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Delhi Metro: मेट्रो कार्ड से कितना अलग है वर्चुअल मेट्रो कार्ड? जान लें आपके लिए कौन सा है बेस्ट

यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shikhar Baranawal Updated Fri, 22 May 2026 02:59 PM IST
सार

Delhi Metro Virtual Smart Card: दिल्ली मेट्रो में इन दिनों वर्चुअल कार्ड का चलन बढ़ रहा है, ऐसे में बहुत से लोगों के मन में पारंपरिक कार्ड और वर्चुअल कार्ड में अंतर जानने की जिज्ञासा होती है। आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।

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Virtual Metro Card vs Physical Smart Card: Which Option is Best for Your Delhi Metro Daily Travel
दिल्ली मेट्रो के लिए कौन सा कार्ड सबसे अच्छा है? - फोटो : AI

Physical Metro Card vs Virtual Card: दिल्ली मेट्रो में हर दिन लगभग 50 लाख से अधिक लोग एक स्थान से अपने गंतव्य पर जाते हैं। दिल्ली मेट्रो में सफर करने वाले करोड़ों यात्रियों की सहूलियत के लिए अब पारंपरिक प्लास्टिक स्मार्ट कार्ड के साथ-साथ 'वर्चुअल स्मार्ट कार्ड' का डिजिटल विकल्प भी मौजूद है। वर्चुअल मेट्रो कार्ड पूरी तरह डिजिटल होता है, जिसे आप अपने मोबाइल ऐप (जैसे दिल्ली सारथी 2.0) के जरिए जनरेट कर सकते हैं। 



बता दें कि जहां पारंपरिक कार्ड को जेब में लेकर चलना पड़ता है, वहीं वर्चुअल कार्ड आपके मोबाइल फोन में ही सुरक्षित रहता है। बता दें कि दोनों तरह के कार्ड में किराए पर कुछ छूट मिलता है, फिजिकल कार्ड पर तो हमेशा 10% छूट तो कम से मिलता ही है, लेकिन वर्चुअल कार्ड पर कुछ 20 % तक की छूट मिल सकती है। बता दें कि ये दोनों कार्ड इस्तेमाल और फीचर्स के मामले में ये एक-दूसरे से काफी अलग हैं। आइए इस लेख में इसी के बारे में समझते हैं।

Virtual Metro Card vs Physical Smart Card: Which Option is Best for Your Delhi Metro Daily Travel
Delhi Metro - फोटो : AdobeStock

वर्चुअल मेट्रो कार्ड के फायदे क्या हैं?

  • यह कार्ड आपके स्मार्टफोन के अंदर डिजिटल रूप में रहता है, इसलिए इसे घर भूलने या खोने का कोई डर नहीं रहता।
  • अच्छी बात यह है कि फिजिकल कार्ड की तरह इसमें कोई ₹50 का सुरक्षा शुल्क नहीं देना होता, पहली बार से ही पूरा पैसा बैलेंस के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • वर्चुअल मेट्रो कार्ड के रिचार्ज के लिए आपको स्टेशन की एवीएम मशीन पर जाकर टैप करने की जरूरत नहीं होती, एप से सीधे पेमेंट करते ही यह तुरंत एक्टिव हो जाता है।
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Delhi Metro - फोटो : AdobeStock

पारंपरिक प्लास्टिक स्मार्ट के क्या हैं खासियत?

  • इस कार्ड को पंच करने के लिए इंटरनेट या मोबाइल बैटरी की जरूरत नहीं होती, यह बिना किसी तकनीकी रुकावट के हमेशा काम करता है।
  • फिजिकल कार्ड एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन सहित सभी रूट और फीडर बसों में काम करता है, जबकि वर्चुअल कार्ड की कुछ रूट्स पर सीमाएं हो सकती हैं।
  • फिजिकल स्मार्ट कार्ड आखिरी रिचार्ज या इस्तेमाल से पूरे 10 वर्षों के लिए वैध रहता है, जबकि वर्चुअल कार्ड की वैधता 5 वर्ष होती है।
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Delhi Metro - फोटो : AdobeStock

दोनों कार्ड्स के बीच मुख्य तकनीकी अंतर

  • वर्चुअल कार्ड से सफर शुरू करने के लिए आपके एप वॉलेट में कम से कम ₹40 होना अनिवार्य है, जबकि फिजिकल कार्ड में यह सीमा ₹20 तक की होती है।
  • वर्चुआल कार्ड गायब होने पर कार्ड का सारा पैसा गायब हो जाएगा, लेकिन अगर आपका फोन खो जाता है, तो आप नए फोन में अपने क्रेडेंशियल्स डालकर वर्चुअल कार्ड का पुराना बैलेंस वापस पा सकते हैं।
  • अगर यात्रा के दौरान आपके फोन की बैटरी खत्म हो जाए, तो वर्चुअल कार्ड यूजर को बिना टिकट माना जा सकता है, जबकि फिजिकल कार्ड में ऐसी दिक्कत नहीं आती।
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Delhi Metro - फोटो : AdobeStock
जानिए आपके लिए कौन सा कार्ड रहेगा सबसे बेस्ट
  • अगर आप रोजाना दिल्ली मेट्रो से अप-डाउन करते हैं, तो विश्वसनीयता और नेटवर्क की चिंता से बचने के लिए 'फिजिकल स्मार्ट कार्ड' सबसे बेस्ट है।
  • दिल्ली में कम समय के लिए रुकने वाले पर्यटकों या कभी-कभार यात्रा करने वालों के लिए बिना सिक्योरिटी डिपॉजिट वाला वर्चुअल कार्ड सबसे किफायती है।
  • जो लोग अलग से कार्ड कैरी नहीं करना चाहते और पूरी तरह कैशलेस रहना पसंद करते हैं, उनके लिए 'वर्चुअल कार्ड' एक बेहतरीन और आधुनिक विकल्प है।
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