Illegal Detention Laws India: भारतीय कानून के तहत किसी भी व्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार बहुत महत्वपूर्ण है और पुलिस प्रशासन इसे बिना ठोस कानूनी आधार के छीन नहीं सकता। दंड प्रक्रिया संहिता और अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के अनुसार, पुलिस किसी भी व्यक्ति को बिना आधिकारिक गिरफ्तारी या रिकॉर्ड के थाने में नहीं रोक सकती।
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Illegal Detention: बिना किसी आधिकारिक रिकॉर्ड के थाने में कितनी देर बैठा सकती है पुलिस? जानें नियम
यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shikhar Baranawal
Updated Fri, 15 May 2026 03:50 PM IST
सार
Police Custody Time Limit: अक्सर ऐसा देखने को मिलता है कि कुछ थाने वाले लोगों को पुछताछ के नाम पर थाने पर ही बैठा लेते हैं। ऐसे में लोगों के मन में ये सवाल उठता है कि इस स्थिति में आखिर आपके पास क्या अधिकार होते हैं। आइए इस लेख में इसी के बारे में समझते हैं।
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पुलिस स्टेशन पर कितनी देर थाने में बैठा सकती है पुलिस
- फोटो : AI
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पुलिस स्टेशन पर कितनी देर थाने में बैठा सकती है पुलिस
- फोटो : AI
थाने में रखने और गिरफ्तारी के सख्त नियम
- पुलिस किसी भी गिरफ्तार व्यक्ति को बिना मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए 24 घंटे से अधिक समय तक हिरासत में नहीं रख सकती।
- नियम के मुताबिक, पुलिस को किसी आरोपी को थाने लाते ही सबसे पहले उसका नाम, समय 'अरेस्ट मेमो' या पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज होना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
- इतना ही नहीं व्यक्ति को हिरासत में लेने के बाद 2 घंटे के भीतर गिरफ्तारी का कारण बताना और परिवार को सूचित करना अनिवार्य है।
- अगर आपको सिर्फ पूछताछ के लिए बुलाया गया है, तो पुलिस आपको सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले थाने में नहीं रोक सकती (खासतौर पर महिलाओं को)।
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हिरासत के दौरान आपके कानूनी अधिकार
- फोटो : अमर उजाला
हिरासत के दौरान आपके कानूनी अधिकार
- हिरासत में लिए गए व्यक्ति को अपने वकील से बात करने और कानूनी सलाह लेने का पूरा अधिकार है।
- इतना ही नहीं व्यक्ति के हिरासत के दौरान व्यक्ति के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी पुलिस की होती है और हर 48 घंटे में मेडिकल जांच का नियम है।
- पुलिस की यह जिम्मेदारी होती है कि वह व्यक्ति के किसी एक परिजन या मित्र को उसकी हिरासत की तुरंत जानकारी दे।
अवैध हिरासत होने पर क्या करें?
- फोटो : Adobe Stock
अवैध हिरासत होने पर क्या करें?
- अगर पुलिस रिकॉर्ड दर्ज नहीं कर रही, तो तुरंत जिले के एसपी या डीसीपी को लिखित शिकायत भेजें।
- आप राज्य या राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में भी पुलिस के खिलाफ शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
- इतना ही नहीं आप वकील के माध्यम से संबंधित मजिस्ट्रेट के पास 'हैबियस कॉर्पस' (बंदी प्रत्यक्षीकरण) या अवैध हिरासत की शिकायत दर्ज कराएं।
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पुलिस और नागरिक के बीच बचाव के तरीके
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पुलिस और नागरिक के बीच बचाव के तरीके
- पूछताछ के समय पुलिस अधिकारी से उनका पहचान पत्र और वर्दी पर लगी नेम प्लेट जरूर देखें।
- थाने में दी गई किसी भी जानकारी या शिकायत की 'रिसीविंग' (पावती) जरूर लें ताकि भविष्य में आपके पास सबूत रहे।
- पुलिस के साथ बहस या हाथापाई करने के बजाय शांति से अपने अधिकारों की बात करें और कानूनी प्रक्रिया का पालन करें।