Interesting Facts Of Republic Day 2026: भारतीयों के लिए 26 जनवरी सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान की ताकत का प्रतीक है। इसी दिन भारत ने खुद को एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया था।
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Republic Day 2026: हर भारतीय के लिए बेहद खास है 26 जनवरी, जानें इस दिन के रोचक फैक्ट
यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: श्रुति गौड़
Updated Tue, 06 Jan 2026 04:34 PM IST
सार
Interesting Facts Of Republic Day 2026: हर साल 26 जनवरी का इंतजार हर भारतीय को रहता है। ऐसे में इससे जुड़े फैक्ट हम आपको बताएंगे, क्योंकि इसकी जानकारी हर भारतीय को होनी चाहिए।
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हर भारतीय के लिए बेहद खास है 26 जनवरी, जानें इस दिन के रोचक फैक्ट
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26 जनवरी को ही क्यों लागू हुआ संविधान
भारत का संविधान तैयार तो नवंबर 1949 में ही हो गया था, लेकिन इसे लागू करने के लिए जानबूझकर 26 जनवरी 1950 की तारीख चुनी गई। इसकी वजह यह थी कि 26 जनवरी 1930 को देश ने आज़ादी के लक्ष्य के रूप में पूर्ण स्वराज का संकल्प लिया था। इस ऐतिहासिक तारीख को सम्मान देने के लिए गणतंत्र बनने का दिन भी यही रखा गया।
भारत का संविधान तैयार तो नवंबर 1949 में ही हो गया था, लेकिन इसे लागू करने के लिए जानबूझकर 26 जनवरी 1950 की तारीख चुनी गई। इसकी वजह यह थी कि 26 जनवरी 1930 को देश ने आज़ादी के लक्ष्य के रूप में पूर्ण स्वराज का संकल्प लिया था। इस ऐतिहासिक तारीख को सम्मान देने के लिए गणतंत्र बनने का दिन भी यही रखा गया।
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पहला गणतंत्र दिवस समारोह कहां हुआ था
बहुत कम लोग जानते हैं कि पहली बार गणतंत्र दिवस का आयोजन कर्तव्य पथ पर नहीं हुआ था। साल 1950 में इसका पहला आयोजन दिल्ली के इरविन स्टेडियम में किया गया था, जिसे आज मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम कहा जाता है। इसी कार्यक्रम में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने देश के पहले राष्ट्रपति के रूप में पद संभाला।
बहुत कम लोग जानते हैं कि पहली बार गणतंत्र दिवस का आयोजन कर्तव्य पथ पर नहीं हुआ था। साल 1950 में इसका पहला आयोजन दिल्ली के इरविन स्टेडियम में किया गया था, जिसे आज मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम कहा जाता है। इसी कार्यक्रम में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने देश के पहले राष्ट्रपति के रूप में पद संभाला।
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विदेशी मेहमान को बुलाने की परंपरा
गणतंत्र दिवस पर किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष को मुख्य अतिथि बनाने की परंपरा भारत की कूटनीतिक सोच को दर्शाती है। इससे भारत अपने अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करने का संदेश देता है। मुख्य अतिथि का चयन सरकार के उच्च स्तर पर विचार-विमर्श के बाद किया जाता है।
गणतंत्र दिवस पर किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष को मुख्य अतिथि बनाने की परंपरा भारत की कूटनीतिक सोच को दर्शाती है। इससे भारत अपने अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करने का संदेश देता है। मुख्य अतिथि का चयन सरकार के उच्च स्तर पर विचार-विमर्श के बाद किया जाता है।
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परेड के पीछे की महीनों लंबी मेहनत
गणतंत्र दिवस परेड सिर्फ एक दिन का आयोजन नहीं होती। इसकी तैयारी हर साल कई महीनों पहले से शुरू हो जाती है। इसमें शामिल जवान रोजाना कठिन अभ्यास करते हैं और परेड वाले दिन तड़के सुबह आयोजन स्थल पर पहुंच जाते हैं। इस समारोह को देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं।
गणतंत्र दिवस परेड सिर्फ एक दिन का आयोजन नहीं होती। इसकी तैयारी हर साल कई महीनों पहले से शुरू हो जाती है। इसमें शामिल जवान रोजाना कठिन अभ्यास करते हैं और परेड वाले दिन तड़के सुबह आयोजन स्थल पर पहुंच जाते हैं। इस समारोह को देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं।