पितृ पक्ष का आगमन होने वाला है और ये तिथियां व्यक्ति के जीवन में काफी महत्व रखती है। हर कोई पितरों की आत्मशांति की कामना करता है, जिसके लिए इन तिथियों में श्राद्ध कर्म का विधान है। धार्मिक ग्रंथो अनुसार तीर्थ का महत्त्व बहुत अधिक है और इन तिथियों में तीर्थों में किए गए श्राद्ध का तो विशेष फल मिलता है। आज हम आपको कुछ तीर्थं स्थल और उनके महत्व के बारे में बताएंगे।
पितृ पक्ष 2019: श्राद्ध कर्म के लिए क्यों महत्वपूर्ण होते हैं तीर्थ?
ब्रह्मकपाल घाट बद्रीनाथ उत्तराखंड
उत्तराखंड में स्थित ब्रह्मकपाल घाट का श्राद्ध कर्म के लिए बड़ा महत्व है। मान्यता है कि शिव को ब्रह्म हत्या के पापों से मुक्ति यही से मिली थी। यहां श्राद्ध कर्म करने से पूर्वजों की आत्माएं तृप्त होती हैं और उनको स्वर्गलोक की प्राप्ति होती है।इसके बाद कही भी श्राद्ध कर्म करने की जरूरत नहीं होती। इस तीर्थ के पास ही अलकनंदा नदी बहती है। कथाओं अनुसार पांडवों ने भी यहां अपने परिजनों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध किया था।
गया, बिहार
फल्गु नदी के तट पर बसा शहर है गया। पितृ पक्ष के दौरान यहां हजारों श्रद्धालु श्राद्ध कर्म के लिए आते है। मान्यता अनुसार यहां पर श्राद्ध कर्म करने से पूर्वजों को बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है। इस तीर्थ का वर्णन रामायण में भी है।
प्रयाग, उत्तरप्रदेश
तीर्थों में सबसे बड़ा तीर्थ प्रयाग है। गंगा, यमुना, सरस्वती नदियों का संगम होने कि वजह से यहां पर श्राद्ध कर्म करना सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। मान्यता है कि किसी भी पुण्यात्मा का श्राद्ध कर्म यहां विधि-विधान से संपन्न हो जाने पर वह जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्त हो जाता है।
मेघंकर, महाराष्ट्र
महाराष्ट्र से लगभग 75 किमी की दूरी पर स्थित मेघंकर तीर्थ का वर्णन ब्रह्मपुराण, पद्मपुराण आदि धर्म ग्रंथों में है। यहां स्नान का बड़ा ही महत्त्व है। यह स्थान पैनगंगा नदी के तट पर है। कहते हैं यहां पापियों को भी मुक्ति मिल जाती है। पितृ पक्ष के दौरान यहां काफी भारी मात्रा में लोगो की भीड़ देखने को मिलती है।