ईरान और इस्राइल के बीच बढ़ते तनाव के बीच इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हमले की योजना और सैन्य अभियान ऑपरेशन राइजिंग लायन को लेकर बड़ा खुलासा किया था। उन्होंने बताया था कि ईरान के खिलाफ चलाया गया सैन्य अभियान ऑपरेशन राइजिंग लायन की मंजूरी छह महीने पहले नवंबर 2024 में दी गई थी। यह अभियान पहले अप्रैल 2025 में शुरू किया जाना था, लेकिन कुछ कारणों से इसे आगे बढ़ा दिया गया। आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से...
Israel Iran Tension: इस्राइल-ईरान में हालिया संघर्ष की वजह क्या, कैसे दुश्मन बने एक वक्त के दोस्त? जानें सबकुछ
इस्राइल ने शुक्रवार को ईरान के कई ठिकानों पर हमले किए। इनमें कई परमाणु ठिकाने भी शामिल थे। इससे पश्चिम एशिया में संघर्ष का एक और मोर्चा खुल गया। इस्राइली हमले के बाद ईरान ने भी शनिवार को पलटवार किया और इस्राइल पर सैंकड़ों मिसाइलों से हमला बोला। हमले के बाद इस्राइल में भी नुकसान हुआ। कई लोग घायल हुए। आइए जानते हैं कि इस संघर्ष में अब तक क्या-क्या हुआ और इसका इतिहास कैसा रहा...
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इस्राइल के ईरान पर किए गए ताजा हमलों की वजह क्या है?
इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का कहना है कि इस अभियान को शुरू करने का मकसद ईरान के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों से पैदा हो रहे खतरे को खत्म करना है। शुक्रवार को ईरान के खिलाफ शुरू हुए इस अभियान का नाम ऑपरेशन राइजिंग लायन रखा गया है। नेतन्याहू ने कहा कि इस ऑपरेशन का मकसद इस्राइल के अस्तित्व के लिए ईरानी खतरे को कम करना है। नेतन्याहू ने कहा कि यह ऑपरेशन तब तक चलेगा, जब तक की खतरा पूरी तरह से खत्म नहीं हो जाता।
किस खतरे की बात कर रहे हैं नेतन्याहू?
नेतन्याहू ने ईरान पर आरोप लगाया कि वह वैश्विक चेतावनियों को नजरअंदाज करके अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहा है। नेतन्याहू ने कई परमाणु बम बनाने में सक्षम ईरान के यूरेनियम भंडार की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा, 'ईरान के पास नौ परमाणु बम बनाने जितना उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार है।' नेतन्याहू ने चेतावनी दी कि ईरान कुछ ही महीनों में परमाणु हथियार विकसित कर सकता है।
इस्राइल के हमलों का ईरान पर कितना असर?
इस्राइली हमले में इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के कमांडर हुसैन सलामी की मौत हुई है। सलामी IRGC मुख्यालय पर हुए हमले में मारे गए। वह ईरान के सबसे प्रभावशाली सैन्य अधिकारियों में से एक थे और 2019 से IRGC के प्रमुख पद पर थे। उन्हें कट्टर और आक्रामक रणनीति के लिए जाना जाता था। ईरान का रिवॉल्यूशनरी गार्ड देश के भीतर मुख्य शक्ति केंद्रों में से एक है। यह ईरान के बैलिस्टिक मिसाइलों के शस्त्रागार को भी नियंत्रित करता है। इसके अलावा इन हमलों में ईरान के छह वैज्ञानिकों के भी मारे जाने की खबर है। इस्राइल ने ईरान के सैन्य प्रमुख मोहम्मद बाघेरी के भी मारे जाने का दावा किया है।
इस्राइल ने हमले के लिए यही वक्त क्यों चुना?
