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ट्रिप बुकिंग से नेगोशिएट तक: क्या है मेटा का एआई एजेंट Muse और कितना है सुरक्षित? समझें इसके काम करने का तरीका
Thu, 01 Oct 2026 02:08 PM IST
जागृति शुक्ला
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: जागृति शुक्ला
Updated Thu, 01 Oct 2026 02:08 PM IST
सार
मेटा ने 'Muse' नाम से एक नया और पर्सनल एआई एजेंट पेश किया है। यह साधारण चैटबॉट्स की तरह सिर्फ सवालों के जवाब देने तक सीमित नहीं है, बल्कि आपके लिए ब्राउजर खोलकर खुद बुकिंग करने, फॉर्म भरने, बिल कम करवाने और कार्ड से पेमेंट करने जैसे जटिल काम चुटकियों में पूरा कर सकता है, लेकिन सवाल यह है कि आखिर यह एआई एजेंट बुकिंग, शॉपिंग और पेमेंट जैसे संवेदनशील कामों को बैकएंड में कैसे संभालता है? और ऑनलाइन सुरक्षा के मामले में यह कितना भरोसेमंद है? आइए जानते हैं मेटा म्यूज (Meta Muse) से जुड़ी हर एक बात विस्तार से...
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मेटा म्यूज
- फोटो : amarujala.com
क्या आप भी घर के सामान की लिस्ट बनाने, बिल कम करवाने या होटल और फ्लाइट बुक करने जैसे ऑनलाइन काम निपटाने में कतराते या परेशान होते हैं? तो तैयार हो जाइए, मेटा एक ऐसा 'पर्सनल एआई सुपरस्मार्ट एजेंट' लेकर आया है, जो ये सारे काम आपके लिए खुद कर सकता है। मेटा म्यूज नाम का यह एआई एजेंट केवल सलाह या जानकारी देने वाला चैटबॉट नहीं है, बल्कि आपके कहने पर खुद ऐप और वेब ब्राउजर खोलकर पेमेंट तक कर सकता है।
मेटा म्यूज
- फोटो : muse.ai
मेटा म्यूज क्या है?
मेटा ने हाल ही में म्यूज नाम का एक नया पर्सनल एआई एजेंट लॉन्च किया है। यह सिर्फ सवालों के जवाब देने वाला चैटबॉट नहीं है, बल्कि यूजर की ओर से कई चरणों वाले काम पूरे कर सकता है। इसे कोई लक्ष्य बताने पर यह ब्राउजर खोल सकता है, फॉर्म भर सकता है, आपकी ओर से बातचीत यानी नेगोशिएशन कर सकता है और जरूरत पड़ने पर आपके कार्ड से पेमेंट भी कर सकता है। हालांकि संवेदनशील कामों के मामले में यह आगे बढ़ने से पहले यूजर की मंजूरी लेता है।
मेटा ने म्यूज को 18 साल और उससे ज्यादा उम्र के लोगों के लिए पेश किया है। इसका मकसद शेड्यूलिंग, शॉपिंग और रोजमर्रा के ऐसे कामों में मदद करना है, जिनमें यूजर का काफी समय और ध्यान लगता है।
खास बात यह है कि अगर एक बार यूजर अपना लक्ष्य बता देता है तो म्यूज उसके लिए प्लान बनाने, समय और संसाधनों को व्यवस्थित करने और काम को आगे बढ़ाने में मदद करता है। यानी यह सिर्फ एक प्रॉम्प्ट का जवाब देकर रुकने के बजाय लंबे समय तक चलने वाले लक्ष्य पर काम कर सकता है।
एप बंद करने के बाद भी करता रहेगा काम
मेटा का कहना है कि यह म्यूज सामान्य चैटबॉट से काफी अलग है। कंपनी के मुताबिक, यह एप बंद होने के बाद भी काम जारी रख सकता है और बिना मांगे सुझाव भी दे सकता है।
यह अलग-अलग सेशन्स के बीच यूजर की प्राथमिकताओं को याद रख सकता है। जैसे मान लीजिए, अगर आपने कोई रेसिपी रील सेव की है, तो यह एआई एजेंट उसे देखकर आपके लिए शॉपिंग लिस्ट तैयार कर सकता है।
