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बेअदबी कानून में होगा संशोधन: बीड़-स्वरूप शब्द होंगे शामिल, जांच पूरी होने तक सेवादारों पर कार्रवाई नहीं

Fri, 31 Jul 2026 09:35 AM IST
Nivedita न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Fri, 31 Jul 2026 09:35 AM IST
सार

सांसद मलविंदर सिंह कंग ने स्पष्ट किया कि यह कानून सिर्फ जानबूझकर बेअदबी करने वालों को सख्त सजा दिलवाने के लिए है। सरकार का सिख धार्मिक मामलों में दखल देने का कोई इरादा नहीं है। 

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Blasphemy law to be amended in punjab Beadbi and Swaroop to be included
बेअदबी कानून - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब सरकार ने बेअदबी रोधी कानून द जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार विधेयक (संशोधन) 2026 में संशोधन की तैयारी की है। यह बदलाव श्री अकाल तख्त साहिब के एतराजों के बाद किया जा रहा है। इस मसौदे को आने वाले विधानसभा सत्र के दौरान पेश किया जाएगा। सरकार सिख परंपराओं के अनुसार श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के लिए प्रयोग होने वाले सम्मानजनक शब्दों जैसे बीड़ और स्वरूप को स्पष्ट रूप से शामिल करेगी।

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सांसद मलविंदर सिंह कंग ने वीरवार को एक प्रेसवार्ता में इस संबंध में जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कानून सिर्फ जानबूझकर बेअदबी करने वालों को सख्त सजा दिलवाने के लिए है। सरकार का सिख धार्मिक मामलों में दखल देने का कोई इरादा नहीं है। 
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श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार साहिब ने कुछ सुझाव को स्वीकार किया है। किसी भी घटना में सेवादारों के खिलाफ सीधे कार्रवाई या गिरफ्तारी नहीं की जाएगी। पहले पुलिस अधीक्षक/पुलिस उपायुक्त स्तर के अधिकारी की ओर से 30 दिन के अंदर स्वतंत्र जांच होगी। आवश्यकता पड़ने पर इसे 15 दिन बढ़ाया जा सकता है। इस संबंध में शिरोमणि कमेटी के अधिकारियों को भी जानकारी दी जाएगी।
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कानून के दायरे से बाहर की गतिविधियां
कंग ने कहा कि यह कानून गुरबाणी के धार्मिक, शैक्षिक, अकादमिक या डिजिटल प्रचार पर कोई रोक नहीं लगाता है। कथा, कीर्तन, शोध और धार्मिक चर्चाएं इसके दायरे से पूरी तरह बाहर हैं। नगर कीर्तन और आनंद कारज समागम भी इस कानून के तहत नहीं आते। फोटोग्राफी और सीधा प्रसारण जैसी गतिविधियां भी कानून के दायरे से बाहर हैं। घरों में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का सम्मानपूर्वक प्रकाश भी इसमें शामिल है। अनजाने में हुई गलतियों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।

अद्वितीय पहचान संख्या और जांच प्रक्रिया 
उन्होंने स्पष्ट किया कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के हर स्वरूप के लिए एक अद्वितीय एन्क्रिप्टेड पहचान संख्या सिर्फ एसजीपीसी जारी करेगी। केंद्रीय रजिस्टर पूरी तरह एन्क्रिप्टेड और गोपनीय रहेगा। इसे कभी सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। हालांकि, जांच एजेंसियां तय नियमों के मुताबिक सिर्फ शिरोमणि कमेटी के जरिये ही रिकॉर्ड देख पाएंगी। अधिनियम में मेडिकल बोर्ड से जांच की भी व्यवस्था है। यह उन मामलों के लिए है जहां कोई आरोपी दिमागी तौर पर ठीक न होने का दावा करता है। इसका उद्देश्य जानबूझकर जुर्म करने वालों को सजा से बचाना है।


छपाई का अधिकार और राष्ट्रव्यापी अपील
कंग ने बताया कि पावर स्वरूपों की छपाई का अधिकार भी एसजीपीसी के पास ही रहेगा। अगर कोई डेरा या संप्रदाय गलत नीयत के साथ बेअदबी करता है, तो उस पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। पंजाब सरकार केंद्र सरकार से भी अपील करेगी। यह अपील पूरे देश में एक जैसा कानून बनाने के लिए है। इससे बेअदबी की घटनाओं से पूरे भारत में एक जैसा निपटा जा सकेगा।

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