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Mosquito Racket: इलेक्ट्रिक मॉस्कीटो रैकेट से खराब हो सकते हैं TV और Smartphone? जानिए क्या है खतरा
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Nitish Kumar
Updated Wed, 13 May 2026 05:48 PM IST
सार
Electric Mosquito Racket Cautions: आप आराम से सोफे पर बैठे हैं, अचानक एक मच्छर आपके 50 इंच के चमचमाते स्मार्ट टीवी पर आकर बैठ जाता है। आप तुरंत रैकेट उठाते हैं और उसे खत्म करने के लिए टीवी के पास ले जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि वह एक छोटा सा स्पार्क आपके लाखों के टीवी को पल भर में कबाड़ बना सकता है? आइए जानते हैं कैसे मच्छर वाला रैकेट इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज को खराब कर सकता है।
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मॉस्कीटो रैकेट गैजेट्स खराब कर सकते हैं?
- फोटो : एआई जनरेटेड
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गर्मियों और मानसून के मौसम में मच्छर एक बड़ी समस्या बन जाते हैं, और उनसे निपटने के लिए 'इलेक्ट्रिक मॉस्कीटो रैकेट' सबसे आसान हथियार लगता है। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि जब मच्छर इस रैकेट के जाल में फंसता है, तो एक तेज 'चट' की आवाज के साथ नीली चिंगारी निकलती है? यह छोटी सी चिंगारी आपके घर में रखे महंगे स्मार्टफोन, लैपटॉप और स्मार्ट टीवी के लिए साइलेंट किलर साबित हो सकती है।
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इलेक्ट्रिक रैकेट
- फोटो : एआई जनरेटेड
हाई-वोल्टेज में काम करता है इलेक्ट्रिक रैकेट
मच्छरों को मारने वाले इलेक्ट्रिक रैकेट से गैजेट्स को क्या खतरा है? यह जानने से पहले काम कैसे करता है, इसे समझना बहुत जरूरी है। इसके अंदर एक सर्किट होता है जो साधारण बैटरी की कम वोल्टेज को बढ़ाकर 2000 से 3000 वोल्ट तक पहुंचा देता है। जब मच्छर इसके संपर्क में आता है, तो सर्किट पूरा होता है और एक हाई-वोल्टेज डिस्चार्ज होता है। यह डिस्चार्ज न केवल मच्छर को खत्म करता है, बल्कि अपने आसपास एक छोटा लेकिन शक्तिशाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पल्स (EMP) और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंटरफेरेंस (EMI) पैदा करता है।
मच्छरों को मारने वाले इलेक्ट्रिक रैकेट से गैजेट्स को क्या खतरा है? यह जानने से पहले काम कैसे करता है, इसे समझना बहुत जरूरी है। इसके अंदर एक सर्किट होता है जो साधारण बैटरी की कम वोल्टेज को बढ़ाकर 2000 से 3000 वोल्ट तक पहुंचा देता है। जब मच्छर इसके संपर्क में आता है, तो सर्किट पूरा होता है और एक हाई-वोल्टेज डिस्चार्ज होता है। यह डिस्चार्ज न केवल मच्छर को खत्म करता है, बल्कि अपने आसपास एक छोटा लेकिन शक्तिशाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पल्स (EMP) और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंटरफेरेंस (EMI) पैदा करता है।
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क्यों खतरे में पड़ जाते हैं स्मार्ट गैजेट्स
- फोटो : AI
क्यों खतरे में पड़ जाते हैं स्मार्ट गैजेट्स?
आज के दौर के डिजिटल डिवाइसेज, जैसे स्मार्टफोन और स्मार्ट टीवी, बेहद सूक्ष्म और संवेदनशील माइक्रोचिप्स पर काम करते हैं। इन चिप्स के अंदर अरबों ट्रांजिस्टर होते हैं जो बहुत ही कम वोल्टेज (अक्सर 1 से 5 वोल्ट) पर काम करते हैं। जब आप किसी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के बिल्कुल करीब रैकेट का इस्तेमाल करते हैं, तो उससे निकलने वाला इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड इन संवेदनशील सर्किट में अनचाहा करंट पैदा करता है। यह इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड इनके खराब होने का कारण बनता है।
आज के दौर के डिजिटल डिवाइसेज, जैसे स्मार्टफोन और स्मार्ट टीवी, बेहद सूक्ष्म और संवेदनशील माइक्रोचिप्स पर काम करते हैं। इन चिप्स के अंदर अरबों ट्रांजिस्टर होते हैं जो बहुत ही कम वोल्टेज (अक्सर 1 से 5 वोल्ट) पर काम करते हैं। जब आप किसी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के बिल्कुल करीब रैकेट का इस्तेमाल करते हैं, तो उससे निकलने वाला इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड इन संवेदनशील सर्किट में अनचाहा करंट पैदा करता है। यह इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड इनके खराब होने का कारण बनता है।
स्मार्ट टीवी और स्मार्टफोन पर क्या होता है असर?