कहा जा रहा है कि ईरान का परमाणु हथियार हासिल करने का कार्यक्रम निर्णायक दौर में पहुंच चुका है। संयुक्त राष्ट्र की परमाणु संवर्धन पर निगरानी रखने वाली एजेंसी ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा है कि ईरान के पास 408 किलो यूरेनियम का ऐसा भंडार है, जो कि 60 फीसदी तक संवर्धित है। वहीं, 133 किलो यूरेनियम 50 फीसदी तक संवर्धित है। गौरतलब है कि परमाणु हथियार बनाने के लिए यूरेनियम के 90 फीसदी संवर्धन की जरूरत होती है। वहीं नेतन्याहू का दावा है कि इस वक्त ईरान के पास जितना संवर्धित यूरेनियम है वो नौ परमाणु बन बनाने के लिए पर्याप्त है। कहा जा रहा है कि इसमें से एक तिहाई का उत्पादन पिछले तीन महीने में ही किया गया। ईरान के परमाणु शक्ति बनने की इस तीव्र तैयारी पर ब्रेक लगाने के लिए ही इन हमलों को अभी अंजाम दिया गया।
इस्राइल ने ईरान में कैसे पहुंचाए ड्रोन?
इस्राइल ने हमले से पहले ईरान में ड्रोन और अन्य हथियारों की तस्करी की। इन्हें इस्राइल की खुफिया एजेंसी मोसाद के साथ मिलकर आईडीएफ ने ईरान में पहुंचाए। मोसाद एजेंटों ने तेहरान के पास ईरानी धरती पर ड्रोन बेस स्थापित किया। गुरुवार के देर रात ड्रोन सक्रिय हो गए। इसके अलावा हथियार प्रणालियों से लदे वाहनों को भी ईरान में तस्करी कर लाया गया। इसने ईरान की हवाई सुरक्षा को नष्ट कर दिया तथा इस्राइली विमानों को ईरान पर हवाई प्रभुत्व और कार्रवाई की स्वतंत्रता प्रदान मिल गई। इतना ही नहीं मोसाद के कमांडो द्वारा मध्य ईरान में विमान रोधी स्थलों के पास सटीक मिसाइलों की तैनाती भी की गई। ये स्थानीय खुफिया एजेंसियों की नजरों से पूरी तरह बचते हुए ईरान के मध्य में काम कर रहे थे।
इस्राइल ने पहली बार नहीं लगाई ईरान की सुरक्षा में सेंध
ये पहला मौका नहीं है जब इस्राइल ने ईरान की सुरक्षा में सेंध लगाई है। इससे पहले जुलाई 2024 में हमास की राजनीतिक शाखा के प्रमुख इस्माइल हानिया की ईरान की राजधानी तेहरान में हत्या कर दी गई थी। इस्माइल हानिया की हत्या का आरोप इस्राइल पर लगा था। हानिया की हत्या के पांच महीने बाद इस्राइल ने हानिया को मारने की बात कबूल की थी। हानिया की हत्या एक कम दूरी के प्रक्षेप्य से की गई। हानिया उस वक्त ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान के शपथग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए तेहरान आया था।
कभी दोस्त थे ईरान और इस्राइल
आज ईरान और इस्राइल भले ही आमने-सामने हैं लेकिन ये कभी दोस्त हुआ करते थे। इनके रिश्तों में खटास की वजह ईरान की क्रांति को माना जाता है। दरअसल 1948 में जब इस्राइल अस्तिव में आया तो ईरान उसे देश के रूप में मान्यता देने वाला दूसरा मुस्लिम बहुल देश बना था। उस वक्त ईरान में पहलवी राजवंश का शासन था। इस राजवंश ने आधी सदी से अधिक समय तक शासन किया गया था। पहलवी राजवंश अमेरिका का समर्थक था जबकि इस्राइल अमेरिका का समर्थन करता था। । ईरान की 1979 में हुई इस्लामी क्रांति ने दोनों देशों के बीच संबंधों में खटास ला दी। नई ईरानी सत्ता ने अमेरिका को ईरान में 'महान शैतान' और इस्राइल को 'छोटा शैतान' की संज्ञा दे दी। क्रांति के बाद ईरान ने इस्राइल के साथ सभी संबंध तोड़ दिए। इसके बाद दोनों बीच की दुश्मनी बढ़ती चली गई।
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