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Pitra Paksh 2019: श्राद्ध कर्म क्या है? किन बातों पर विशेष ध्यान देना चाहिए

धर्म डेस्क,अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Wed, 11 Sep 2019 08:19 AM IST
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Mythological significance of Shradh 2019, pitru paksha me kya nahi karna chahiye
shradh

जो श्रद्धा पूर्वक दिया जाएं उसे श्राद्ध कहते हैं। पुराणों अनुसार मनुष्य का अगला जीवन पिछले संस्कारों से बनता है। श्राद्ध कर्म इस भावना से किया जाता है कि अगला जीवन बेहतर हो। जिन पितरों का हम श्रद्धा पूर्वक श्राद्ध करते हैं वे हमारी मदद करते हैं।



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वायु-पुराण के अनुसार आत्मज्ञानी सूत जी ने ऋषियों से कहा आप सभी ब्रह्मा जी की आज्ञा सुने और उसका पालन भी करें। ब्रह्मा जी ने कहा है जो मनुष्यलोक के पोषण की दृष्टि से श्राद्ध कर्म करेंगे, उन्हें पितृगण सर्वदा आशीर्वाद देंगे। श्राद्धकर्म में अपने प्रपितामह तक के नाम एवं गोत्र का उच्चारण कर जिन पितरों का श्राद्ध कर्म किया जाएगा वे पितृगण उस श्राद्धदान से प्रसन्न होंगे।

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पितरों के आशीर्वाद से ही अध्ययन, तपस्या आदि सिद्धि प्राप्त होती है। पितृगण ही हम सबको प्रेरणा प्रदान करते है। योग की मर्यादा जानने वालों को सदैव श्राद्ध करना चाहिए। मनुष्यों द्वारा पितरों को श्रद्धापूर्वक दी गई वस्तुएँ ही श्राद्ध कहलाती है। जो व्यक्ति पितरों की पूजा किए बिना ही अन्य कोई अनुष्ठान करता है उसको उस क्रिया का फल नहीं मिलता है।

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'वराह पुराण' में मार्कण्डेयजी गौरमुख ब्राह्मणों से कहते हैं- सभी वेदों को जानने वाले, यज्ञ कर्म करने वाले, भानजे, पौत्र, नाती, ससुर, दामाद, मामा, तपस्वी ब्राह्मण, शिष्य, संबंधी और अपने माता पिता के प्रेमी ब्राह्मणों को श्राद्धकर्म में नियुक्त करना चाहिए।'मनुस्मृति' के अनुसार जो ब्राह्मण क्रोध नहीं करते है सदा प्रसन्न रहते है और परोपकार करते है वो श्राद्ध कर्म के अनुष्ठान के लिए सबसे श्रेष्ठ है।


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वायु-पुराण के अनुसार श्राद्ध के अवसर पर हजारों ब्राह्मणों को भोजन कराने से जो फल मिलता है, वह फल योग में निपुण एक ही ब्राह्मण संतुष्ट होकर दे देता है और नरक से छुटकारा दिलाता है। जो व्यक्ति योगाभ्यासी या दो ब्रह्मचारियों को श्राद्ध के अवसर पर भोजन कराएगा उसके पितृगण उससे परम संतुष्ट होंगे। सोमरस बेचने वाला, जनसमाज में निंदित, चोर, चुगलखोर, माता-पिता का परित्याग करने वाला ब्राह्मण श्राद्ध कर्म के अवसर पर निमंत्रण देने योग्य नहीं हैं।

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