हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह दोनों पक्षों कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश जी के पूजन का विधान है। कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी और शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली चतुर्थी तिथि को विनायक चतुर्थी कहा जाता है। इस बार मार्गशीर्ष मास में कृष्ण पक्ष की संकष्टी चतुर्थी 23 नवंबर 2021 दिन मंगलवार को पड़ रही है। बुद्धि और शुभता के देव गणेश जी को प्रसन्न करने और उनकी कृपा प्राप्त करने हेतु यह तिथि बहुत महत्व रखती है। तो चलिए जानते हैं संकष्टी चतुर्थी का शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजन विधि।
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Sankashti Chaturthi 2021: गणेश जी की कृपा पाने के लिए ये दिन है बेहद खास, जानिए शुभ मुहूर्त, महत्व व पूजन विधि
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: शशि सिंह
Updated Fri, 12 Nov 2021 09:25 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
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संकष्टी चतुर्थी व्रत का महत्व-
भगवान गणेश अपने भक्तों के सभी विघ्नों को हर लेते हैं।इसलिए उन्हें विघ्नहर्ता या विघ्न विनाशक के नाम से जाना जाता है। भगवान गणेश प्रथम पूज्य हैं। इनकी पूजा से सभी विघ्न बाधाएं दूर हो जाती हैं। इनके पूजन के लिए चतुर्थी तिथि का विशेष महत्व माना गया है। इनके पूजन से जीवन में सकारात्मकता आती है व गणपति महाराज अपने भक्तों की विपदाओं को दूर करके सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
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संकष्टी चतुर्थी शुभ मुहूर्त
संकष्टी चतुर्थी शुभ मुहूर्त-
मार्गशीर्ष मास कृष्ण पक्ष चतुर्थी आरंभ- 22 नवंबर 2021 दिन सोमवार रात 10 बजकर 26 मिनट से
मार्गशीर्ष मास कृष्ण पक्ष चतुर्थी समापन- 24 नवंबर 2021 मध्य रात्रि 12 बजकर 55 मिनट पर
चंद्रोदय का समय- 20:27:02
संकष्टी चतुर्थी पूजन विधि
संकष्टी चतुर्थी पूजन विधि-
- चतुर्थी तिथि प्रातः जल्दी उठकर स्नानादि करने के पश्चात पीले या लाल रंग के वस्त्र धारण करें।
- मंदिर की साफ-सफाई करें और गणेश जी के समक्ष दीपक प्रज्वलित करें।
- अब सिंदूर से गणेश जी का तिलक करें और फल-फूल आदि अर्पित करते हुए विधिवत् पूजन करें।
- गणेश जी को दूर्वा की 21 गांठें अर्पित करें व लड्डू या मोदक का भोग लगाएं।
- पूजन पूर्ण होने के बाद क्षमायाचना करें और गणेश जी की आरती करें।
- इस दिन चंद्र दर्शन और अर्घ्य का भी विधान है।