Shivling Abhishek Vidhi: हिंदू पंचांग में कुछ दिन ऐसे माने गए हैं, जब की गई छोटी सी साधना भी जीवन में बड़े बदलाव ला सकती है, प्रदोष व्रत उन्हीं में से एक है। यह दिन भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है, क्योंकि मान्यता है कि इस समय शिव और शक्ति का विशेष आशीर्वाद भक्तों पर बरसता है। हर महीने त्रयोदशी तिथि पर आने वाला यह व्रत न केवल मानसिक शांति देता है, बल्कि जीवन में चल रही परेशानियों, आर्थिक तंगी और रोगों को दूर करने में भी सहायक माना जाता है। खासतौर पर प्रदोष काल में शिवलिंग का अभिषेक करने से इच्छाएं पूरी होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
Pradosh Vrat: प्रदोष व्रत पर इस विधि से करें शिवलिंग का अभिषेक, हर मनोकामना होगी पूर्ण
Pradosh Vrat Shivling Abhishek Vidhi: माना जाता है कि प्रदोष काल में शिवलिंग का अभिषेक करने से इच्छाएं पूरी होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। आइए जानते हैं कि शिवलिंग के अभिषेक की सही विधि क्या है।
प्रदोष व्रत 2026 तिथि और शुभ समय
हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 15 अप्रैल को रात 12:12 बजे प्रारंभ होगी और उसी दिन रात 10:31 बजे समाप्त होगी। ऐसे में प्रदोष व्रत 15 अप्रैल को रखा जाएगा।
इस दिन प्रदोष काल शाम 6:47 बजे से रात 9:00 बजे तक रहेगा, जो पूजा-अर्चना के लिए सबसे शुभ समय माना जाता है।
शिवलिंग अभिषेक की विधि
इस दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। शाम के समय आप मंदिर जाकर या घर पर ही शिवलिंग की स्थापना कर विधिवत पूजा कर सकते हैं।
इन गलतियों से करें परहेज
केतकी का फूल: मान्यता है कि भगवान शिव ने इस फूल को श्राप दिया था, इसलिए इसे अर्पित नहीं करना चाहिए।
टूटे हुए चावल: पूजा में हमेशा साबुत अक्षत ही चढ़ाएं, क्योंकि टूटे चावल अपूर्णता का संकेत माने जाते हैं।
मंत्र
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
पूजा के दौरान इन मंत्रों का जाप करना अत्यंत फलदायी माना गया है,
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
