मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप (WhatsApp) ने डिजिटल अरेस्ट स्कैम के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 9,400 से ज्यादा अकाउंट्स को बैन कर दिया है। यह कार्रवाई जनवरी 2026 से शुरू हुई 12 हफ्तों की विशेष जांच के दौरान की गई, जिसमें शुरुआत सिर्फ 17 संदिग्ध अकाउंट्स से हुई थी।
कैसे खुला पूरा नेटवर्क?
जांच के दौरान कंपनी ने AI-आधारित तकनीकों का इस्तेमाल किया, जिसमें संदिग्ध ग्रुप्स, बार-बार इस्तेमाल हो रहे फोटो-वीडियो और एक जैसे व्यवहार वाले अकाउंट्स को ट्रैक किया गया। फर्जी पुलिस लोगो और एजेंसियों जैसे सीबीआई और दिल्ली पुलिस के नाम पर लोगों को ठगने वाले अकाउंट्स की पहचान की गई।
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डिजिटल अरेस्ट
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विदेश से चल रहा था ठगी का खेल
जांच में यह भी सामने आया कि कई स्कैम ऑपरेशन दक्षिण-पूर्व एशिया, खासकर कंबोडिया से संचालित हो रहे थे। इससे साफ है कि यह सिर्फ देश के भीतर का नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैला साइबर फ्रॉड नेटवर्क है।
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डिजिटल अरेस्ट स्कैम
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स्कैम में 471% का इजाफा
गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में डिजिटल अरेस्ट स्कैम से होने वाला नुकसान 471% बढ़कर 1,935 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इस ठगी में अपराधी लंबी कॉल्स, फर्जी केस और डर का माहौल बनाकर लोगों को मानसिक दबाव में रखते हैं और परिवार से संपर्क तक नहीं करने देते। इन शातिर ठगों का तरीका बेहद खौफनाक होता है। वे आम लोगों को घंटों तक वीडियो या ऑडियो कॉल पर उलझा कर रखते हैं, फर्जी कानूनी दस्तावेजों का खौफ दिखाते हैं और पीड़ितों को अपने ही परिवार से संपर्क करने से रोक देते हैं। ऐसे में डरा-सहमा इंसान अपनी जीवन भर की गाढ़ी कमाई इन जालसाजों के खातों में ट्रांसफर कर देता है।
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सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हुई कार्रवाई
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सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हुई कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2025 में इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया था। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई में एक फ्रेमवर्क तैयार किया गया, जिसमें आरबीआई, दूरसंचार विभाग और कानून प्रवर्तन एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं।
सरकार अब इस खतरे से निपटने के लिए बायोमेट्रिक सिम वेरिफिकेशन और तेज सिम ब्लॉकिंग सिस्टम लागू करने की तैयारी कर रही है। दूरसंचार विभाग दिसंबर 2026 तक इस सिस्टम को लागू करना चाहता है, जिससे संदिग्ध सिम को घंटों के भीतर ब्लॉक किया जा सके।