मुक्तसर में लगी पशु मंडी: बिकने के लिए आया दो करोड़ का घोड़ा शिवराज... पर्शियन कैट भी सबको लुभा रही
18 जनवरी तक चलने वाली पशु मंडी में यूपी, गुजरात, हरियाणा, तामिलनाडु, राजस्थान एवं मुंबई समेत अन्य राज्यों से पशु पालक पहुंचते हैं। इनमें से अनेकों पशु पालक जहां अपने घोड़ों व अन्य पशुओं को सिर्फ प्रदर्शित करने के लिए लेकर पहुंचते हैं।
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दशम पातशाह श्री गुरु गोबिंद सिंह के चालीस मुक्तों की शहादत को समर्पित मेला माघी के मौके पर लंबी ढाब में आयोजित विश्व प्रसिद्ध पशु मंडी में करोड़ों रुपये के घोड़े आए हुए हैं। इसके अलावा डाग, बिल्ली, चकौर समेत अन्य जानवर भी लोगों को आकर्षित कर रहे हैं।
18 जनवरी तक चलने वाली इस पशु मंडी में यूपी, गुजरात, हरियाणा, तामिलनाडु, राजस्थान एवं मुंबई समेत अन्य राज्यों से पशु पालक पहुंचते हैं। इनमें से अनेकों पशु पालक जहां अपने घोड़ों व अन्य पशुओं को सिर्फ प्रदर्शित करने के लिए लेकर पहुंचते हैं। वहीं कई पशु पालक अपने करोड़ों रुपये कीमत के घोड़ों की बिक्री को लाते हैं। मेले में अधिकतर मारवाड़ी व नुकरा नस्ल के घोड़े आए हुए हैं। बताते हैं कि मेले में कुल मिलाकर लगभग सौ करोड़ रुपये के घोड़े आए हुए हैं।
मारवाड़ी नस्ल का है शिवराज
पशु मंडी में राजस्थान के गांव रेवतरा (जालौर) से आए नारायण सिंह ने बताया कि उसके घोड़े शिवराज की कीमत दो करोड़ है। वे इसे बेचने के लिए मुक्तसर मंडी में लाए हैं। मारवाड़ी नस्ल के उसके इस घोड़े का रंग काला, कद 68 इंच तथा उम्र पांच वर्ष है। उनका यह घोड़ा राजस्थान में 2021 में हुई प्रदर्शनी प्रतियोगिता में विजेता रहा था। यहां मंडी में भी उनके घोड़ों को देखकर हर कोई तस्वीरें खिंचवाने को लालायित हो रहा है। हालांकि अभी तक अनेकों लोग उसके घोड़े को देख खिंचे चले आ रहे हैं, मगर किसी खरीददार के साथ सौदा तय नहीं हुआ है। ये घास, भूसा जौ, चना, और बाजरा आदि खाता है।
राजस्थान के हनुमानगढ़ में स्थित सूरेवाला स्टड फार्म से आए हरदेव सिंह ने बताया कि वे पशु मंडी में दो घोड़े दो बछेरे लेकर आए हैं। उनके घोड़ों का नाम बुलेट और महाराजा है। बुलेट का कद 67 इंच है तो महाराजा का कद 64 इंच है। एक घोड़े की कीमत करीब 40 से 50 लाख है । हरदेव ने बताया कि महाराजा को उन्होंने 2015 में शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के स्टड फार्म से खरीदा था। उस समय महाराज सात वर्ष का था। आज करीब 17 वर्ष का हो चुका है। वे अपने घोड़ों व बछेरों को बेचने के लिए नहीं बल्कि सिर्फ प्रदर्शित करने के लिए मंडी में लाए हैं।
सफेद रंग का सुल्तान बना आकर्षण का केंद्र
मुक्तसर के गांव भागसर स्थित सुल्तान स्ट्ड फार्म से आए गोपी ने बताया कि वे अपने घोड़े सुल्तान को लेकर पहुंचा है। सफेद रंग के उसके घोड़े को देशने के लिए लोग आ रहे हैं और सुल्तान के साथ तस्वीरें खिंचवा रहे हैं। सुल्तान का कद 69 इंच है । वांदरजटाना (कोटकपूरा) से आए गोशा बराड़ का घोड़ा आस्कर भी पशु मंडी में आए लोगों का ध्यान अपनी ओर खिंच रहा है। आस्कर का रंग सफेद और कद 66 इंच से ज्यादा है। भाई डल्ल सिंह स्टड फार्म तलवंडी साबो के जत्थेदार सरबजीत सिंह ने बताया कि वे अपने 69 इंच लंबे घोड़े बाज को लेकर पशु मंडी आए हैं। इसकी उम्र छह वर्ष तथा रंग सफेद है। ये पंजाब की ब्लड लाइन मझूके नस्ल का घोड़ा है। वे भी अपने इस घोड़ों को सिर्फ प्रदर्शित करने के लिए ही लाए हैं। बाज के साथ वो अपने घोड़े फरजंद को भी लाए हैं। इसका कद 65 इंच और उम्र तीन वर्ष है।
बिल्लियां और डाॅग भी खिंच रहे लोगों का ध्यान
पशु मंडी में जहां करोड़ों रुपये कीमत के घोड़े लोगों को भा रहे हैं। वहीं बिल्लियां, डाग, चकौर सहित अन्य जीव-जंतु भी लोगों को पसंद आ रहे हैं। पशु मंडी में आए मनिंदर सिंह काउणी ने बताया कि वे बिक्री के लिए बिल्लियां तथा डाग के बच्चे लेकर आए हैं। उनके पास करीब दस हजार रुपये कीमत तक की बिल्लियां हैं, जो सभी को पसंद आ रही हैं।
लवजीत सिंह फिरोजपुर भी पर्शियन केट (बिल्ली) लेकर मंडी पहुंचे हैं जिसकी कीमत 12 हजार है। यह पर्शियन केट लोगों का ध्यान अपनी ओर खिंचने में सफल हो रही है क्योंकि यह देखने में बहुत ही क्यूट है। मेले में गांव थांदेवाला से पहुंचे मनिंदर सिंह का 11 वर्षीय गद्दी डाग भी लोगों को भा रहा है। प्रयागराज से आए इंद्रजीत मुर्गी की तरह का चकौर जंतु लेकर पहुंचे हैं। इंद्रजीत के अनुसार इसका अंडा 40 से 50 रुपये में बिकता है। एक चकौर की कीमत 400 है। सर्दियों के मौसम में चकौर के अंडे का सेवन शरीर को गर्मी पहुंचाता है और फायदेमंद होता है। इसलिए इसकी काफी मांग रहती है।