यानी इसका काम सिर्फ बातचीत तक सीमित नहीं है। यह लंबे समय तक किसी लक्ष्य को ट्रैक कर सकता है और जरूरत के मुताबिक दोबारा उस पर काम कर सकता है।
मेटा के म्यूज को अमेरिका में आईओएस, एंड्रॉयड और वेब पर रोलआउट किया जा रहा है। कंपनी के एआई ग्लासेस के लिए इसका सपोर्ट बाद में आएगा। यूजर म्यूज एप के अलावा सीधे व्हाट्सएप के अंदर भी इससे बातचीत कर सकते हैं।
मेटा ने हाल ही में म्यूज नाम का एक नया पर्सनल एआई एजेंट लॉन्च किया है। यह सिर्फ सवालों के जवाब देने वाला चैटबॉट नहीं है, बल्कि यूजर की ओर से कई चरणों वाले काम पूरे कर सकता है। इसे कोई लक्ष्य बताने पर यह ब्राउजर खोल सकता है, फॉर्म भर सकता है, आपकी ओर से बातचीत यानी नेगोशिएशन कर सकता है और जरूरत पड़ने पर आपके कार्ड से पेमेंट भी कर सकता है। हालांकि संवेदनशील कामों के मामले में यह आगे बढ़ने से पहले यूजर की मंजूरी लेता है।
मेटा ने म्यूज को 18 साल और उससे ज्यादा उम्र के लोगों के लिए पेश किया है। इसका मकसद शेड्यूलिंग, शॉपिंग और रोजमर्रा के ऐसे कामों में मदद करना है, जिनमें यूजर का काफी समय और ध्यान लगता है।
खास बात यह है कि अगर एक बार यूजर अपना लक्ष्य बता देता है तो म्यूज उसके लिए प्लान बनाने, समय और संसाधनों को व्यवस्थित करने और काम को आगे बढ़ाने में मदद करता है। यानी यह सिर्फ एक प्रॉम्प्ट का जवाब देकर रुकने के बजाय लंबे समय तक चलने वाले लक्ष्य पर काम कर सकता है।
एप बंद करने के बाद भी करता रहेगा काम
मेटा का कहना है कि यह म्यूज सामान्य चैटबॉट से काफी अलग है। कंपनी के मुताबिक, यह एप बंद होने के बाद भी काम जारी रख सकता है और बिना मांगे सुझाव भी दे सकता है।
यह अलग-अलग सेशन्स के बीच यूजर की प्राथमिकताओं को याद रख सकता है। जैसे मान लीजिए, अगर आपने कोई रेसिपी रील सेव की है, तो यह एआई एजेंट उसे देखकर आपके लिए शॉपिंग लिस्ट तैयार कर सकता है।
यानी इसका काम सिर्फ बातचीत तक सीमित नहीं है। यह लंबे समय तक किसी लक्ष्य को ट्रैक कर सकता है और जरूरत के मुताबिक दोबारा उस पर काम कर सकता है।
मेटा के म्यूज को अमेरिका में आईओएस, एंड्रॉयड और वेब पर रोलआउट किया जा रहा है। कंपनी के एआई ग्लासेस के लिए इसका सपोर्ट बाद में आएगा। यूजर म्यूज एप के अलावा सीधे व्हाट्सएप के अंदर भी इससे बातचीत कर सकते हैं।
मेटा म्यूज
- फोटो : muse.ai
मेटा म्यूज क्या-क्या कर सकता है?
म्यूज के मुख्य इस्तेमाल उन कामों में हो सकते हैं, जिनमें बार-बार यूजर का समय और ध्यान लगता है।
कितनी है मेटा म्यूज की कीमत?
म्यूज के लिए एक फ्री टियर के साथ दो पेड सब्सक्रिप्शन प्लान भी हैं। इनमें 20 डॉलर प्रति माह और 100 डॉलर प्रति माह के विकल्प शामिल हैं। कौन-सा प्लान लेना है, यह पूरी तरह से यूजर के इस्तेमाल पर निर्भर कर सकता है। मेटा का कहना है कि ज्यादातर लोगों को पेड प्लान की जरूरत नहीं पड़ेगी। कंपनी के एआई प्रमुख अलेक्जेंडर वांग ने Axios के अनुसार उपयोगकर्ताओं की बड़ी संख्या अपनी जरूरतें फ्री टियर में ही पूरी कर सकेगी। हालांकि, भारी इस्तेमाल करने वाले यूजर्स के लिए 100 डॉलर वाला प्लान ज्यादा उपयोगी हो सकता है।
म्यूज की सुरक्षा कैसे काम करती है?
