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Chandra Grahan 2026: चंद्र ग्रहण के दौरान क्यों लाल हो जाता है चांद? यहां जानें इसका वैज्ञानिक कारण
यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shruti Gaur
Updated Mon, 02 Mar 2026 11:51 AM IST
सार
Chandra Grahan 2026: यहां हम आपको चंद्र ग्रहण जुड़ी कुछ बातों का वैज्ञानिक कारण बताएंगे। ये बातें काफी अहम हैं और इनको लेकर लोगों के मन में तमाम सवाल होते हैं।
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चंद्र ग्रहण कब से कब तक है?
- फोटो : अमर उजाला
Chandra Grahan Kab se Kab tak Hai: चंद्र ग्रहण एक दुर्लभ खगोलीय घटना है, जिसे सिर्फ खगोल शास्त्र के जानकार ही नहीं, बल्कि आम लोग भी बहुत रोमांच के साथ देखते हैं। इस बार 3 मार्च 2026 पूर्ण चंद्र ग्रहण पड़ेगा, जिसका असर भारत में भी देखने को मिलेगा।
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चंद्र ग्रहण कब से कब तक है?
- फोटो : amar ujala
कब से कब तक रहेगा ग्रहण?
- चंद्र ग्रहण प्रारंभ होने का समय दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर
- चंद्र ग्रहण का खग्रास प्रारंभ शाम में 4 बजकर 34 मिनट पर
- ग्रहण का मध्य दोपहर में 5 बजकर 33 मिनट पर
- चंद्र ग्रहण समाप्त दोपहर में 6 बजकर 47 मिनट पर
- चंद्रग्रहण का खग्रास कुल 59 मिनट का रहेगा
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चंद्र ग्रहण कब से कब तक है?
- फोटो : अमर उजाला
कब होता है चंद्र ग्रहण?
चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सूर्य और चांद के बीच आ जाती है, और पृथ्वी की छाया चांद पर पड़ती है। इससे चांद को सीधे सूर्य की रोशनी नहीं मिल पाती और वो अंधेरी अवस्था में चला जाता है।
चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सूर्य और चांद के बीच आ जाती है, और पृथ्वी की छाया चांद पर पड़ती है। इससे चांद को सीधे सूर्य की रोशनी नहीं मिल पाती और वो अंधेरी अवस्था में चला जाता है।
चंद्र ग्रहण कब से कब तक है?
- फोटो : Adobe Stock
क्यों लाल हो जाता है चांद?
जब चांद पृथ्वी की छाया में होता है, तो सीधे सूर्य की रोशनी उस तक नहीं पहुंच पाती। लेकिन पृथ्वी के वायुमंडल में से गुजरते समय सूर्य की रोशनी के छोटे तरंगदैर्ध्य जैसे नीला और हरा फैल जाते हैं और बड़े तरंगदैर्ध्य लाल और नारंगी सीधे चांद तक पहुंचते हैं। इस प्रक्रिया को Rayleigh scattering कहते हैं।
जब चांद पृथ्वी की छाया में होता है, तो सीधे सूर्य की रोशनी उस तक नहीं पहुंच पाती। लेकिन पृथ्वी के वायुमंडल में से गुजरते समय सूर्य की रोशनी के छोटे तरंगदैर्ध्य जैसे नीला और हरा फैल जाते हैं और बड़े तरंगदैर्ध्य लाल और नारंगी सीधे चांद तक पहुंचते हैं। इस प्रक्रिया को Rayleigh scattering कहते हैं।
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चंद्र ग्रहण कब से कब तक है?
- फोटो : adobe
जैसा कि सूर्यास्त के समय सूरज लाल दिखता है, उसी तरह पृथ्वी का वायुमंडल सूर्य की रोशनी को फिल्टर करता है, और जब सिर्फ लाल और नारंगी रोशनी चांद तक पहुंचती है, तब चांद लाल-भूरे रंग का दिखाई देता है। यही वजह है कि ग्रहण के समय चांद का रंग ब्लड मून की तरह दिखता है।