विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक बार फिर पहलगाम आतंकी हमले को लेकर पाकिस्तान और उसकी पनाह में छिपे बैठे दहशतगर्दों को सख्त चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि पहलगाम आतंकी हमला कश्मीर में पर्यटन को तबाह करने की एक सोची समझी साजिश थी। यह एक तरह का आर्थिक युद्ध था।
Pahalgam Attack: 'पहलगाम हमला कश्मीर में पर्यटन को तबाह करने की साजिश थी', जयशंकर बोले- यह आर्थिक जंग का कृत्य
विदेश मंत्री एस. जयशंकर अमेरिका की आधिकारिक यात्रा पर हैं। वे मंगलवार को क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए वाशिंगटन डीसी की यात्रा करेंगे। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में भारत के स्थायी मिशन द्वारा आयोजित 'आतंकवाद की मानवीय लागत' शीर्षक से एक प्रदर्शनी का उद्घाटन करके अपनी यात्रा की शुरुआत की।
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उन्होंने कहा कि भारत के खिलाफ हमले करने वाले पाकिस्तान में स्थित आतंकवादी छिपकर या यूं कहें कि गुप्त रूप से काम नहीं करते हैं, ये ऐसे आतंकवादी संगठन हैं, जिनके पाकिस्तान के आबादी वाले शहरों में कॉर्पोरेट मुख्यालय जैसे ढांचे हैं। उन्होंने कहा, 'हर कोई जानता है कि संगठन ए और संगठन बी का मुख्यालय क्या है, कहां हैं। ये वे इमारतें या मुख्यालय थे, जिन्हें भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में मिट्टी में मिला दिया।' ऑपरेशन सिंदूर पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ढांचे को निशाना बनाने के लिए शुरू किया गया था, जिसका मकसद पहलगाम हमले का बदला लेना था। आतंकी हमले में 26 नागरिक निर्मम हत्या कर दी गई थी। इसकी जिम्मेदारी पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूह लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) की शाखा द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने ली थी।
उन्होंने कहा कि हम बहुत स्पष्ट हैं कि आतंकवादियों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्हें जरा सी भी राहत नहीं दी जाएगी। उन पर कोई रहम नहीं बरता जाएगा। हम अब उन्हें प्रॉक्सी मानकर व्यवहार नहीं करेंगे। हम उस सरकार को भी नहीं बख्शेंगे, जो उनका समर्थन और वित्तपोषण करती है। हम परमाणु ब्लैकमेल हमें जवाब देने से नहीं रोक पाएगा। पाकिस्तान ने हमेशा आतंकवाद को प्रॉक्सी की इस्तेमाल किया है। इसलिए अब हम हर आतंकी घटना को युद्ध की कार्रवाई मानेंगे।
जयशंकर ने कहा कि हम यह भी बहुत लंबे समय से सुन रहे हैं कि भारत और पाकिस्तान दोनों परमाणु देश हैं। इसलिए दूसरा कोई आएगा और भयानक चीजें करेगा, लेकिन आपको कुछ नहीं करना है, क्योंकि इससे दुनिया की परेशानी बढ़ेगी। उन्होंने कहा, 'अब हम उसके झांसे में नहीं आने वाले हैं। अगर वह आकर कुछ करने वाला है, तो हम वहां जाएंगे और उन लोगों पर भी हमला करेंगे, जिन्होंने ऐसा किया है।' जयशंकर ने दर्शकों की तालियों के बीच कहा, 'इसलिए परमाणु ब्लैकमेल के आगे झुकना नहीं है, आतंकवादियों को कोई छूट नहीं है, उन्हें छद्म कहने की कोई छूट नहीं है। हम अपने लोगों की रक्षा के लिए जो करना है, करेंगे।'
संयुक्त राष्ट्र में आयोजित प्रदर्शनी का हवाला देते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत का मानना है कि आतंकवाद वास्तव में सभी के लिए खतरा है, किसी भी देश को इसे अपनी नीतियों को आगे बढ़ाने के साधन के रूप में उपयोग नहीं करना चाहिए। अंत में यह सभी को नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दुनिया को यह संदेश दिया जाना चाहिए कि आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता होनी चाहिए, ऐसी कोई परिस्थिति, कोई बहाना, कोई औचित्य नहीं होना चाहिए, जिससे कोई देश आतंकवादी कृत्यों की अनुमति दे, उनका समर्थन करे, उन्हें वित्तपोषित करे या प्रायोजित करे।
उन्होंने कहा कि भारत कई दशकों से पाकिस्तान के आतंकवाद से निपट रहा है, लेकिन वास्तव में यह 1947 में देश की आजादी के समय से ही शुरू हो गया था, जब कुछ ही महीनों के भीतर आतंकवादियों को कश्मीर में भेजा गया और उन्हें छद्म आक्रमणकारी बताया गया। उन्होंने 2001 के संसद और 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों का जिक्र करते हुए कहा, 'और फिर जल्द ही पाकिस्तानी सेना ने भी ऐसा ही किया। इसलिए हमने पिछले चार दशकों से आतंकवाद से बहुत गहनता से लड़ाई लड़ी है और हमारे सामने कुछ भयानक मामले भी आए हैं।'
बातचीत के बाद जयशंकर से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस दावे के बारे में पूछा गया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया संघर्ष को रोकने के लिए व्यापार का इस्तेमाल किया और क्या इससे दिल्ली और वाशिंगटन के बीच व्यापार वार्ता प्रभावित हुई? जयशंकर ने कहा, 'नहीं, मुझे ऐसा नहीं लगता। मुझे लगता है कि व्यापार से जुड़े लोग वही कर रहे हैं, जो उन्हें करना चाहिए। मुझे लगता है कि वे बहुत पेशेवर हैं और इस बारे में बहुत ही स्पष्ट हैं। उन्होंने कहा कि भारत में इस बात पर राष्ट्रीय सहमति है कि पाकिस्तान के साथ हमारा व्यवहार द्विपक्षीय है। इस विशेष मामले में मैं आपको बता सकता हूं कि मैं उस कमरे में था, जब उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने 9 मई की रात को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की थी और कहा था कि अगर हमने कुछ बातें नहीं मानीं तो पाकिस्तान भारत पर बहुत बड़ा हमला करेगा। प्रधानमंत्री पाकिस्तान की धमकियों को लेकर स्पष्ट थे। उन्होंने साफ कहा कि हमारी ओर से जवाब दिया जाएगा। हम गोली का जवाब गोले से देंगे। फिर रात में पाकिस्तानियों ने बड़े पैमाने पर हमला किया, हमने उसके बाद बहुत तेजी से और जोरदार जवाब दिया। अगली सुबह विदेश सचिव मार्को रुबियो ने मुझे फोन किया और कहा कि पाकिस्तानी बातचीत के लिए तैयार है। इसलिए मैं आपको केवल अपने व्यक्तिगत अनुभव से बता सकता हूं कि क्या हुआ। बाकी मैं आप पर छोड़ता हूं।