जहा एक तरफ एआई एजेंट्स की ओर से कंपनियों के संवेदनशील दस्तावेजो तक स्वायत्त पहुंच (Autonomous Access) की खबरें सामने आ रही हैं, वहीं म्यूज की सुरक्षा पर भी बड़े सवाल उठ रहे हैं। सुरक्षा को लेकर मेटा का दावा है कि म्यूज का सबसे दिलचस्प हिस्सा सिर्फ इसका AI मॉडल नहीं, बल्कि इसका सुरक्षा आर्किटेक्चर है।
इसमें हर यूजर के लिए एक पूरी तरह से अलग वातावरण (Isolated Environment) तैयार किया जाता है। म्यूज एजेंट मेटा के क्लाउड में एक समर्पित वर्चुअल मशीन (Dedicated VM) पर चलता है। इसमें एक बिल्ट-इन ब्राउजर भी शामिल है, जिसे यूजर काम करते हुए लाइव देख सकता है।
इसका मतलब है कि म्यूज के काम करने की प्रक्रिया पूरी तरह पर्दे के पीछे नहीं छिपी रहती। यूजर स्क्रीन पर खुद देख सकता है कि एजेंट ब्राउजर में क्या कर रहा है। मेटा के AI प्रमुख अलेक्जेंडर वांग के मुताबिक, यह एजेंट कंपनी के कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के अंदर अपने अलग वातावरण में रन करता है और यूजर के असली पासवर्ड या पेमेंट डिटेल्स को सीधे कभी नहीं देखता।
Sentinel क्या है और क्यों जरूरी है?
म्यूज की सुरक्षा व्यवस्था में Sentinel (सेंटिनल) नाम का एक अलग अप्रूवल एजेंट भी है। लॉन्च की तकनीकी रिपोर्ट के अनुसार, सेंटिनल के पास नेटवर्क एक्सेस और कनेक्टर एक्शन्स का नियंत्रण होता है।
क्रेडेंशियल्स को एक खास तरीके से संभाला जाता है। म्यूज को वास्तविक पासवर्ड या सीक्रेट की जगह प्लेसहोल्डर टोकन दिखाई देते हैं। असली सीक्रेट्स नेटवर्क की सीमा पर जरूरत के समय सिस्टम में डाले जाते हैं।
इस डिजाइन का मकसद यह है कि अगर कोई प्रॉम्प्ट इंजेक्शन के जरिए म्यूज से क्रेडेंशियल हासिल करने की कोशिश करे, तो उसे असली पासवर्ड या सीक्रेट सीधे मिल ही न सके।
ब्राउजर सब-एजेंट को वेबपेज का पूरा रॉ कंटेंट देने के बजाय एसिसबिलिटी ट्री दिखाया जाता है। इसके अलावा वह जावा स्क्रीप्ट को सीधे एक्जीक्यूट नहीं कर सकता। ईमेल कनेक्टर में भी सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत है। यह डिफॉल्ट रूप से वन-टाइम पासकोड और पासवर्ड-रीसेट लिंक को फिल्टर कर देता है।
पेमेंट के समय भी अलग सुरक्षा
शॉपिंग के दौरान मेटा ने कार्ड-लेवल सुरक्षा भी जोड़ी है। चेकआउट के समय एक वन-टाइम कार्ड नंबर तैयार किया जाता है। इससे यूजर का असली कार्ड नंबर मर्चेंट और एआई एजेंट दोनों से छिपा रहता है। यानी म्यूज को शॉपिंग पूरी करने के लिए वास्तविक कार्ड नंबर देखने की जरूरत नहीं पड़ती। प्राइवेसी के मामले में मेटा का कहना है कि म्यूज की बातचीत कंपनी के ऐड सिस्टम के साथ साझा नहीं की जाती।
म्यूज के मुख्य इस्तेमाल उन कामों में हो सकते हैं, जिनमें बार-बार यूजर का समय और ध्यान लगता है।
- शॉपिंग और डील: म्यूज सेव की गई रेसिपी रील को किराने की लिस्ट में बदल सकता है। इसके अलावा यह फर्नीचर जैसी चीजों के लिए बेहतर कीमत खोजने और डील करने में भी मदद कर सकता है।
- बिल और पैसे: यह बिल कम करवाने के लिए बातचीत कर सकता है और बार-बार होने वाले खर्चों को मैनेज करने में मदद कर सकता है।
- यात्रा और फॉर्म: म्यूज ट्रिप बुक करने, जरूरी फॉर्म भरने और कई चरणों वाली कागजी कार्रवाई को संभाल सकता है।
- चल रहे लक्ष्य: स्वास्थ्य योजनाओं, रिश्तों और करियर से जुड़े ऐसे काम, जिन पर समय-समय पर दोबारा काम करना पड़ता है, उन्हें भी म्यूज लंबे समय तक ट्रैक कर सकता है।
कितनी है मेटा म्यूज की कीमत?
