एक तरफ सुरक्षित नौकरी थी, दूसरी तरफ रफ्तार से भरी अनिश्चित दुनिया। एक तरफ क्लासरूम में बच्चों को पढ़ाने का सपना था, तो दूसरी तरफ रेसिंग ट्रैक पर खुद को साबित करने की चुनौती। ज्यादातर लोग शायद सुरक्षित रास्ता चुनते, लेकिन डायना पुंडोले ने वह रास्ता चुना, जिस पर न मंजिल तय थी और न ही सफलता की गारंटी। आज वही डायना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फेरारी चलाने वाली पहली भारतीय महिला बन चुकी हैं, लेकिन इस उपलब्धि तक पहुंचने का सफर जितना चमकदार दिखता है, उतना आसान कभी नहीं था। आइए उनकी कहानी जानते हैं...
समाज ने रोका, किस्मत ने परखा: फिर पुणे की डायना कैसे बनीं भारत की पहली महिला फेरारी रेसर? भावुक कर देगी कहानी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, पुणे
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Wed, 01 Jul 2026 09:03 AM IST
सार
शिक्षिका बनने की तैयारी कर रही एक भारतीय महिला ने जिंदगी का सबसे बड़ा जोखिम उठाया और मोटरस्पोर्ट्स की दुनिया में कदम रखा। ताने, हार, दुर्घटनाएं और असफलताएं झेलने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। आज वही महिला अंतरराष्ट्रीय फेरारी रेस में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली पहली भारतीय महिला बन चुकी हैं। यह कहानी सिर्फ रफ्तार की नहीं, बल्कि हिम्मत, विश्वास और सपनों को सच करने की है।
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