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Stem Cell Therapy: ऑटिज्म के इलाज के नाम पर स्टेम सेल थेरेपी अब गैरकानूनी, चमत्कारी इलाज का दावा भी गलत

परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, अलीगढ़ Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Thu, 26 Mar 2026 04:36 PM IST
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सार

आदेश के मुताबिक, ल्यूकेमिया (ब्लड कैंसर), लिम्फोमा, मल्टीपल मायलोमा, एप्लास्टिक एनीमिया के अलावा कुछ इम्यून सिस्टम और बोन मैरो से जुड़ी बीमारियों के इलाज में स्टेम सेल थेरेपी का इस्तेमाल किया जा सकता है।

Stem cell therapy as a treatment for autism
ऑटिज्म। - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार

ऑटिज्म के इलाज को लेकर स्टेम सेल थेरेपी अब गैरकानूनी है। देश के मेडिकल कॉलेजों, अस्पतालों और पंजीकृत डॉक्टरों को जारी आदेश में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने कहा है कि स्टेम सेल थेरेपी का उपयोग केवल उन्हीं बीमारियों में किया जा सकता है, जिन्हें स्वास्थ्य मंत्रालय और संबंधित एजेंसियों से अनुमति प्राप्त हैं। ऑटिज्म इस सूची में शामिल नहीं है।

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स्टेम सेल थेरेपी एक आधुनिक चिकित्सा तकनीक है, जिसमें शरीर की खास तरह की कोशिकाओं (स्टेम सेल) का इस्तेमाल करके खराब या बीमार ऊतकों को ठीक करने की कोशिश की जाती है। ये शरीर की मास्टर सेल होती हैं जिनमें अलग-अलग तरह की कोशिकाओं (जैसे खून, मांसपेशी, नस) में बदलने की क्षमता होती है जो शरीर की मरम्मत और पुनर्निर्माण में मदद करती हैं।
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देश के कई हिस्सों में निजी क्लीनिक ऑटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी और अन्य न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के इलाज के नाम पर स्टेम सेल थेरेपी का दावा करते हुए मरीजों से लाखों रुपये तक वसूल रहे हैं। बीते 30 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई में स्टेम सेल थेरेपी को लेकर फैसला सुनाया जिसे लेकर 10 मार्च को भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने एनएमसी के अध्यक्ष डॉ. अभिजीत सेठ को सिफारिश पत्र लिखते हुए कुल 32 बीमारियों की सूची साझा की जिनके इलाज में स्टेम सेल थेरेपी का इस्तेमाल किया जा सकता है। डॉ. बहल ने पत्र में यहां तक लिखा कि ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (एएसडी) को लेकर स्टेम सेल थेरेपी का दावा नहीं किया जा सकता।

शोध में कर सकते हैं इस्तेमाल, लेकिन नियम सख्त
आईसीएमआर का मानना है कि स्वीकृत बीमारियों के अलावा स्टेम सेल थेरेपी का उपयोग केवल शोध के तहत ही किया जा सकता है। इसके लिए कड़े नियम तय किए गए हैं जिनमें क्लीनिकल ट्रायल की अनिवार्यता, संस्थागत एथिक्स कमेटी की मंजूरी, संबंधित नियामक एजेंसियों जैसे औषधि नियंत्रक विभाग की अनुमति लेना शामिल है। इसके लिए मरीज से कोई शुल्क नहीं लिया जा सकता। साथ ही परीक्षण के दौरान नुकसान या मृत्यु की स्थिति में मुआवजा देना जरूरी है।

डॉक्टर, अस्पताल के खिलाफ होगी कार्रवाई
एनएमसी के सचिव डॉ. राघव लैंगर ने कहा है कि तय मानकों के बाहर या बिना स्वीकृति के दी गई स्टेम सेल थेरेपी को अवैध माना जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित डॉक्टरों और संस्थानों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। एडवाइजरी को सख्ती से लागू करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

सिर्फ इन बीमारियों में मान्य है स्टेम सेल थेरेपी
आदेश के मुताबिक, ल्यूकेमिया (ब्लड कैंसर), लिम्फोमा, मल्टीपल मायलोमा, एप्लास्टिक एनीमिया के अलावा कुछ इम्यून सिस्टम और बोन मैरो से जुड़ी बीमारियों के इलाज में स्टेम सेल थेरेपी का इस्तेमाल किया जा सकता है।

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