म्यूज के लिए एक फ्री टियर के साथ दो पेड सब्सक्रिप्शन प्लान भी हैं। इनमें 20 डॉलर प्रति माह और 100 डॉलर प्रति माह के विकल्प शामिल हैं। कौन-सा प्लान लेना है, यह पूरी तरह से यूजर के इस्तेमाल पर निर्भर कर सकता है। मेटा का कहना है कि ज्यादातर लोगों को पेड प्लान की जरूरत नहीं पड़ेगी। कंपनी के एआई प्रमुख अलेक्जेंडर वांग ने Axios के अनुसार उपयोगकर्ताओं की बड़ी संख्या अपनी जरूरतें फ्री टियर में ही पूरी कर सकेगी। हालांकि, भारी इस्तेमाल करने वाले यूजर्स के लिए 100 डॉलर वाला प्लान ज्यादा उपयोगी हो सकता है।
म्यूज की सुरक्षा कैसे काम करती है?
जहा एक तरफ एआई एजेंट्स की ओर से कंपनियों के संवेदनशील दस्तावेजो तक स्वायत्त पहुंच (Autonomous Access) की खबरें सामने आ रही हैं, वहीं म्यूज की सुरक्षा पर भी बड़े सवाल उठ रहे हैं। सुरक्षा को लेकर मेटा का दावा है कि म्यूज का सबसे दिलचस्प हिस्सा सिर्फ इसका AI मॉडल नहीं, बल्कि इसका सुरक्षा आर्किटेक्चर है।
इसमें हर यूजर के लिए एक पूरी तरह से अलग वातावरण (Isolated Environment) तैयार किया जाता है। म्यूज एजेंट मेटा के क्लाउड में एक समर्पित वर्चुअल मशीन (Dedicated VM) पर चलता है। इसमें एक बिल्ट-इन ब्राउजर भी शामिल है, जिसे यूजर काम करते हुए लाइव देख सकता है।
इसका मतलब है कि म्यूज के काम करने की प्रक्रिया पूरी तरह पर्दे के पीछे नहीं छिपी रहती। यूजर स्क्रीन पर खुद देख सकता है कि एजेंट ब्राउजर में क्या कर रहा है। मेटा के AI प्रमुख अलेक्जेंडर वांग के मुताबिक, यह एजेंट कंपनी के कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के अंदर अपने अलग वातावरण में रन करता है और यूजर के असली पासवर्ड या पेमेंट डिटेल्स को सीधे कभी नहीं देखता।
Sentinel क्या है और क्यों जरूरी है?
