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बहिबल कलां गोलीकांड: पूर्व मंत्री विजय सांपला को एसआईटी ने चौथी बार समन भेजा, कई सवालों के मांगे जवाब
Wed, 08 Jul 2026 09:08 AM IST
Nivedita
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Wed, 08 Jul 2026 09:08 AM IST
सार
विजय सांपला ने कहा कि उन्हें चौथी बार समन भेजा गया है। इससे पहले भी वे जालंधर में एसआईटी के समक्ष पेश हुए थे। उस समय भी उन्होंने आग्रह किया था कि जिन दस्तावेजों के आधार पर उनसे जवाब मांगा जा रहा है, उनकी प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराई जाएं, ताकि वे तथ्यों के आधार पर अपना पक्ष रख सकें।
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एसआईटी के समक्ष पेश होने के बाद प्रेसवार्ता कर अपनी बात रखते पूर्व मंत्री विजय सांपला।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बहिबल कलां गोलीकांड मामले में मंगलवार को पूर्व मंत्री एवं भाजपा नेता विजय सांपला को एसआईटी ने चौथी बार समन किया। उन्हें चंडीगढ़ बुलाकर दूसरी बार पूछताछ की गई। पूर्व मंत्री विशेष जांच दल (एसआईटी) के समक्ष पेश हुए, जहां उनसे मामले से जुड़े विभिन्न दस्तावेजों के आधार पर जवाब तलब किया गया।
सांपला ने एसआईटी अधिकारियों से संबंधित दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने की मांग की, ताकि वे तथ्यों के आधार पर अपना जवाब दे सकें। एसआईटी ने मामले से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर प्रश्नावली तैयार की थी। इससे पहले भी एसआईटी उनसे पूछताछ कर चुकी है।
पूछताछ के बाद प्रेसवार्ता में सांपला ने कहा कि उन्हें चौथी बार समन भेजा गया है। इससे पहले भी वे जालंधर में एसआईटी के समक्ष पेश हुए थे। उस समय भी उन्होंने आग्रह किया था कि जिन दस्तावेजों के आधार पर उनसे जवाब मांगा जा रहा है, उनकी प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराई जाएं, ताकि वे तथ्यों के आधार पर अपना पक्ष रख सकें।
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उन्होंने आरोप लगाया कि आप सरकार इस संवेदनशील मामले का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रही है। सरकार ने सत्ता में आने से पहले बहिबल कलां गोलीकांड में न्याय दिलाने का वादा किया था, लेकिन साढ़े चार वर्ष बीत जाने के बावजूद पीड़ितों को न्याय नहीं मिल सका।
सांपला ने कहा कि संबंधित दस्तावेजों का अध्ययन किए बिना कोई टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। उन्होंने बताया कि मंगलवार की पेशी के दौरान उन्हें केवल 12 जनवरी 2018 को तत्कालीन राज्यपाल को सौंपे गए एक ज्ञापन की प्रति दिखाई गई, लेकिन उसकी प्रमाणित प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार समन भेजने का उद्देश्य जांच को लंबा खींचना और चुनाव तक इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से जीवित रखना है।
क्या है बहिबल कलां गोलीकांड
साल 2015 में फरीदकोट के बुर्ज जवाहर सिंह वाला और बरगाड़ी गांवों में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी की घटनाएं सामने आई थीं। इसके विरोध में सिख संगठनों और स्थानीय लोगों ने दोषियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू किया। 14 अक्तूबर 2015 को बहिबल कलां में मुख्य हाईवे पर शांतिपूर्ण धरना दे रहे प्रदर्शनकारियों को हटाने के दौरान पुलिस ने कथित तौर पर बल प्रयोग किया और गोलीबारी की। इस फायरिंग में दो सिख प्रदर्शनकारियों, गुरजीत सिंह और कृष्ण भगवान सिंह, की मौत हो गई थी।
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सांपला ने एसआईटी अधिकारियों से संबंधित दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने की मांग की, ताकि वे तथ्यों के आधार पर अपना जवाब दे सकें। एसआईटी ने मामले से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर प्रश्नावली तैयार की थी। इससे पहले भी एसआईटी उनसे पूछताछ कर चुकी है।
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पूछताछ के बाद प्रेसवार्ता में सांपला ने कहा कि उन्हें चौथी बार समन भेजा गया है। इससे पहले भी वे जालंधर में एसआईटी के समक्ष पेश हुए थे। उस समय भी उन्होंने आग्रह किया था कि जिन दस्तावेजों के आधार पर उनसे जवाब मांगा जा रहा है, उनकी प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराई जाएं, ताकि वे तथ्यों के आधार पर अपना पक्ष रख सकें।
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उन्होंने आरोप लगाया कि आप सरकार इस संवेदनशील मामले का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रही है। सरकार ने सत्ता में आने से पहले बहिबल कलां गोलीकांड में न्याय दिलाने का वादा किया था, लेकिन साढ़े चार वर्ष बीत जाने के बावजूद पीड़ितों को न्याय नहीं मिल सका।
सांपला ने कहा कि संबंधित दस्तावेजों का अध्ययन किए बिना कोई टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। उन्होंने बताया कि मंगलवार की पेशी के दौरान उन्हें केवल 12 जनवरी 2018 को तत्कालीन राज्यपाल को सौंपे गए एक ज्ञापन की प्रति दिखाई गई, लेकिन उसकी प्रमाणित प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार समन भेजने का उद्देश्य जांच को लंबा खींचना और चुनाव तक इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से जीवित रखना है।
क्या है बहिबल कलां गोलीकांड
साल 2015 में फरीदकोट के बुर्ज जवाहर सिंह वाला और बरगाड़ी गांवों में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी की घटनाएं सामने आई थीं। इसके विरोध में सिख संगठनों और स्थानीय लोगों ने दोषियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू किया। 14 अक्तूबर 2015 को बहिबल कलां में मुख्य हाईवे पर शांतिपूर्ण धरना दे रहे प्रदर्शनकारियों को हटाने के दौरान पुलिस ने कथित तौर पर बल प्रयोग किया और गोलीबारी की। इस फायरिंग में दो सिख प्रदर्शनकारियों, गुरजीत सिंह और कृष्ण भगवान सिंह, की मौत हो गई थी।