E-Rickshaw Chinese App Truth: सोशल मीडिया पर इन दिनों कुछ ऐसे हैरान करने वाले वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिन्हें देखकर हर कोई हैरान है। इन वीडियो में दिखाया जा रहा है कि सड़क पर सरपट दौड़ते हुए ई-रिक्शा अचानक एक जगह पर ठप हो जाते हैं। इंटरनेट पर दावा किया जा रहा है कि 'BAT-BMS' नाम के एक चीनी मोबाइल एप के जरिए कोई भी शरारती तत्व थोड़ी दूरी से भी रिमोट की तरह किसी भी चलते हुए ई-रिक्शा को बंद कर सकता है।
E-Rickshaw Viral App Truth: क्या सच में BAT-BMS एप से चलते ई-रिक्शा को रोका जा सकता है? यहां जानें हकीकत
Electric Vehicle Hacking: इंटरनेट पर इन दिनों मोबाइल से रिमोट की ई-रिक्शा को रोकने के कई वायरल हो रहे हैं। ऐसे में बहुत से लोगों के मन में इसको लेकर कई तरह के डर और सवाल हैं। आइए इस लेख में इसी के बारे में समझते हैं कि क्या सच में मोबाइल से ई-रिक्शा को रोका जा सकता है?
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हैकिंग टूल नहीं, सिर्फ मॉनिटरिंग एप है?
- सबसे पहली बात यह समझनी जरूरी है कि 'BAT-BMS' कोई हैकिंग टूल नहीं है, बल्कि यह स्मार्ट लिथियम बैटरियों की सेहत पर नजर रखने के लिए बनाया गया एक साधारण एप है।
- यह एप 2022 से ही प्ले स्टोर पर मौजूद है, लेकिन इन दिनों वायरल वीडियो की वजह से चर्चा में आया है।
- यह एप ब्लूटूथ के जरिए सिर्फ उन्हीं बैटरी सिस्टम से जुड़ता है जिनमें ब्लूटूथ-सक्षम बीएमएस लगा होता है, ताकि उनके वोल्टेज, तापमान और हेल्थ की जांच करके सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
सीमित ब्लूटूथ रेंज और पुरानी बैटरियों का सच
- यह एप सिर्फ उन्हीं आधुनिक बैटरियों से कनेक्ट हो सकता है जिन्हें विशेष रूप से ब्लूटूथ कनेक्टिविटी के साथ डिजाइन किया गया है, लेकिन उसमें भी सबसे बड़ी बात यह है कि अगर कंपनी ने उसकी सुरक्षा मजबूत रखी है तो बिना ई-रिक्शा मालिक के परमिशन के ये एप नहीं कनेक्ट हो सकता है।
- बता दें कि बाजार में दौड़ रहे अधिकांश ई-रिक्शा में पुरानी तकनीक या अलग-अलग कंपनियों के साधारण बीएमएस होते हैं, इसलिए अधिकतर ई-रिक्शा से ये एप कनेक्ट नहीं हो सकते हैं।
- इसके अलावा अगर किसी कमजोर साइबर सुरक्षा वाले ई-रिक्शा से कनेक्ट होता भी है तो ब्लूटूथ की रेंज बहुत कम (सीमित) होती है, जिससे दूर से किसी चलती गाड़ी को नियंत्रित करना व्यावहारिक रूप से नामुमकिन है।
साइबर सुरक्षा और पासवर्ड सुरक्षा का असली खेल
- इस पूरी तकनीक में सबसे महत्वपूर्ण बात डिजिटल सुरक्षा यानी पासवर्ड की है।
- अगर किसी बैटरी में पासवर्ड या एन्क्रिप्शन जैसी मजबूत सुरक्षा नहीं है, तो उसका अनधिकृत एक्सेस (गलत इस्तेमाल) संभव हो सकता है।
- हालांकि, अधिकांश कंपनियां अपनी बैटरियों में कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल का उपयोग करती हैं, जिससे कोई भी अजनबी रैंडम तरीके से किसी रिक्शा को नहीं रोक सकता।
- मगर एक्सपर्ट्स मानते हैं कि जिन कंपनियों की साइबर सुरक्षा कमजोर है, वहां यह एप आसानी से कनेक्ट हो सकता है।
प्रीमियम इलेक्ट्रिक कार और स्कूटर पूरी तरह सुरक्षित
- ई-रिक्शा की इस हैकिंग वाली खबर को सुनकर अगर आप अपनी महंगी इलेक्ट्रिक कार या स्कूटर को लेकर चिंतित हैं, तो राहत की सांस लीजिए।
- बाजार में मिलने वाली बड़ी कंपनियों की प्रीमियम इलेक्ट्रिक कारों और आधुनिक स्कूटर्स की साइबर सुरक्षा (डिजिटल लॉक) बेहद मजबूत और अंतरराष्ट्रीय मानकों की होती है।
- यही वजह है कि ये एप उन एडवांस गाड़ियों से कनेक्ट नहीं हो सकता है।
अस्वीकरण: यह लेख सामान्य जानकारी पर आधारित है, जिसका उद्देश्य समाज में सिर्फ जागरूकता फैलाना है। लेखक या अमर उजाला इस बात की पुष्टि नहीं करता है कि इस एप से हर ई-रिक्शा वास्तव में कनेक्ट हो सकता है या नहीं। आप भी एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर सतर्क रहें और अगर किसी शरारत के चलते किसी का ई-रिक्शा कनेक्ट हो जाए, तो उसे रोककर कतई परेशान न करें।