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Railway Pass: क्या रेलवे कर्मचारी और उनका परिवार किसी भी ट्रेन में फ्री में यात्रा कर सकते हैं? जानें नियम

Thu, 30 Jul 2026 08:40 PM IST
Shikhar Baranawal यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shikhar Baranawal Updated Thu, 30 Jul 2026 08:40 PM IST
सार

Free Train Travel Employees: अक्सर समाज में ये सुनने को मिलता है कि रेलवे कर्मचारी के लिए ट्रेन में यात्रा करना पूरी तरह से फ्री होता है, मगर ये पूरा सत्य नहीं है। आपको बता दें कि कर्मचारियों को भी ट्रेन से यात्रा करने को लेकर कुछ शर्तें होती हैं। आइए इस लेख में इसी के बारे में समझते हैं।

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Indian Railways Pass Rules: Can Railway Employees and Their Families Travel Free in Any Train
रेलवे कर्मचारी फ्री सफर नियम - फोटो : AI

Indian Railways Pass Rules: भारतीय रेलवे देश की लाइफलाइन मानी जाती है, जिसमें रोजाना करोड़ों लोग सफर करते हैं। आम जनता को जहां यात्रा के लिए किराया चुकाना पड़ता है, वहीं रेलवे में काम करने वाले लाखों कर्मचारियों को विभाग की तरफ से मुफ्त या रियायती सफर के लिए खास रेलवे पास और प्रिविलेज टिकट ऑर्डर (पीटीओ) दिए जाते हैं।



एक आम इंसान के मन में अक्सर यह जिज्ञासा रहती है कि क्या कोई भी रेलवे कर्मचारी और उसका पूरा परिवार देश की किसी भी ट्रेन के किसी भी डिब्बे में बिल्कुल मुफ्त सफर कर सकता है? रेलवे के पास से जुड़े नियम काफी सख्त और विस्तृत हैं। आइए इस लेख में समझते हैं कि क्या सचमुच रेलकर्मियों को 100% फ्री यात्रा की छूट मिलती है या इसके पीछे कुछ खास शर्तें और सीमाएं भी लागू होती हैं।

Indian Railways Pass Rules: Can Railway Employees and Their Families Travel Free in Any Train
Indian Railways - फोटो : Adobe Stock

पद और ग्रेड के हिसाब से तय होती है पास की श्रेणी

  • रेलवे में हर कर्मचारी को एक समान पास नहीं मिलता, बल्कि यह उनके पद और वेतन ग्रेड पर निर्भर करता है। 
  • ग्रुप-ए और बी के बड़े अधिकारियों को 'व्हाइट या पिंक पास' मिलता है, जिससे वे फर्स्ट क्लास एसी में सफर कर सकते हैं। 
  • वहीं ग्रुप-सी और डी के कर्मचारियों को ड्यूटी पास या प्रिविलेज पास मिलता है, जो सिर्फ स्लीपर या थर्ड एसी के लिए वैध होता है।
Indian Railways Pass Rules: Can Railway Employees and Their Families Travel Free in Any Train
प्रीमियम ट्रेनों में सफर का नियम - फोटो : Adobe Stock

प्रीमियम ट्रेनों जैसे राजधानी और वंदे भारत में सफर के नियम

  • एक आम धारणा है कि रेलकर्मी किसी भी ट्रेन में बैठ सकते हैं, लेकिन राजधानी, शताब्दी, दुरांतो और वंदे भारत जैसी प्रीमियम एक्सप्रेस ट्रेनों में पास के तहत सीटों का एक सीमित कोटा तय होता है। 
  • अगर वह कोटा फुल हो जाता है, तो पास होने के बावजूद कर्मचारियों को मुफ्त सीट नहीं मिलती और उन्हें सामान्य यात्रियों की तरह इंतजार करना पड़ता है।
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रेलवे के हिसाब से परिवार की परिभाषा - फोटो : Adobe Stock

परिवार की परिभाषा और निर्भर सदस्यों की सख्त सीमाएं

  • फ्री या रियायती पास का लाभ कर्मचारी के अलावा उनके सिर्फ 'आश्रित' परिवार को ही मिलता है।
  • इसके तहत पत्नी, बेरोजगार बेटे (21 वर्ष से कम उम्र), अविवाहित बेटियां और पूरी तरह आश्रित विधवा मां को ही शामिल किया जा सकता है।
  • अगर बेटा कमाने लगा है या बेटी की शादी हो चुकी है, तो उन्हें इस फ्री पास सुविधा का लाभ बिल्कुल नहीं दिया जाता है।
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साल भर में मिलने वाले पास की संख्या और पीटीओ सुविधा - फोटो : Adobe Stock

साल भर में मिलने वाले पास की संख्या और पीटीओ सुविधा

  • नए सेवा नियमों के तहत कर्मचारियों को नौकरी के शुरुआती वर्षों में साल में 1 सेट और 5 साल की सेवा के बाद सालाना 3 सेट प्रिविलेज पास मिलते हैं। 
  • इसके अलावा उन्हें 4 सेट पीटीओ भी दिए जाते हैं। पीटीओ का मतलब यह है कि अगर वे फ्री पास खत्म होने के बाद यात्रा करते हैं, तो उन्हें कुल किराए का मात्र एक-तिहाई हिस्सा ही चुकाना पड़ता है।
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