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Shani Jayanti 2026: शनि जयंती पर बन रहे 8 दुर्लभ संयोग, क्यों खास है यह पावन तिथि?

धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Shweta Singh Updated Wed, 13 May 2026 04:12 PM IST
सार

16 मई 2026 को शनि जयंती, वट सावित्री व्रत, शनिश्चरी अमावस्या और कई दुर्लभ शुभ योग बन रहे हैं। जानें इस दिन का धार्मिक, ज्योतिषीय और आध्यात्मिक महत्व।

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Shani Jayanti 2026 8 Auspicious Coincidences on 16 May Know Its Significance
शनि जयंती 2026 - फोटो : Amar Ujala

Shani Jayanti: 16 मई 2026 का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दिन शनि जयंती, वट सावित्री व्रत, शनिश्चरी अमावस्या और शनिवार जैसे कई शुभ संयोग एक साथ बन रहे हैं, जो इसे और खास बना रहे हैं। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार ऐसे दुर्लभ योग आध्यात्मिक साधना, दान-पुण्य और विशेष रूप से शनि उपासना के लिए अत्यंत फलदायी होते हैं। खासकर शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या महादशा से प्रभावित लोगों के लिए यह दिन पूजा-पाठ और उपायों के जरिए शनि कृपा पाने का सुनहरा अवसर माना जा रहा है।


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Shani Jayanti 2026 8 Auspicious Coincidences on 16 May Know Its Significance
shani jayanti - फोटो : adobe stock

शनि जयंती 2026
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ज्येष्ठ अमावस्या के दिन भगवान सूर्य और माता छाया के पुत्र भगवान शनिदेव का अवतरण हुआ था, इसलिए हर वर्ष इस तिथि पर शनि जयंती मनाई जाती है। इस बार खास बात यह है कि यह पावन पर्व शनिवार के दिन पड़ रहा है, जिससे इसका धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ गया है। शनिवार का दिन स्वयं शनिदेव की पूजा के लिए समर्पित माना जाता है, ऐसे में शनि जयंती और शनिश्चरी अमावस्या का एक साथ आना भक्तों के लिए बेहद शुभ और दुर्लभ संयोग माना जा रहा है।

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shanishchari amavasya - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

शनिश्चरी अमावस्या 2026
16 मई 2026 को शनि जयंती के साथ अमावस्या तिथि का भी संयोग बन रहा है। चूंकि यह अमावस्या शनिवार के दिन पड़ रही है, इसलिए इसे शनिश्चरी अमावस्या कहा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अमावस्या का दिन पितरों के तर्पण और स्मरण के लिए विशेष माना जाता है। वहीं शनिदेव कर्मों के अनुसार फल देने वाले देवता हैं, इसलिए इस दिन किए गए दान, पूजा और सत्कर्म कई गुना फलदायी माने जाते हैं। शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या शनि दोष से प्रभावित लोगों के लिए यह दिन विशेष उपायों के लिए बेहद शुभ रहेगा।

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वट सावित्री व्रत - फोटो : amar ujala

वट सावित्री व्रत 2026
ज्येष्ठ अमावस्या के दिन मनाया जाने वाला वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं और बरगद के वृक्ष की पूजा करती हैं। 16 मई को इस व्रत का शुभ मुहूर्त सुबह 7:12 बजे से 8:54 बजे तक रहेगा। यह व्रत सत्यवान और सावित्री की अमर कथा से जुड़ा है, जो प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है।

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मिथुन राशि में शुक्र-गुरु की युति - फोटो : adobe stock

मिथुन राशि में शुक्र-गुरु की युति
16 मई को ग्रहों की चाल भी विशेष संयोग बना रही है। इस दिन मिथुन राशि में शुक्र और गुरु की युति होगी, जिसे ज्योतिष में अत्यंत शुभ माना जाता है। गुरु जहां ज्ञान और सौभाग्य के कारक हैं, वहीं शुक्र सुख, वैभव और समृद्धि के प्रतीक हैं। इन दोनों ग्रहों का मिलन कई राशियों के लिए आर्थिक, वैवाहिक और पारिवारिक जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।

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