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Dangers of AI: आ रहा है AI का खतरनाक दौर! इन 7 खौफनाक तकनीक से कांप जाएगी इंसानियत
Thu, 29 May 2025 06:01 AM IST
नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Thu, 29 May 2025 06:01 AM IST
सार
Dangers of Artificial Intelligence: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जहां जीवन को आसान बना रही है, वहीं कुछ खतरनाक तकनीकें ऐसी भी हैं जो अगर नियंत्रण से बाहर हो जाएं, तो मानव सभ्यता के लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं। जानिए AI से जुड़ी ऐसी 7 डरावनी तकनीकों के बारे में।
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इंसानियत का सफाया कर सकती हैं ये तकनीकें
- फोटो : AI
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कल्पना कीजिए एक ऐसी दुनिया की, जहां मशीनें सोचने लगती हैं, युद्ध अपने आप लड़े जाते हैं, इंसानों के दिमाग को कंप्यूटर से जोड़ा जाता है और मौसम को कृत्रिम रूप से बदला जाता है। यह कोई साइंस फिक्शन फिल्म नहीं, बल्कि हमारी तेजी से बदलती हकीकत है। तकनीक ने जहां इंसानी जिंदगी को पहले से कहीं ज्यादा आरामदायक और प्रभावशाली बनाया है, वहीं कुछ ऐसी खोजें और आविष्कार भी सामने आ चुके हैं, जो अगर बेकाबू हो जाएं, तो पूरी मानवता के अस्तित्व को ही चुनौती दे सकते हैं। ये तकनीकें इंसान के हाथों में तलवार की तरह हैं। अगर समझदारी से चलाई जाएं, तो सुरक्षा दे सकती हैं, लेकिन जरा सी चूक उन्हें विनाश का कारण बना सकती है।
ऑटोनोमस AI हथियार
- फोटो : https://drdo.gov.in/
ऑटोनोमस AI हथियार (Autonomous AI Weapons)
ये ऐसे हथियार हैं जो इंसानी आदेश के बिना खुद से फैसले ले सकते हैं। उदाहरण के तौर पर रूस का Uran-9 या अमेरिका का Loyal Wingman ड्रोन सिस्टम। अगर इन हथियारों को युद्ध में पूरी तरह से स्वायत्तता मिल जाती है, तो ये बिना मानवीय विवेक के हमला कर सकते हैं। इससे निर्दोष लोगों की मौत, तकनीकी गड़बड़ी या हैकिंग के जरिए बड़े पैमाने पर तबाही हो सकती है।
ये ऐसे हथियार हैं जो इंसानी आदेश के बिना खुद से फैसले ले सकते हैं। उदाहरण के तौर पर रूस का Uran-9 या अमेरिका का Loyal Wingman ड्रोन सिस्टम। अगर इन हथियारों को युद्ध में पूरी तरह से स्वायत्तता मिल जाती है, तो ये बिना मानवीय विवेक के हमला कर सकते हैं। इससे निर्दोष लोगों की मौत, तकनीकी गड़बड़ी या हैकिंग के जरिए बड़े पैमाने पर तबाही हो सकती है।
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : ANI
जीन एडिटिंग टेक्नोलॉजी (Gene Editing Technology)
CRISPR-Cas9 तकनीक की मदद से वैज्ञानिक अब इंसानी DNA को बदल सकते हैं। इससे बीमारियों का इलाज भी संभव हुआ है, लेकिन यह तकनीक "डिज़ाइनर बेबी" बनाने के लिए भी इस्तेमाल की जा सकती है। अगर अनैतिक तरीके से इसका उपयोग हुआ तो सामाजिक असमानता बढ़ेगी। साथ ही इससे जैविक हथियार भी तैयार किए जा सकते हैं, जो महामारी की तरह फैल सकते हैं।
CRISPR-Cas9 तकनीक की मदद से वैज्ञानिक अब इंसानी DNA को बदल सकते हैं। इससे बीमारियों का इलाज भी संभव हुआ है, लेकिन यह तकनीक "डिज़ाइनर बेबी" बनाने के लिए भी इस्तेमाल की जा सकती है। अगर अनैतिक तरीके से इसका उपयोग हुआ तो सामाजिक असमानता बढ़ेगी। साथ ही इससे जैविक हथियार भी तैयार किए जा सकते हैं, जो महामारी की तरह फैल सकते हैं।
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फोटो से बन सकता है डीपफेक
- फोटो : अमर उजाला
क्लोनिंग और डीपफेक (Deepfake)
AI आधारित डीपफेक टेक्नोलॉजी से किसी भी व्यक्ति का नकली वीडियो बनाना अब आसान हो गया है। इसमें चेहरे और आवाज की हूबहू नकल की जाती है। चुनाव के समय किसी नेता का नकली वीडियो वायरल कर के जनता को भ्रमित किया जा सकता है। इससे दंगे, अफवाहें और गलतफहमियां फैल सकती हैं, जो देश की आंतरिक सुरक्षा को खतरे में डाल सकती हैं।
AI आधारित डीपफेक टेक्नोलॉजी से किसी भी व्यक्ति का नकली वीडियो बनाना अब आसान हो गया है। इसमें चेहरे और आवाज की हूबहू नकल की जाती है। चुनाव के समय किसी नेता का नकली वीडियो वायरल कर के जनता को भ्रमित किया जा सकता है। इससे दंगे, अफवाहें और गलतफहमियां फैल सकती हैं, जो देश की आंतरिक सुरक्षा को खतरे में डाल सकती हैं।
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बारिश (फाइल)
- फोटो : ANI
जियो इंजीनियरिंग (Geoengineering)
सौर विकिरण प्रबंधन (Solar Radiation Management) जैसी तकनीकें ग्लोबल वॉर्मिंग को रोकने के लिए बनाई जा रही हैं, जिसमें वातावरण में सल्फर पार्टिकल्स छोड़े जाते हैं ताकि सूरज की रोशनी कम हो। लेकिन इससे बारिश के चक्र, खेती और पर्यावरण में भारी असंतुलन हो सकता है। इसका असर एक देश में नहीं, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ेगा।
सौर विकिरण प्रबंधन (Solar Radiation Management) जैसी तकनीकें ग्लोबल वॉर्मिंग को रोकने के लिए बनाई जा रही हैं, जिसमें वातावरण में सल्फर पार्टिकल्स छोड़े जाते हैं ताकि सूरज की रोशनी कम हो। लेकिन इससे बारिश के चक्र, खेती और पर्यावरण में भारी असंतुलन हो सकता है। इसका असर एक देश में नहीं, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ेगा।