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Ganga Saptami 2026: गंगा सप्तमी कब है? जानें सही तिथि, पूजा विधि और महत्व

धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Shweta Singh Updated Sat, 11 Apr 2026 01:49 PM IST
सार

वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को गंगा सप्तमी के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन मां गंगा जाह्नु ऋषि के आश्रम से पुनः प्रकट हुई थीं जिसके कारण उन्हें “जाह्नवी” नाम मिला। 
 

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Ganga Saptami Date Time Imprtance and Puja Vidhi in hindi
Ganga Saptami 2026 - फोटो : amar ujala

हिन्दू धर्म में गंगा सप्तमी का विशेष महत्व बताया गया है। विभिन्न पुराणों जैसे पद्म पुराण और नारद पुराण में मां गंगा की महिमा और उनके स्मरण, स्नान तथा पूजा के महत्व का विस्तार से वर्णन मिलता है। इन्हीं मान्यताओं के आधार पर वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को गंगा सप्तमी के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन मां गंगा जाह्नु ऋषि के आश्रम से पुनः प्रकट हुई थीं जिसके कारण उन्हें जाह्नवी नाम से भी जाना जाता है। इस वर्ष सप्तमी तिथि दो दिनों तक पड़ रही है इसलिए इस बात को लेकर कुछ भ्रम की स्थिति बनी हुई है कि 22 अप्रैल और 23 अप्रैल में से किस दिन गंगा सप्तमी मनाई जाए। आइए जानते हैं विस्तार से। 


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गंगा सप्तमी 2026 की तिथि और मुहूर्त - फोटो : adobe stock

गंगा सप्तमी 2026 की तिथि और मुहूर्त
 सप्तमी तिथि आरंभ:  22 अप्रैल  रात्रि 10 बजकर 50 मिनट से।
 सप्तमी तिथि समाप्त: 23 अप्रैल, रात्रि  8 बजकर 50 मिनट पर।
 उदयातिथि के अनुसार गंगा सप्तमी 23 अप्रैल को मनाई जाएगी।

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गंगा सप्तमी का धार्मिक महत्व - फोटो : amar ujala

गंगा सप्तमी का धार्मिक महत्व
धार्मिक ग्रंथों में गंगा को मोक्ष प्रदान करने वाली नदी माना गया है। गंगा स्नान और स्मरण से जीवन के पापों का नाश होता है और व्यक्ति को मानसिक शांति मिलती है।
स्कन्द पुराण में खंड 3 के 31वें अध्याय के सातवें श्लोक में कहा गया है:
गंगा गंगेति यो ब्रूयाद्योजनानां शतैरपि ।।
मुच्यते सर्वपापेभ्यो विष्णुलोकं स गच्छति ।। ७ ।।

इस श्लोक के अनुसार केवल गंगा का नाम स्मरण करने मात्र से भी मनुष्य पापों से मुक्त हो सकता है। 

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गंगा स्नान का महत्व - फोटो : Adobe Stock

गंगा स्नान का महत्व
गंगा सप्तमी का पर्व मां गंगा की पवित्रता, करुणा और मोक्ष प्रदान करने वाली शक्ति का प्रतीक है। इस दिन गंगा स्नान, पूजा और स्मरण का विशेष महत्व माना जाता है, क्योंकि यह केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि का माध्यम है। गंगास्तोत्रम् के श्लोक के अनुसार: 
“पतितोद्धारिणि जाह्नवि गंगे, खंडित गिरिवरमंडित भंगे।
भीष्मजननि हे मुनिवरकन्ये, पतितनिवारिणि त्रिभुवन धन्ये॥”

भावार्थ: हे मां गंगे! आप पतितों का उद्धार करने वाली, जाह्नु ऋषि की पुत्री हैं। आपका पवित्र प्रवाह पर्वतों को चीरते हुए भी उन्हें शोभा प्रदान करता है। आप महान भीष्म पितामह की माता और महान ऋषि की कन्या हैं। हे गंगे! आप पापों को दूर करने वाली और तीनों लोकों में पूजनीय एवं कल्याण देने वाली हैं।
सही मायने में समझें  तो मां गंगा पतितों का उद्धार करने वाली हैं, पापों को दूर करने वाली हैं और तीनों लोकों में पूजनीय हैं। उनका पवित्र जल जीवन को शुद्ध करता है और मन को शांति प्रदान करता है। इसी वजह से गंगा सप्तमी के दिन गंगा स्नान और पूजा को विशेष फलदायी माना गया है। यह पर्व हमें यह संदेश देता है कि सच्ची आस्था और श्रद्धा से किया गया स्मरण भी जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।
 

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स्नान के बाद तांबे के लोटे में जल और थोड़ा गंगाजल भरकर सूर्य देव या मां गंगा को अर्घ्य दें। - फोटो : अमर उजाला

गंगा सप्तमी की पूजा विधि

  • गंगा सप्तमी के दिन ब्रह्ममुहूर्त में उठकर गंगा नदी में स्नान करें। 
  • यदि संभव न हो तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
  • स्नान के बाद तांबे के लोटे में जल और थोड़ा गंगाजल भरकर सूर्य देव या मां गंगा को अर्घ्य दें।
  • मंदिर में बैठकर मां गंगा के मंत्र "ॐ नमो गंगायै विश्वरूपिण्यै नारायण्यै नमो नमः" का जप करें।
  • इस दिन जरूरतमंदों को मौसमी फल या अनाज का दान करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।




डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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