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Chanakya Niti : इन हालातों में अन्न, वर्षा का जल और दीये की रौशनी भी हो जाती है बेकार

ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आशिकी पटेल Updated Fri, 17 Jun 2022 12:04 PM IST
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Chanakya Niti in Hindi Motivation Thought for successful life in hindi
इन हालातों में अन्न, वर्षा का जल और दीये की रौशनी भी हो जाती है बेकार - फोटो : amarujala

Chanakya Niti Quotes In Hindi: आचार्य चाणक्य एक कुशल राजनीतिज्ञ के अलावा भारत के महान विद्वानों में से एक थे। उन्होंने एक नीति शास्त्र की रचना की है, जिसमे उन्होंने मनुष्य के जीवन से जुड़ी कई बातों का जिक्र किया है। यदि इन बातों को ध्यान में रखा जाए तो व्यक्ति समस्याओं से बच सकता है। साथ ही एक संतुष्ट और सफल जीवन भी व्यतीत कर सकता है। भोजन, पानी, वर्षा, उजाला ये सब मनुष्य के जीवन की जरूरी चीजें हैं, लेकिन आचार्य चाणक्य ने इनकी अति के बारे में भी जिक्र किया है। चाणक्य नीति के अनुसार, कुछ परिस्थितियों में इन चीजों की अधिकता सही नहीं होती। ऐसी जगहों पर इनका होना व्यर्थ माना जाता है। आइए चाणक्य नीति के अनुसार जानते हैं कि ऐसी कौन सी चीजें और परिस्थितियां हैं, जिन्हे व्यर्थ माना गया है...    

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Chanakya Niti in Hindi Motivation Thought for successful life in hindi
इन हालातों में अन्न, वर्षा का जल और दीये की रौशनी भी हो जाती है बेकार - फोटो : iStock

अमीर आदमी को दान देना व्यर्थ है
आचार्य चाणक्य के अनुसार, जो व्यक्ति पहले से संपन्न है, उसे और अधिक दान देने से हमें कोई पुण्य फल नहीं मिलेगा और न ही उस व्यक्ति को उस दान से कोई फर्क पड़ेगा। इसलिए आचार्य चाणक्य ने कहा है कि धनिक को दान करना व्यर्थ है।

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इन हालातों में अन्न, वर्षा का जल और दीये की रौशनी भी हो जाती है बेकार - फोटो : iStock

दिन में दीपक जलाना व्यर्थ है
रौशनी की जरूरत अंधेरे में होती है। अंधकार को दूर करने के लिए दीपक जलाया जाता है। ऐसे में आचार्य चाणक्य ने कहा है कि दिन में सूर्य की पर्याप्त रोशनी होते हुए भी अगर कोई दीपक जलाता है तो इसे मूर्खता ही समझा जाएगा। दिन में दीपक जलाना व्यर्थ है।

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इन हालातों में अन्न, वर्षा का जल और दीये की रौशनी भी हो जाती है बेकार - फोटो : istock

तृप्त व्यक्ति को भोजन कराना व्यर्थ है
यदि किसी व्यक्ति ने भरपेट भोजन किया हुआ है तो, उसे भोजन करना या भोजन करने का आग्रह करना व्यर्थ है। चाणक्य नीति के अनुसार, जिस व्यक्ति का पेट भरा है, उसके लिए छप्पन भोग भी किसी काम के नहीं। इसलिए आचार्य चाणक्य ने कहा है कि तृप्त व्यक्ति को भोजन कराना बेकार है।

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इन हालातों में अन्न, वर्षा का जल और दीये की रौशनी भी हो जाती है बेकार - फोटो : iStock

समुद्र में वर्षा होना व्यर्थ है
चाणक्य नीति के अनुसार, समुद्र अथाह पानी का भंडार है। वहां चाहे जितनी भी बारिश हो जाए, समुद्र को कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि उससे किसी का भला नहीं होगा। ऐसे में समुद्र में बारिश होना व्यर्थ है। 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये खबर लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस खबर में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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