{"_id":"69c50357998ea957f60892d6","slug":"chaitra-navratri-devotees-flock-to-shrine-of-goddess-ashapura-at-asalpur-dham-on-navratri-ashtami-2026-03-26","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"चैत्र नवरात्रि: आसलपुर धाम में आस्था का सैलाब, नवरात्रि अष्टमी पर मां आशापुरा के दरबार में उमड़े श्रद्धालु","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चैत्र नवरात्रि: आसलपुर धाम में आस्था का सैलाब, नवरात्रि अष्टमी पर मां आशापुरा के दरबार में उमड़े श्रद्धालु
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: Himanshu Priyadarshi
Updated Thu, 26 Mar 2026 03:28 PM IST
सार
Chaitra Navratri 2026: जयपुर के आसलपुर धाम में नवरात्रि अष्टमी पर मां आशापुरा के दर्शन के लिए भारी भीड़ उमड़ी। गुफा मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं ने सैकड़ों सीढ़ियां चढ़ीं। प्राचीन मान्यताओं और व्यवस्थाओं के बीच भक्ति का माहौल बना रहा।
जयपुर जिले के जोबनेर क्षेत्र से करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित आसलपुर गांव में चैत्र नवरात्रि की अष्टमी के अवसर पर मां आशापुरा के दरबार में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह से ही पहाड़ी पर बने गुफा मंदिर तक पहुंचने के लिए लंबी कतारें लगी रहीं और “जय माता दी” के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
Trending Videos
2 of 6
चैत्र नवरात्रि 2026
- फोटो : अमर उजाला
गुफा मंदिर तक पहुंचने के लिए कठिन चढ़ाई
आसलपुर धाम अपने अनोखे स्वरूप के लिए जाना जाता है, जहां मां आशापुरा पहाड़ी की गुफा में विराजमान हैं। श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए सैकड़ों सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं, लेकिन इसके बावजूद भक्तों का उत्साह कम नहीं होता। हर कदम के साथ उनकी आस्था और विश्वास और मजबूत होता नजर आता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
3 of 6
चैत्र नवरात्रि 2026
- फोटो : अमर उजाला
प्रकट होने की प्राचीन मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विक्रम संवत 699 में भाद्रपद शुक्ल अष्टमी के दिन मां आशापुरा इसी स्थान पर पर्वत को चीरकर प्रकट हुई थीं। मंदिर के पुजारी मोहित शर्मा के अनुसार देवी ने सांभर के तत्कालीन नरेश माणकराव को दर्शन देकर यहां मंदिर निर्माण का आदेश दिया था। इस अवसर पर हर वर्ष भव्य प्रागट्योत्सव भी आयोजित किया जाता है।
4 of 6
मां आशापुरा का मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
विभिन्न समाजों की कुलदेवी के रूप में पूजित
समिति संरक्षक महावीर सिंह राव के अनुसार आसलपुर धाम को मां आशापुरा का प्रथम प्राकट्य स्थल माना जाता है। चौहान वंश सहित मैढ़ क्षत्रिय, स्वर्णकार, सोनी, मौसूण, राव, जाट, गुर्जर और माली समाज मां को अपनी कुलदेवी के रूप में पूजते हैं। यहां सात्विक रूप से मिष्ठान, चावल, लापसी और नारियल का भोग अर्पित किया जाता है।
मां आशापुरा के दर्शन को जाते श्रद्धालु
- फोटो : अमर उजाला
श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं
नवरात्रि के दौरान मंदिर सेवा समिति द्वारा श्रद्धालुओं के लिए ठहरने, पेयजल और भोजन की व्यवस्था की गई है। समिति अध्यक्ष शिवरतन सोनी ने बताया कि व्रतधारियों के लिए फलाहार की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे आने वाले भक्तों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे| Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।