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Notary vs Registry: नोटरी और रजिस्ट्री में क्या अंतर है? जानें कौन से दस्तावेज की होती है अधिक मान्यता

Sun, 05 Jul 2026 07:21 PM IST
Shikhar Baranawal यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shikhar Baranawal Updated Sun, 05 Jul 2026 07:21 PM IST
सार

Property Registration Rules India: नोटरी और रजिस्ट्री दोनों की कानूनी दस्तावेज हैं। मगर इन दोनों के बीच में जमीन और आसमान का अंतर होता है, जिसको लेकर कई लोगों के मन में कंफ्यूजन भी रहता है। इसलिए आइए इस लेख यही समझते हैं कि इन दोनों दस्तावेज में क्या बुनियादी अंदर हैं।

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Difference Between Notary and Registry: Legal Validity and Main Differences Explained
नोटरी और रजिस्ट्री में अंतर - फोटो : AI

Difference Between Notary And Registry: जमीन-मकान खरीदने, किरायानामा बनवाने या किसी भी तरह के कानूनी कामकाज के दौरान हमारे सामने दो शब्द सबसे ज्यादा आते हैं 'नोटरी' और 'रजिस्ट्री'। अक्सर आम इंसान इन दोनों को एक ही समझ लेता है या इनके बीच के बड़े अंतर को नहीं जान पाता। यही वजह है कि कई बार लोग प्रॉपर्टी के मामलों में नोटरी करवाकर निश्चिंत हो जाते हैं और बाद में बड़े कानूनी विवादों या धोखाधड़ी का शिकार बन जाते हैं। 



असल में नोटरी और रजिस्ट्री दोनों के कानूनी अधिकार, प्रक्रिया और मान्यता में जमीन-आसमान का फर्क होता है। आइए इस लेख में समझते हैं कि इन दोनों में क्या अंतर है और कोर्ट में किसे ज्यादा मजबूत माना जाता है।

Difference Between Notary and Registry: Legal Validity and Main Differences Explained
क्या होती है नोटरी और इसके मुख्य काम? (सांकेतिक तस्वीर)) - फोटो : Adobe Stock

क्या होती है नोटरी और इसके मुख्य काम?
नोटरी एक तरह का प्रमाणीकरण है, जिसे सरकार द्वारा नियुक्त वकील (नोटरी पब्लिक) करता है। इसका मुख्य काम यह देखना होता है कि दस्तावेज (जैसे हलफनामा या रेंट एग्रीमेंट) पर दस्तखत करने वाले इंसान असली हैं या नहीं। नोटरी सिर्फ यह साबित करती है कि आपके सामने दोनों पक्षों ने समझौते पर साइन किए हैं, लेकिन यह किसी संपत्ति के मालिकाना हक का कानूनी सबूत नहीं होती।

Difference Between Notary and Registry: Legal Validity and Main Differences Explained
क्या होती है रजिस्ट्री और इसकी कानूनी ताकत? (सांकेतिक तस्वीर)) - फोटो : Adobe Stock

क्या होती है रजिस्ट्री और इसकी कानूनी ताकत?
रजिस्ट्री एक बेहद मजबूत कानूनी प्रक्रिया है, जो सरकारी सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में पूरी होती है। जब आप कोई जमीन या मकान खरीदते हैं, तो सरकार को स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस देकर अपने नाम ट्रांसफर करवाते हैं। रजिस्ट्री होने के बाद सरकारी रिकॉर्ड (बहियों) में आपका नाम बकायदा दर्ज हो जाता है, जो यह साबित करता है कि अब उस संपत्ति के असली और एकमात्र मालिक आप ही हैं।

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Difference Between Notary and Registry: Legal Validity and Main Differences Explained
दोनों के बीच खर्च और समय का बड़ा अंतर (सांकेतिक तस्वीर)) - फोटो : Adobe Stock

दोनों के बीच खर्च और समय का बड़ा अंतर
नोटरी कराने की प्रक्रिया बेहद आसान, सस्ती और त्वरित होती है। यह ₹50 से ₹200 के स्टांप पेपर और नोटरी वकील की छोटी सी फीस देकर महज कुछ मिनटों में कोर्ट परिसर में ही हो जाती है। इसके विपरीत, रजिस्ट्री कराने में प्रॉपर्टी की कुल कीमत का एक बड़ा हिस्सा (स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्ज के रूप में) सरकार को चुकाना पड़ता है और इसमें समय भी अधिक लगता है।

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Difference Between Notary and Registry: Legal Validity and Main Differences Explained
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
किस दस्तावेज की कोर्ट में होती है अधिक मान्यता?
कानूनी मान्यता और सुरक्षा के मामले में रजिस्ट्री, नोटरी के मुकाबले कई गुना ज्यादा मजबूत होती है। कोर्ट में नोटरी के आधार पर आप किसी जमीन के मालिकाना हक का दावा कभी नहीं कर सकते। अगर कोई व्यक्ति सिर्फ नोटरी पेपर के भरोसे प्रॉपर्टी खरीदता है, तो कानूनन वह अवैध मानी जाएगी। इसलिए, संपत्ति के लेन-देन में हमेशा रजिस्ट्री ही करवानी चाहिए ताकि आपका पैसा सुरक्षित रहे।
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