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धीमा जहर: फैक्टरी-बूचड़खानों के दूषित पानी से फसलों की सिंचाई, हर दूसरा व्यक्ति बन रहा गैस्ट्रो का मरीज

अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Thu, 26 Mar 2026 03:15 PM IST
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सार

चिकित्सकों के अनुसार नाले के पानी में मौजूद जैसे ई कोलाई, सैल्मोनेला बैक्टीरिया सब्जियों और अनाज के माध्यम से पेट में पहुंचकर गैस्ट्रोएन्टराइटिस, उल्टी-दस्त, टाइफाइड, हैजा और हेपेटाइटिस-ए जैसी बीमारियां पैदा कर रहे हैं।

Irrigation of crops with contaminated water from factory-slaughterhouses
खैर रोड पर पंपिंग सेट के जरिये खेतों में छोड़ा जा रहा पानी - फोटो : संवाद
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विस्तार

अलीगढ़ के मथुरा रोड ही नहीं खैर मार्ग पर फैक्टरियों व बूचड़खानों से निकले दूषित पानी से फसलों की सिंचाई हो रही है और लेड, कैडमियम और क्रोमियम जैसी भारी धातुओं के अंश अनाज के जरिये मानव शरीर तक पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार इससे गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल रोग, लीवर डैमेज, किडनी फेलियर और हृदय रोग के मरीज बढ़ रहे हैं। हर दूसरा व्यक्ति पेट में गैस (गैस्ट्रो) के रोग से पीड़ित है।

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अमर उजाला की टीम ने शुक्रवार को खैर रोड और पुराना मथुरा बाईपास रोड पर नालों की पड़ताल की तो दर्जन भर से अधिक पंपिंग सेट नालों के किनारे लगे मिले। इनके पाइप खेतों के दूसरे छोर तक मिले। खेतों में गेहूं, पालक, धनिया, लहसुन, भिंडी, गोभी और सरसों की फसल खड़ी थी।
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फैक्टरियों से निकलने वाला केमिकल युक्त, रक्त-मिश्रित और कार्बनिक कचरे वाला पानी बिना नालों में गिरता है। यही नहीं मुर्गा मंडी में मृत मुर्गों को इसी नाले में बहा दिया जा रहा है, इनके सड़ने से तीखी दुर्गंध फैल रही थी, पानी भी दूषित था। समाज सेवी संजीव कौशिक का कहना है कि मीट फैक्टरियों के साथ अन्य फैक्टरियों से निकलने वाले गंदे पानी से फसलों और अनाज की सिंचाई करने के लिए शासन-प्रशासन जिम्मेदार हैं। अगर किसानों को एसटीपी का पानी उपलब्ध कराया जाए तो वह ऐसा नहीं करेंगे।

यह समस्या न केवल पेट और लीवर रोगियों की संख्या बढ़ा रही है, बल्कि बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में संक्रमण तेजी से फैल रहा है। कीटाणु और टॉक्सिन सीधे सब्जियों-अनाज के जरिये शरीर में प्रवेश कर रहे हैं, जिससे पेट, किडनी व लीवर से लेकर हार्ट तक की समस्या हो रही है।-डॉक्टर अतहर कमाल, हृदय रोग विशेषज्ञ
सिंचाई के दौरान हैवी मेटल दूषित जल से सब्जियों व अनाज से होकर हमारे शरीर में पहुंचते हैं, इनके सेवन से कीटाणु शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं। यहां हर दूसरा मरीज गैस्ट्रो बीमारी से पीड़ित है।-डॉ. अभिनव वर्मा, पेट रोग विशेषज्ञ
फैक्टरियों से निकलने वाला पानी विभिन्न प्रकार के केमिकल होते हैं। ऐसे में बिना ट्रीट किए इस पानी का सिंचाई के लिए प्रयोग करना गलत हैं। इन सब्जियों व फलों का सेवन सबसे ज्यादा खतरनाक है।-डॉ. संजय तायल, फिजिशियन
नालों के पानी से होने वाली सब्जियों और अनाज के सेवन से बच्चों की रोग प्रति रोधक क्षमता खत्म सी हो जाती है। ब्लड के भीतर टॉक्सिन समाप्त करने वाले केमिकल भी इसी नाले में बहाए जा रहे हैं। इससे बच्चों में पैदाइशी बीमारी हो रही है।-डॉ. विभव वार्ष्णेय, बाल रोग विशेषज्ञ
दूषित पानी से सींची जा रहीं सब्जियों और अनाज में न्यूट्रीशनल एलीमेंट विटामिन, जिंक, सोडियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम जैसे तत्वों की भारी कमी हो जाती है।यह सेहत में लिए हानिकारक है और इससे शारीरिक विकास रुक जाता है।-डॉ. उमाशंकर वार्ष्णेय, एमडी पैथालॉजिस्ट
खैर रोड व पुराना मथुरा रोड बाइपास पर स्थित मीट फैक्टरियों को पानी नालों डिस्चार्ज करने की अनुमति हैं। समय-समय पर इसकी जांच भी होती है। मृत मुर्गा आदि को नालों में फेंकना गलत है। जिम्मेदार विभाग को इस पर कार्रवाई करनी चाहिए।-विश्वनाथ शर्मा, आरओ, प्रदूषण

इस तरह से बढ़ रहा खतरा

  • चिकित्सकों के अनुसार नाले के पानी में मौजूद जैसे ई कोलाई, सैल्मोनेला बैक्टीरिया सब्जियों और अनाज के माध्यम से पेट में पहुंचकर गैस्ट्रोएन्टराइटिस, उल्टी-दस्त, टाइफाइड, हैजा और हेपेटाइटिस-ए जैसी बीमारियां पैदा कर रहे हैं।
  • लंबे समय तक दूषित पानी से सींची गई सब्जियों का सेवन से लीवर में सूजन, पीलिया और क्रॉनिक लीवर डिजीज का खतरा बढ़ जाता है।कैडमियम और लेड किडनी को नुकसान पहुंचाते हैं।
  • क्रोमियम और अन्य टॉक्सिक तत्व हाइपरटेंशन, हार्ट अटैक और कार्डियोवैस्कुलर रोगों को ट्रिगर कर रहे हैं। सीवेज पानी से सिंचित सब्जियों पालक, गोभी, टमाटर आदि में भारी धातुओं के अंश अधिक होते हैं, जो गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा करते हैं।


समाधान के लिए सुझाव

  • सिंचाई के लिए पानी को शुद्ध करके ही इस्तेमाल किया जाए।
  • नाले के दूषित पानी का उपयोग पूरी तरह बंद किया जाना चाहिए।
  • वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाकर प्रदूषित पानी को साफ किया जाना चाहिए।
  • किसानों को भी इस दिशा में जागरूक किए जाने की जरूरत है।
  • ऑर्गेनिक या ट्यूबवेल पानी से उगाई गई सब्जियों का ही सेवन करें।
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