म्यूज की सुरक्षा व्यवस्था में Sentinel (सेंटिनल) नाम का एक अलग अप्रूवल एजेंट भी है। लॉन्च की तकनीकी रिपोर्ट के अनुसार, सेंटिनल के पास नेटवर्क एक्सेस और कनेक्टर एक्शन्स का नियंत्रण होता है।
क्रेडेंशियल्स को एक खास तरीके से संभाला जाता है। म्यूज को वास्तविक पासवर्ड या सीक्रेट की जगह प्लेसहोल्डर टोकन दिखाई देते हैं। असली सीक्रेट्स नेटवर्क की सीमा पर जरूरत के समय सिस्टम में डाले जाते हैं।
इस डिजाइन का मकसद यह है कि अगर कोई प्रॉम्प्ट इंजेक्शन के जरिए म्यूज से क्रेडेंशियल हासिल करने की कोशिश करे, तो उसे असली पासवर्ड या सीक्रेट सीधे मिल ही न सके।
ब्राउजर सब-एजेंट को वेबपेज का पूरा रॉ कंटेंट देने के बजाय एसिसबिलिटी ट्री दिखाया जाता है। इसके अलावा वह जावा स्क्रीप्ट को सीधे एक्जीक्यूट नहीं कर सकता। ईमेल कनेक्टर में भी सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत है। यह डिफॉल्ट रूप से वन-टाइम पासकोड और पासवर्ड-रीसेट लिंक को फिल्टर कर देता है।
पेमेंट के समय भी अलग सुरक्षा
शॉपिंग के दौरान मेटा ने कार्ड-लेवल सुरक्षा भी जोड़ी है। चेकआउट के समय एक वन-टाइम कार्ड नंबर तैयार किया जाता है। इससे यूजर का असली कार्ड नंबर मर्चेंट और एआई एजेंट दोनों से छिपा रहता है। यानी म्यूज को शॉपिंग पूरी करने के लिए वास्तविक कार्ड नंबर देखने की जरूरत नहीं पड़ती। प्राइवेसी के मामले में मेटा का कहना है कि म्यूज की बातचीत कंपनी के ऐड सिस्टम के साथ साझा नहीं की जाती।
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म्यूज स्पार्क
- फोटो : musespark
म्यूज को कौन-सा एआई मॉडल पावर करता है?
म्यूज मेटा के नए फ्रंटियर AI मॉडल म्यूज स्पार्क 1.3 पर चलता है। इसे मेटा सुपरइंटेलिजेंस लैब्स ने रिलीज किया है। म्यूज स्पार्क 1.3 को लंबे समय तक चलने वाले एजेंटिक कामों के लिए तैयार किया गया है। इसमें जीरो-शॉट सीएलआई टूल कॉलिंग, कई वर्कफ्लो को एक साथ संभालना और जटिल या अव्यवस्थित स्रोतों से मिली जानकारी में खुद को सुधारने जैसी क्षमताओं पर फोकस किया गया है।
मेटा की आंतरिक तुलना के अनुसार, म्यूज स्पार्क 1.3 और म्यूज स्पार्क 1.2 की तुलना में करीब 20 फीसदी कम टूल कॉल्स और 25 फीसदी कम टोकन्स का इस्तेमाल किया।
हालांकि, यहां एप और मॉडल की ओपननेस को अलग-अलग समझना जरूरी है। म्यूज एक कंज्यूमर सर्विस है, जिसे डेवलपर्स खुद सेल्फ-होस्ट नहीं कर सकते। वहीं इसका अंडरलाइंग मॉडल म्यूज स्पार्क 1.3, मेटा मॉडल एपीआई और म्यूज कोड के जरिए उपलब्ध है।
मेटा ने म्यूज क्यों पेश किया?