- फोटो : FreePik
स्मार्ट टीवी और स्मार्टफोन पर क्या होता है असर?
एक्सपर्ट्स के अनुसार, इसका असर दो तरह से हो सकता है:
हालांकि, इलेक्ट्रिक रैकेट का इस्तेमाल सामान्य दूरी पर किया जाए तो इलेक्टॉनिक गैजेट्स पर इसका कोई बड़ा खतरा नहीं होता।
एक्सपर्ट्स के अनुसार, इसका असर दो तरह से हो सकता है:
- डिस्प्ले पैनल पर खतरा: स्मार्ट टीवी की स्क्रीन (OLED या LCD) बहुत नाजुक होती है। अगर स्पार्क टीवी की स्क्रीन के बहुत करीब होता है, तो उससे निकलने वाला स्टैटिक डिस्चार्ज स्क्रीन के पिक्सल को डेड कर सकता है या स्क्रीन पर अजीब सी लाइनें पैदा कर सकता है।
- सेंसर और चिप्स का खराब होना: स्मार्टफोन के अंदर कई तरह के सेंसर (जैसे जायरोस्कोप या टच सेंसर) होते हैं। हाई-वोल्टेज स्पार्क के पास होने से फोन अचानक हैंग हो सकता है या उसका टच रिस्पॉन्स हमेशा के लिए खराब हो सकता है।
- सॉफ्टवेयर ग्लिच: कभी-कभी यह पल्स डिवाइस के सॉफ्टवेयर को भी प्रभावित करती है, जिससे फोन या टीवी अचानक रीस्टार्ट हो सकता है या डेटा करप्ट हो सकता है।
हालांकि, इलेक्ट्रिक रैकेट का इस्तेमाल सामान्य दूरी पर किया जाए तो इलेक्टॉनिक गैजेट्स पर इसका कोई बड़ा खतरा नहीं होता।
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बरतें ये सावधानियां
- फोटो : एआई जनरेटेड
बरतें ये सावधानियां
इसका मतलब यह नहीं है कि आप मच्छर रैकेट का इस्तेमाल बंद कर दें, बल्कि आपको कुछ सावधानियां बरतने की जरूरत है:
स्क्रीन पर मच्छर बैठने पर क्या करें?
अगर मच्छर टीवी, लैपटॉप या स्मार्टफोन की स्क्रीन पर बैठा है, तो रैकेट का इस्तेमाल बिल्कुल न करें। उसे फूंक मारकर या किसी कपड़े से उड़ा दें और फिर दूर जाकर मारें।
इसका मतलब यह नहीं है कि आप मच्छर रैकेट का इस्तेमाल बंद कर दें, बल्कि आपको कुछ सावधानियां बरतने की जरूरत है:
- दूरी बनाए रखें: कभी भी स्मार्ट टीवी, कंप्यूटर मॉनिटर या स्मार्टफोन के 1-2 फीट के दायरे में मच्छर न मारें।
- चार्जिंग के दौरान सावधानी: जब आपका फोन चार्ज हो रहा हो, तब उसके पास रैकेट न चलाएं, क्योंकि चार्जिंग के समय सर्किट पहले से ही संवेदनशील होता है।
स्क्रीन पर मच्छर बैठने पर क्या करें?
अगर मच्छर टीवी, लैपटॉप या स्मार्टफोन की स्क्रीन पर बैठा है, तो रैकेट का इस्तेमाल बिल्कुल न करें। उसे फूंक मारकर या किसी कपड़े से उड़ा दें और फिर दूर जाकर मारें।