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बॉर्डर एरिया के युवाओं के लिए सेना का प्लान: दिलवाएगी एसएसबी की कोचिंग, फिटनेस के प्रति करेगी जागरूक
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 14 Jan 2026 04:05 PM IST
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सार
सर्विसेज सिलेक्शन बोर्ड (एसएसबी) एक ऐसा संगठन है जो उन आवेदकों का इंटरव्यू लेता है जो भारतीय सशस्त्र बलों में सेवा करना चाहते हैं। बोर्ड उम्मीदवारों का गहन मूल्यांकन करता है।
आर्मी
- फोटो : ANI
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विस्तार
पंजाब में पाकिस्तान से सटे बॉर्डर एरिया के युवाओं को सेना अब सर्विसेज सिलेक्शन बोर्ड (एसएसबी) की कोचिंग दिलवाएगी ताकि वे संबंधित टेस्ट व इंटरव्यू क्लियर कर सेना में भर्ती हो सकें। इसके अलावा इन क्षेत्रों के युवाओं में वॉलीबॉल मुकाबलों व योग के जरिये फिटनेस के प्रति जागरूकता लाई जाएगी।
फिरोजपुर, फाजिल्का, पठानकोट, अमृतसर, तरनतारन और गुरदासपुर जिले पाकिस्तान की सीमा से सटे हैं। पाकिस्तान का ड्रग्स सिंडिकेट इन्हीं जिलों के सीमावर्ती गांवों के युवाओं को नशा तस्करी में फंसा रहा है।
आए दिन सीमा पार से नशे के पैकेट ड्रोन के जरिये भारतीय गांवों के खेतों में गिरा दिए जाते हैं। सूचना मिलने पर इन पैकेटों को उठाने और ठिकानों तक पहुंचाने के लिए इन्हीं गांवों के युवाओं को डिलीवरी बाॅय की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।
इसी चक्कर में फंसकर युवा नशा तस्करी के साथ-साथ नशे के आदी भी बन रहे है। लिहाजा बॉर्डर एरिया के गांवों के युवाओं को ड्रग्स सिंडिकेट से बचाने और उनका रुझान सेना में भर्ती व खेलों के प्रति बढ़ाने का जिम्मा अब सूबा सरकार के साथ-साथ इंडियन आर्मी ने भी उठाया है। वेस्टर्न कमांड के अंतर्गत सेना की विभिन्न यूनिटें इसके लिए काम कर रही हैं।
विभिन्न गांवों के युवाओं के लिए एसएसबी कोचिंग और नशे के विरुद्ध जागरूकता शिविर लगाए जा रहे हैं। इस दौरान विभिन्न प्रकार के मौखिक, लिखित टेस्ट और इंटरव्यू से गुजरने के बाद आवेदक सेना में भर्ती होता है। सेना में भर्ती होने के लिए प्रेरित करने के बाद इन क्षेत्रों के युवाओं को एसएसबी की कोचिंग दिलवाई जाएगी।
आर्ट ऑफ लिविंग के विशेषज्ञों ऐसे युवाओं को जीने की कला सीखा, ध्यान और योग क्रियाओं की जानकारी दे रहे हैं। युवाओं को नशे से नुकसान और समय पर नशा छोड़ने की अहमियत बताई जा रही है। उन्हें जागरूक किया जा रहा है कि वे किस तरह अपनी एनर्जी का सकारात्मक इस्तेमाल करें। इन क्षेत्रों में एसएसबी कोचिंग शिविरों के साथ-साथ वॉलीबॉल टूर्नामेंट भी करवाए जाएंगे जबकि कम्युनिटी आउटरीच कार्यक्रमों के जरिये युवाओं को मजबूत बनाया जाएगा।
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फिरोजपुर, फाजिल्का, पठानकोट, अमृतसर, तरनतारन और गुरदासपुर जिले पाकिस्तान की सीमा से सटे हैं। पाकिस्तान का ड्रग्स सिंडिकेट इन्हीं जिलों के सीमावर्ती गांवों के युवाओं को नशा तस्करी में फंसा रहा है।
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आए दिन सीमा पार से नशे के पैकेट ड्रोन के जरिये भारतीय गांवों के खेतों में गिरा दिए जाते हैं। सूचना मिलने पर इन पैकेटों को उठाने और ठिकानों तक पहुंचाने के लिए इन्हीं गांवों के युवाओं को डिलीवरी बाॅय की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।
इसी चक्कर में फंसकर युवा नशा तस्करी के साथ-साथ नशे के आदी भी बन रहे है। लिहाजा बॉर्डर एरिया के गांवों के युवाओं को ड्रग्स सिंडिकेट से बचाने और उनका रुझान सेना में भर्ती व खेलों के प्रति बढ़ाने का जिम्मा अब सूबा सरकार के साथ-साथ इंडियन आर्मी ने भी उठाया है। वेस्टर्न कमांड के अंतर्गत सेना की विभिन्न यूनिटें इसके लिए काम कर रही हैं।
विभिन्न गांवों के युवाओं के लिए एसएसबी कोचिंग और नशे के विरुद्ध जागरूकता शिविर लगाए जा रहे हैं। इस दौरान विभिन्न प्रकार के मौखिक, लिखित टेस्ट और इंटरव्यू से गुजरने के बाद आवेदक सेना में भर्ती होता है। सेना में भर्ती होने के लिए प्रेरित करने के बाद इन क्षेत्रों के युवाओं को एसएसबी की कोचिंग दिलवाई जाएगी।
आर्ट ऑफ लिविंग के विशेषज्ञ करेंगे सहयोग
युवाओं को नशे की लत से दूर रखने व उन्हें इसके दुष्परिणामों के बारे में जागरूक करने के लिए बॉर्डर एरिया के गांवों में सेना ने शिविर लगाने शुरू किए हैं। इस अभियान में आर्ट ऑफ लिविंग के विशेषज्ञ भी सेना की मदद कर रहे हैं। सेना के एक अफसर ने बताया कि सेना ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई में पंजाब के युवाओं के साथ मजबूती से खड़ी है।आर्ट ऑफ लिविंग के विशेषज्ञों ऐसे युवाओं को जीने की कला सीखा, ध्यान और योग क्रियाओं की जानकारी दे रहे हैं। युवाओं को नशे से नुकसान और समय पर नशा छोड़ने की अहमियत बताई जा रही है। उन्हें जागरूक किया जा रहा है कि वे किस तरह अपनी एनर्जी का सकारात्मक इस्तेमाल करें। इन क्षेत्रों में एसएसबी कोचिंग शिविरों के साथ-साथ वॉलीबॉल टूर्नामेंट भी करवाए जाएंगे जबकि कम्युनिटी आउटरीच कार्यक्रमों के जरिये युवाओं को मजबूत बनाया जाएगा।