हैं। यही नहीं नकारात्मक ऊर्जा, रोग और भय से भी राहत मिलने लगती हैं। ऐसे में आप सावन के पहले सोमवार के शुभ संयोग में महामृत्युंजय सहित अन्य शक्तिशाली मंत्रों का जाप कर सकते हैं। ये शांति और सकारात्मकता लाने में सहायक होते हैं। आइए इन्हें जानते हैं।
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Sawan Somwar 2026: महामृत्युंजय सहित इन शक्तिशाली मंत्रों से करें भगवान शिव की पूजा, खुलेगा बंद किस्मत का ताला
Sun, 02 Aug 2026 04:54 PM IST
मेघा कुमारी
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: मेघा कुमारी
Updated Sun, 02 Aug 2026 04:54 PM IST
सार
Sawan Somwar 2026: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन सोमवार के दिन की गई शिव पूजा से व्यक्ति को हर कार्य में लाभ मिलता है। साथ ही कई तरह की परेशानियां भी दूर होने लगती हैं।
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Sawan Somwar 2026
- फोटो : अमर उजाला AI
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Sawan Somwar 2026
- फोटो : adobe
महामृत्युंजय मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे, महादेवाय धीमहि, तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
पंचाक्षरी मंत्र
ॐ नमः शिवाय
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
Sawan Somwar 2026: सावन के पहले सोमवार पर राशि के अनुसार करें शिव अभिषेक, महादेव की कृपा से दूर होंगे कष्ट
शिव गायत्री मंत्रॐ तत्पुरुषाय विद्महे, महादेवाय धीमहि, तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
पंचाक्षरी मंत्र
ॐ नमः शिवाय
Sawan Somwar 2026
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शिव जी का मूल मंत्र
ऊँ नम: शिवाय।।
भगवान शिव के प्रभावशाली मंत्र
ओम साधो जातये नम:।। ओम वाम देवाय नम:।।
ओम अघोराय नम:।। ओम तत्पुरूषाय नम:।।
ओम ईशानाय नम:।। ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय।।
ऊँ नम: शिवाय।।
भगवान शिव के प्रभावशाली मंत्र
ओम साधो जातये नम:।। ओम वाम देवाय नम:।।
ओम अघोराय नम:।। ओम तत्पुरूषाय नम:।।
ओम ईशानाय नम:।। ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय।।
Sawan Shivratri 2026: कब है सावन शिवरात्रि? जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और भगवान शिव को प्रसन्न करने के उपाय
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Sawan Somwar 2026
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शिव जी के प्रिय मंत्र
ॐ नमः शिवाय।
नमो नीलकण्ठाय।
ॐ पार्वतीपतये नमः।
ॐ नमः शिवाय।
नमो नीलकण्ठाय।
ॐ पार्वतीपतये नमः।
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Sawan Somwar 2026
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करपूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
सदा वसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥
सुख और शांति प्राप्त करने का मंत्र
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्!
जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव...॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव...॥
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव...॥
अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी ।
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव...॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव...॥
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥ ॐ जय शिव...॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव...॥
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव...॥
त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ जय शिव...॥
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
सदा वसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥
सुख और शांति प्राप्त करने का मंत्र
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्!
Sawan 2026: सावन सोमवार के रखने जा रहे हैं व्रत ? जान लें कुछ जरूरी नियम
शिवजी की आरती : ॐ जय शिव ओंकाराजय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव...॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव...॥
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव...॥
अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी ।
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव...॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव...॥
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥ ॐ जय शिव...॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव...॥
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव...॥
त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ जय शिव...॥
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।