कहा जा रहा है कि मेटा का यह एआई एजेंट उस बड़ी रणनीति का हिस्सा है, जिसमें कंपनी पर्सनल एआई को अगले बड़े कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म के तौर पर देख रही है।
यह प्रोडक्ट लंबे समय से डेवलपमेंट में था। मेटा के सीईओ मार्क जकरबर्ग ने अपने हालिया करीब 6,500 शब्दों के घोषणापत्र में इसे कंपनी के अगले महत्वपूर्ण कदमों में शामिल किया था।
इसका बड़ा आइडिया पर्सनल इंटेलिजेंस है। यानी ऐसा एआई एजेंट जो यूजर की जिंदगी के अलग-अलग हिस्सों में उसकी ओर से काम कर सके। यही वजह है कि म्यूज को सिर्फ चैटबॉट के तौर पर नहीं, बल्कि ऐसे डिजिटल असिस्टेंट के रूप में पेश किया जा रहा है जो लक्ष्य समझकर उसके लिए कई चरणों में काम कर सकता है।
म्यूज मेटा के नए फ्रंटियर AI मॉडल म्यूज स्पार्क 1.3 पर चलता है। इसे मेटा सुपरइंटेलिजेंस लैब्स ने रिलीज किया है। म्यूज स्पार्क 1.3 को लंबे समय तक चलने वाले एजेंटिक कामों के लिए तैयार किया गया है। इसमें जीरो-शॉट सीएलआई टूल कॉलिंग, कई वर्कफ्लो को एक साथ संभालना और जटिल या अव्यवस्थित स्रोतों से मिली जानकारी में खुद को सुधारने जैसी क्षमताओं पर फोकस किया गया है।
मेटा की आंतरिक तुलना के अनुसार, म्यूज स्पार्क 1.3 और म्यूज स्पार्क 1.2 की तुलना में करीब 20 फीसदी कम टूल कॉल्स और 25 फीसदी कम टोकन्स का इस्तेमाल किया।
हालांकि, यहां एप और मॉडल की ओपननेस को अलग-अलग समझना जरूरी है। म्यूज एक कंज्यूमर सर्विस है, जिसे डेवलपर्स खुद सेल्फ-होस्ट नहीं कर सकते। वहीं इसका अंडरलाइंग मॉडल म्यूज स्पार्क 1.3, मेटा मॉडल एपीआई और म्यूज कोड के जरिए उपलब्ध है।
मेटा ने म्यूज क्यों पेश किया?
कहा जा रहा है कि मेटा का यह एआई एजेंट उस बड़ी रणनीति का हिस्सा है, जिसमें कंपनी पर्सनल एआई को अगले बड़े कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म के तौर पर देख रही है।
यह प्रोडक्ट लंबे समय से डेवलपमेंट में था। मेटा के सीईओ मार्क जकरबर्ग ने अपने हालिया करीब 6,500 शब्दों के घोषणापत्र में इसे कंपनी के अगले महत्वपूर्ण कदमों में शामिल किया था।
इसका बड़ा आइडिया पर्सनल इंटेलिजेंस है। यानी ऐसा एआई एजेंट जो यूजर की जिंदगी के अलग-अलग हिस्सों में उसकी ओर से काम कर सके। यही वजह है कि म्यूज को सिर्फ चैटबॉट के तौर पर नहीं, बल्कि ऐसे डिजिटल असिस्टेंट के रूप में पेश किया जा रहा है जो लक्ष्य समझकर उसके लिए कई चरणों में काम कर सकता है।
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मेटा म्यूज
- फोटो : एआई जनरेटेड
मेटा के लिए भरोसा सबसे बड़ी चुनौती क्यों?
म्यूज को ऐसे समय में पेश किया गया है जब एआई कंपनियां चैटबॉट से आगे बढ़कर ऐसे एजेंट विकसित करने की होड़ में हैं, जो यूजर की ओर से वास्तविक दुनिया के काम कर सकें।
मेटा के लिए यह बदलाव खास है, क्योंकि किसी म्यूज को ईमेल, शॉपिंग, पेमेंट और दूसरे निजी कामों तक पहुंच देना सामान्य चैटबॉट इस्तेमाल करने से कहीं ज्यादा भरोसे की मांग करता है। इसी वजह से म्यूज की लॉन्चिंग में इसका सुरक्षा मॉडल भी काफी प्रमुखता से सामने रखा गया है।
मेटा म्यूज दूसरे एआई से कितना अलग?
म्यूज अकेला एआई एजेंट नहीं है जो यूजर की ओर से काम करने की कोशिश कर रहा है। गूगल, ओपनएआई और माइक्रोसॉफ्ट भी ऐसे एजेंट्स पर काम कर रहे हैं जो सिर्फ जवाब देने के बजाय वास्तविक कार्य पूरे कर सकें। इन एजेंट्स के बीच कुछ महत्वपूर्ण अंतर दिखाई देते हैं।
एआई एजेंट्स का अगला दौर
म्यूज को ऐसे समय में पेश किया गया है जब एआई कंपनियां चैटबॉट से आगे बढ़कर ऐसे एजेंट विकसित करने की होड़ में हैं, जो यूजर की ओर से वास्तविक दुनिया के काम कर सकें।
मेटा के लिए यह बदलाव खास है, क्योंकि किसी म्यूज को ईमेल, शॉपिंग, पेमेंट और दूसरे निजी कामों तक पहुंच देना सामान्य चैटबॉट इस्तेमाल करने से कहीं ज्यादा भरोसे की मांग करता है। इसी वजह से म्यूज की लॉन्चिंग में इसका सुरक्षा मॉडल भी काफी प्रमुखता से सामने रखा गया है।
मेटा म्यूज दूसरे एआई से कितना अलग?
म्यूज अकेला एआई एजेंट नहीं है जो यूजर की ओर से काम करने की कोशिश कर रहा है। गूगल, ओपनएआई और माइक्रोसॉफ्ट भी ऐसे एजेंट्स पर काम कर रहे हैं जो सिर्फ जवाब देने के बजाय वास्तविक कार्य पूरे कर सकें। इन एजेंट्स के बीच कुछ महत्वपूर्ण अंतर दिखाई देते हैं।
- एग्जीक्यूशन बनाम सलाह: कई कंज्यूमर एआई टूल अभी भी यूजर को सुझाव या ड्राफ्ट देने तक सीमित हैं। म्यूज को इसके बजाय अंतिम कदम खुद उठाने वाले एजेंट के तौर पर पेश किया जा रहा है। हालांकि, इसके साथ ज्यादा जोखिम भी जुड़ते हैं।
- आइसोलेशन मॉडल: म्यूज में हर यूजर के लिए क्लाउड वीएम और अलग सेंटिनल अप्रूवर का इस्तेमाल किया जाता है। इसका मकसद एजेंट को यूजर के संवेदनशील अकाउंट्स और सीक्रेट्स से अलग रखना है।
- यह कहां रन करता है: म्यूज मेटा के क्लाउड में चलने वाली होस्टेड कंज्यूमर सर्विस है। यह उन लोकल और ओपन-सोर्स एजेंट्स से अलग मॉडल है, जिनमें AI एजेंट यूजर की अपनी मशीन पर चलता है और डेटा व ब्राउजर लोकल रहते हैं।
एआई एजेंट्स का अगला दौर
- जानकारों का कहना है कि म्यूज यह दिखाता है कि पर्सनल एआई एजेंट किस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। अब सिर्फ सवाल पूछने या जवाब लेने के बजाय यूजर AI को एक लक्ष्य देकर उसे पूरा करने की जिम्मेदारी सौंप सकता है।
- इस मॉडल में एआई लक्ष्य को समझता है, उसके लिए प्लान बनाता है और फिर कई चरणों में काम पूरा करता है। जरूरत पड़ने पर वह यूजर से मंजूरी भी लेता है।
- यही मॉडल अपने साथ नई संभावनाओं के साथ नई सुरक्षा चुनौतियां भी लाता है। खासकर तब, जब एआई एजेंट को ईमेल, शॉपिंग, पेमेंट और निजी अकाउंट्स जैसे संवेदनशील क्षेत्रों तक पहुंच दी जाए।
- इसी दिशा में अपनी खुद की एआई वर्कफोर्स का विचार भी सामने आता है। इसका मकसद ऐसा ओपन-सोर्स, मल्टी-एजेंट सिस्टम तैयार करना है, जिसे डेस्कटॉप पर खुद चलाया जा सके और रियल वर्कफ्लो को लोकल स्तर पर ऑटोमेट किया जा सके। इस मॉडल में डेटा और क्रेडेंशियल्स को यूजर की अपनी मशीन से बाहर न ले जाने पर जोर दिया जाता है।
- ऐसे में कहा जा रहा है कि आने वाले समय में एआई एजेंट्स के बीच मुकाबला सिर्फ इस बात का नहीं होगा कि कौन ज्यादा स्मार्ट जवाब देता है। असली सवाल यह भी होगा कि कौन एजेंट यूजर के लिए ज्यादा काम कर सकता है और साथ ही उसके डेटा, अकाउंट और पेमेंट को कितनी सुरक्षित तरीके से संभाल सकता है।