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Chanakya Niti: कभी भी किसी चीज की तुलना दूसरों से न करें, अन्यथा जीवन भर रहेंगे दुखी

धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Mon, 06 Jun 2022 11:42 AM IST
Chanakya Niti: चार्य चाणक्य ने अपनी नीतियों से हमेशा समाज का मार्गदर्शन किया है।
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Chanakya Niti:  आचार्य चाणक्य एक श्रेष्ठ विद्वान होने के साथ एक अच्छे शिक्षक भी माने जाते हैं। आचार्य चाणक्य विश्वप्रसिद्ध तक्षशिला विश्वविद्यालय से शिक्षा ग्रहण की और वहीं पर आचार्य के पद पर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन भी किया था। वे न सिर्फ एक कुशल कूटनीतिज्ञ बल्कि एक महान रणनीतिकार और अर्थशास्त्री भी थे। आचार्य चाणक्य ने अपने जीवन में विषम से विषम परिस्थितियों का सामना किया था परंतु कभी हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य को प्राप्त किया। आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति में पैसे, सेहत, बिजनेस, दांपत्य जीवन, समाज, जीवन में सफलता से जुड़े तमाम चीजों पर अपनी राय दी है। अगर कोई व्यक्ति की आचार्य चाणक्य की बातों का अनुसरण अपने जीवन में करता है, तो वह जीवन में कभी गलती नहीं करेगा और सफल मुकाम पर पहुंच सकता है। आचार्य चाणक्य ने अपनी नीतियों से हमेशा समाज का मार्गदर्शन किया है।  आचार्य चाणक्य के अनुसार मनुष्य को कभी भी किसी के जीवन की तुलना स्वयं नहीं करनी चाहिए। आइए जानते हैं क्या हैं आचार्य चाणक्य के विचार।  
Chanakya Niti:
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आचार्य चाणक्य के विचार 
आप अपनी जिंदगी की तुलना अन्य लोगों के साथ मत करो सूर्य और चंद्रमा दोनों ही चमकते हैं लेकिन अपने अपने समय पर।'
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दूसरों से जीवन की तुलना न करें 
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दूसरों से जीवन की तुलना न करें 
मनुष्य के अंदर दूसरों से होड़ करने की आदत होती है ऊसर इसी कारणवश वह दूसरे व्यक्ति से अपनी या किसी अन्य व्यक्ति की तुलना करता है। आचार्य चाणक्य के इस कथन के अनुसार, किसी भी मनुष्य को अपने जीवन की तुलना दूसरों से नहीं करनी चाहिए। मनुष्य अपने जीवन की तुलना दूसरे से करने लगते हैं। अक्सर ये तुलना करियर, कपड़ों, मकान और कई बार पैसे को लेकर भी होती है। ऐसा करने से आप दूसरे व्यक्ति के भीतर हीनभावना भर सकते हैं। यदि आपके अंदर भी यह आदत है तो इस आदत को तुरंत बदल दें।
ईर्ष्या भाव न पनपने दें 
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ईर्ष्या भाव न पनपने दें 
आचार्य चाणक्य के अनुसार मनुष्य कई प्रकार के लोगों से मिलता है। सबका रहन सहन एक दूसरे से भिन्न हो सकता है। संभव हो कि जो चीजें सामने वाले व्यक्ति के पास है वो आपके पास न हो, या जैसी जीवनशैली वो जी रहा है वैसी आप छह कर भी न जी पा रहे हैं। लेकिन कभी भी दूसरों से अपनी तुलना न करें। ये आपके लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। यह आपके मन में ईर्ष्या के भाव उत्पन्न करेगा। 
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सब्र की जरूरत 
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सब्र की जरूरत 
आचार्य चाणक्य के अनुसार जिस तरह आसमान में चंद्रमा और सूरज के चमकने का समय अलग होता है उसी तरह मनुष्य के जीवन में भी उसे जो भी मिलेगा अपने समय के अनुसार मिलेगा और वही मिलेगा जिसके वो योग्य है। इसलिए मनुष्य को सब्र रखना चाहिए न कि अन्य व्यक्तियों से तुलना करना चाहिए। 
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