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Pradosh Vrat Katha: बुध प्रदोष व्रत आज, शुभ मुहूर्त में करें इस कथा और आरती का पाठ

धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Jyoti Mehra Updated Wed, 15 Apr 2026 07:41 AM IST
सार

Budh Pradosh Vrat Katha:15 अप्रैल को बुध प्रदोष व्रत रखा जाएगा। माना जाता है संध्या काल में पूजा करने के बाद व्रत कथा का पाठ करना या सुनना अत्यंत आवश्यक माना गया है, तभी यह व्रत पूर्ण फलदायी होता है।

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Budh Pradosh Vrat Katha in Hindi Shiv Ji Ki Aarti Om Jai Shiv Omkara
बुध प्रदोष व्रत कथा - फोटो : Amar Ujala

Budh Pradosh Vrat Katha: हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। वर्तमान में वैशाख मास चल रहा है, और इस महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी बुधवार के दिन पड़ रही है। इस दिन का व्रत ‘बुध प्रदोष व्रत’ कहलाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा की जाती है। संध्या काल में पूजा करने के बाद व्रत कथा का पाठ करना या सुनना अत्यंत आवश्यक माना गया है, तभी यह व्रत पूर्ण फलदायी होता है।



द्रिक पंचांग के अनुसार, वैशाख कृष्ण त्रयोदशी तिथि 15 अप्रैल को रात 12:12 बजे प्रारंभ होकर उसी दिन रात 10:31 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि और प्रदोष काल को ध्यान में रखते हुए व्रत 15 अप्रैल को ही रखा जाएगा। इस दिन पूजा का शुभ समय शाम 6:47 बजे से रात 9:00 बजे तक रहेगा।

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बुध प्रदोष व्रत कथा - फोटो : adobe stock

बुध प्रदोष व्रत कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार एक व्यक्ति का विवाह हाल ही में हुआ था। शादी के दो दिन बाद उसकी पत्नी अपने मायके चली गई। कुछ समय बाद वह उसे वापस लाने पहुंचा। जब वह बुधवार के दिन पत्नी को लेकर लौटने लगा, तो ससुराल वालों ने उसे समझाया कि बुधवार को विदाई करना शुभ नहीं माना जाता। लेकिन उसने उनकी बात अनदेखी कर दी और पत्नी को साथ लेकर चल पड़ा।

रास्ते में नगर के बाहर उसकी पत्नी को प्यास लगी। वह पानी लेने चला गया और पत्नी को एक पेड़ के नीचे बैठा दिया। जब वह पानी लेकर लौटा, तो उसने देखा कि उसकी पत्नी किसी अन्य पुरुष के साथ हंसकर बातें कर रही है और उसी के लोटे से पानी पी रही है। यह देखकर वह क्रोधित हो गया।
 

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Budh Pradosh Vrat Katha in Hindi Shiv Ji Ki Aarti Om Jai Shiv Omkara
बुध प्रदोष व्रत कथा - फोटो : adobe stock

जब वह पास पहुंचा, तो वह चौंक गया क्योंकि उस व्यक्ति का चेहरा बिल्कुल उसी जैसा था। पत्नी भी असमंजस में पड़ गई। दोनों के बीच विवाद होने लगा और आसपास लोग इकट्ठा हो गए। सिपाही भी वहां पहुंच गए और असली पति की पहचान करने को कहा। पत्नी भ्रमित हो गई और कुछ समझ नहीं पाई।

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Budh Pradosh Vrat Katha in Hindi Shiv Ji Ki Aarti Om Jai Shiv Omkara
बुध प्रदोष व्रत कथा - फोटो : adobe stock

तब उस व्यक्ति ने भगवान शिव से प्रार्थना की और अपनी गलती स्वीकार करते हुए क्षमा मांगी कि उसने बड़ों की सलाह को नजरअंदाज किया। उसकी सच्ची प्रार्थना के बाद वह हमशक्ल व्यक्ति अचानक गायब हो गया। इसके बाद पति-पत्नी सुरक्षित अपने घर लौट आए। इस घटना के बाद दोनों ने नियमपूर्वक बुध प्रदोष व्रत करना शुरू कर दिया। मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा से करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

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शिवजी की आरती 'ॐ जय शिव ओंकारा'  - फोटो : adobe stock

शिवजी की आरती 'ॐ जय शिव ओंकारा' 

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥

ओम जय शिव ओंकारा॥एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे।
हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥

दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखत त्रिभुवन जन मोहे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥

अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥
ओम जय शिव ओंकारा॥

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघंबर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥

कर के मध्य कमण्डल चक्र त्रिशूलधारी।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥
ओम जय शिव ओंकारा॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका॥
ओम जय शिव ओंकारा॥

पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा।
भांग धतूरे का भोजन, भस्मी में वासा॥
ओम जय शिव ओंकारा॥

जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला।
शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला॥
ओम जय शिव ओंकारा॥

काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी॥
ओम जय शिव ओंकारा॥

त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, मनवान्छित फल पावे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥ स्वामी ओम जय शिव ओंकारा॥


 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

 

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