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Navratri Vrat Parana: कब और कैसे करें चैत्र नवरात्रि व्रत का पारण? जानें सही समय और विधि

ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: Shweta Singh Updated Fri, 27 Mar 2026 06:01 AM IST
सार

आज चैत्र नवरात्रि की नवमी तिथि है। नवरात्रि के अंतिम दिन कलश विसर्जन और पारण होता है। नवरात्रि व्रत के पारण के विशेष नियम हैं। आइए जानते हैं उन नियमों के बारे में।  
 

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Chaitra Navratri 2026 Vrat Parana Kab Karein Vidhi aur Niyam in hindi
चैत्र नवरात्रि 2026 व्रत पारण - फोटो : amar ujala
Chaitra Navratri Vrat Parana: सनातन धर्म में चैत्र नवरात्रि व्रत के पारण का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि बिना पारण के व्रत और पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं हो सकता। इसलिए नवरात्रि के दौरान व्रत रखने वाले भक्तों के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि वे निर्धारित तिथि और शुभ मुहूर्त पर पारण करें। व्रत को विधिवत रूप से संपन्न करने की इस प्रक्रिया को ही पारण कहा जाता है। चैत्र नवरात्रि को ध्यान में रखते हुए कई लोगों के मन में यह प्रश्न उठता है कि नौ दिवसीय व्रत का समापन कब और कैसे किया जाना चाहिए? इसीलिए पारण करते समय उसकी विधि और नियमों को ध्यान में रखना अत्यंत आवश्यक है। आइए जानते हैं उन नियमों के बारे में। 

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किस तिथि पर करें पारण
शास्त्रों के अनुसार, नवरात्रि का व्रत आमतौर पर नवमी या दशमी तिथि को किया जाता है। कभी-कभी दशमी तिथि नवमी के दिन ही शुरू हो सकती है। ऐसे मामलों में उसी दिन व्रत करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दशमी के दिन व्रत करना सबसे उत्तम माना जाता है। यह व्रत के पूर्ण होने और देवी दुर्गा की कृपा प्राप्त होने का संकेत है।

चैत्र नवरात्रि व्रत पारण की विधि
  • नवरात्रि व्रत करते समय कुछ नियमों का पालन करना महत्वपूर्ण है:
  • सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठें और स्नान जैसी अपनी दैनिक दिनचर्या पूरी करें।
  • साफ कपड़े पहनें और देवी दुर्गा की पूजा करें, आरती करें और क्षमा याचना करें।
  • इसके बाद गंगाजल और तुलसी ग्रहण करें।
  • कन्याओं को भोग लगाने के बाद दक्षिणा देकर उन्हें विदा करें। 
  • इसके बाद सात्विक भोजन के साथ व्रत खोलें।

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पारण के नियम
  • पारण करने से पहले कन्या पूजन करना बहुत महत्वपूर्ण है। यह आमतौर पर अष्टमी या नवमी को किया जाता है।
  • देवी को भोग लगाए बिना व्रत नहीं तोड़ना चाहिए।
  • पारण के दौरान केवल सात्विक भोजन ही ग्रहण करना चाहिए।
  • व्रत खोलते समय मन शांत और प्रसन्न होना चाहिए।
  • पारण जल्दबाजी में करने से बचना चाहिए।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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