फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

काम की बात: क्या पुरानी लिथियम-आयन टेक्नोलॉजी की जगह लेगी सिलिकॉन-कार्बन बैटरी? जानें फायदे और नुकसान

Mon, 02 Nov 2026 11:20 AM IST
नीतीश कुमार टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नीतीश कुमार Updated Mon, 02 Nov 2026 11:20 AM IST
सार

Silicon-Carbon Battery: स्मार्टफोन की बैटरी जल्दी खत्म होने की परेशानी दूर करने के लिए कंपनियां अब सिलिकॉन-कार्बन टेक्नोलॉजी अपना रही हैं। इसकी मदद से कम जगह में ज्यादा क्षमता वाली बैटरी लगाना संभव हो रहा है। दावा किया जा रहा है कि सिलिकन-कार्बन बैटरी दो दिन से ज्यादा बैकअप दे सकती हैं। हालांकि, इस टेक्नोलॉजी के कुछ नुकसान को लेकर भी एक्सपर्ट्स में चिंता है। जानिए कैसे काम करती है यह तकनीक।

विज्ञापन
what is silicon carbon battery lithium ion comparison advantages disadvantages in smartphones
स्मार्टफोन इंडस्ट्री में बढ़ रहा सिलिकन-कार्बन बैटरी का इस्तेमाल। - फोटो : अमर उजाला
अगर पिछले कुछ समय के स्मार्टफोन बाजार पर गौर करें, तो अब फोन में सिलिकॉन कार्बन बैटरी (Silicon Carbon Battery) का चलन तेजी से बढ़ रहा है। ऑनर, ओप्पो और शाओमी जैसी चीनी कंपनियों के साथ अब टेक दिग्गज सैमसंग ने भी अपने नए Galaxy Z Fold 8 और Fold 8 Ultra में इस बैटरी तकनीक का इस्तेमाल किया है।


दावा किया जा रहा है कि इन बैटरियों के साथ स्मार्टफोन्स आसानी से दो दिन का बैकअप दे सकते हैं। तो आखिर क्या है यह सिलिकॉन कार्बन बैटरी? यह पुरानी लिथियम-आयन बैटरियों से कितनी अलग है और क्या बंपर बैकअप देने वाली इस तकनीक की कोई कीमत भी हमें चुकानी पड़ेगी? आइए इसे विस्तार से समझते हैं।
Trending Videos
what is silicon carbon battery lithium ion comparison advantages disadvantages in smartphones
स्मार्टफोन बैटरी - फोटो : एआई जनरेटेड
सबसे पहले समझिए बैटरी काम कैसे करती है?
किसी भी सामान्य बैटरी के तीन मुख्य हिस्से होते हैं- एनोड, कैथोड और इनके बीच बहने वाला इलेक्ट्रोलाइट। जब बैटरी पूरी तरह चार्ज होती है, तो सारी ऊर्जा एनोड में जमा हो जाती है। फोन इस्तेमाल करने पर ये इलेक्ट्रॉन्स इलेक्ट्रोलाइट के जरिए कैथोड की तरफ बहते हैं, जिससे फोन को पावर मिलती है।

इसे एक वॉटर-पार्क की स्लाइड की तरह समझें। मान लीजिए बहुत सारे बच्चे ऊपर (एनोड) खड़े हैं और जल्दी से नीचे (कैथोड) आना चाहते हैं। स्लाइड पर बहता पानी (इलेक्ट्रोलाइट) उन्हें नीचे आने में मदद करता है। बच्चे बार-बार ऊपर जाते हैं और नीचे आते हैं यानी चार्जिंग और डिस्चार्जिंग होती रहती है। लेकिन समय के साथ जब पानी कम होने लगता है, तो स्लाइड सूखी हो जाती है। ठीक इसी तरह पुरानी होने पर बैटरी की क्षमता कम होने लगती है।
what is silicon carbon battery lithium ion comparison advantages disadvantages in smartphones
लिथियम-आयन बैटरी - फोटो : Adobe Stock
लिथियम-आयन बैटरी की सीमाएं
पिछले लगभग 25 साल से फोन और लैपटॉप में लिथियम-आयन (Lithium-ion) बैटरी का ही इस्तेमाल किया जा रहा है। इन बैटरियों के एनोड में मुख्य रूप से ग्रेफाइट का इस्तेमाल होता है। पिछले दो दशकों में लिथियम-आयन बैटरी को जितना बेहतर किया जा सकता था, वो किया जा चुका है। अब ग्रेफाइट अपनी पूरी क्षमता पर पहुंच चुका है और यही बैटरी के परफॉर्मेंस को सीमित कर रहा है। इसी ग्रेफाइट को रिप्लेस करने के लिए सिलिकॉन को सबसे बेहतरीन विकल्प माना जा रहा है।

क्या है सिलिकॉन कार्बन बैटरी? (What is Silicon Carbon Battery)
नाम से भले ही लगे कि यह पूरी तरह से नई बैटरी है, लेकिन असल में यह लिथियम-आयन का ही एक एडवांस्ड रूप है। इसमें एनोड पूरी तरह से ग्रेफाइट का न होकर, उसमें कुछ प्रतिशत सिलिकॉन पाउडर मिला दिया जाता है। चूंकि सिलिकॉन की चार्ज होल्ड करने की क्षमता ग्रेफाइट से कई गुना ज्यादा होती है, इसलिए इसे सिलिकॉन कार्बन बैटरी कहा जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
what is silicon carbon battery lithium ion comparison advantages disadvantages in smartphones
सिलिकॉन-कार्बन बैटरी: कम जगह में ज्यादा बैटरी क्षमता - फोटो : OnePlus
सिलिकॉन-कार्बन बैटरी के 4 बड़े फायदे
1. कम जगह में ज्यादा बैटरी क्षमता
इस टेक्नोलॉजी का सबसे बड़ा फायदा ज्यादा एनर्जी स्टोर करने की क्षमता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ग्रेफाइट की क्षमता करीब 330mAh प्रति ग्राम होती है, जबकि सिलिकॉन की क्षमता इससे लगभग 10 गुना तक ज्यादा हो सकती है।

इससे कंपनियां फोन की मोटाई बढ़ाए बिना बड़ी क्षमता वाली बैटरी दे सकती हैं। उदाहरण के लिए, वनप्लस 15 में 7,300mAh की बैटरी दी गई है। फोन के बैटरी टेस्ट में इसने 38.5 घंटे तक का रनटाइम दिया।

2. दो दिन तक मिल सकता है बैटरी बैकअप
ज्यादा एनर्जी स्टोर करने की क्षमता के कारण स्मार्टफोन की बैटरी लंबे समय तक चल सकती है। कुछ डिवाइस में सामान्य इस्तेमाल के दौरान दो दिन तक का बैकअप मिलने की संभावना है। इससे यूजर्स को बार-बार फोन चार्ज करने की जरूरत कम पड़ सकती है।

3. तेजी से चार्ज होती है बैटरी
सिलिकॉन-कार्बन टेक्नोलॉजी का एक और फायदा फास्ट चार्जिंग है। ग्रेफाइट की परतों के बीच लिथियम आयन को पहुंचने में समय लगता है। वहीं, सिलिकॉन में लिथियम आयन तेजी से प्रतिक्रिया करते हैं। इससे बैटरी को कम समय में चार्ज करने में मदद मिलती है।

4. सिलिकॉन आसानी से उपलब्ध और सस्ता मटेरियल
सिलिकॉन की उपलब्धता भी इस टेक्नोलॉजी को खास बनाती है। यह एक सामान्य और आसानी से मिलने वाला मटेरियल है। इससे बैटरी के लिए जरूरी कच्चे माल की सप्लाई को लेकर दूसरे कुछ मटेरियल की तुलना में कम जोखिम हो सकता है।
विज्ञापन
what is silicon carbon battery lithium ion comparison advantages disadvantages in smartphones
सिलिकॉन-कार्बन बैटरी जल्दी खराब होती है। - फोटो : Adobe Stock
सिलिकॉन-कार्बन बैटरी के नुकसान क्या हैं?
हर नई तकनीक की तरह सिलिकॉन कार्बन बैटरी की भी कुछ कमियां हैं। फिनलैंड की सिएनाजोकी यूनिवर्सिटी के डॉ. जुहो हेइस्का के अनुसार, इसका सबसे बड़ा नुकसान बैटरी का फूलना है। डॉ. हाइस्का के मुताबिक, चार्जिंग साइकल के दौरान ग्रेफाइट का आकार करीब 10% तक बढ़ता है, जबकि सिलिकॉन में यह बदलाव लगभग 400% तक हो सकता है। बार-बार ऐसा होने से बैटरी की स्थिरता और उसकी लाइफ प्रभावित होती है।

यही वजह है कि कंपनियां फिलहाल पूरी तरह सिलिकॉन से बनी बैटरी का इस्तेमाल नहीं कर रही हैं। ग्रेफाइट और सिलिकॉन का सही अनुपात बनाए रखना जरूरी है, ताकि बैटरी की क्षमता बढ़ाने के साथ उसकी लाइफ भी बनी रहे।
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News App अपने मोबाइल पे|
Get all Tech News in Hindi related to live news update of latest mobile reviews apps, tablets etc. Stay updated with us for all breaking news from Tech and more Hindi News.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed