फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Punjab ›   Chandigarh-Punjab News ›   Casteist slur over phone does not constitute public humiliation SC/ST Act not applicable High Court

फोन पर जातिसूचक गाली सार्वजनिक अपमान नहीं: एससी-एसटी एक्ट की धारा लागू नहीं, हाईकोर्ट ने रद्द की एफआईआर

Fri, 31 Jul 2026 09:44 AM IST
Nivedita न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Fri, 31 Jul 2026 09:44 AM IST
सार

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अधिनियम के तहत अपराध तभी बनता है, जब कथित अपमान किसी सार्वजनिक स्थान पर हुआ हो। निजी टेलीफोन वार्ता इस कानूनी कसौटी पर खरी नहीं उतरती है। याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि घटना सार्वजनिक स्थान पर नहीं हुई। इसका कोई प्रत्यक्षदर्शी भी नहीं था।

विज्ञापन
Casteist slur over phone does not constitute public humiliation SC/ST Act not applicable High Court
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। 

विज्ञापन


अदालत ने कहा कि फोन पर जातिसूचक शब्द कहना सार्वजनिक दृष्टि में अपमान नहीं माना जाएगा। ऐसे मामलों में एससी-एसटी एक्ट की संबंधित धाराएं लागू नहीं होंगी।

न्यायमूर्ति की एकल पीठ ने इस आधार पर जालंधर में दर्ज एक एफआईआर रद्द कर दी। इससे संबंधित सभी आपराधिक कार्रवाई भी समाप्त कर दी गई। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अधिनियम के तहत अपराध तभी बनता है, जब कथित अपमान किसी सार्वजनिक स्थान पर हुआ हो। निजी टेलीफोन वार्ता इस कानूनी कसौटी पर खरी नहीं उतरती है। याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि घटना सार्वजनिक स्थान पर नहीं हुई। इसका कोई प्रत्यक्षदर्शी भी नहीं था।
विज्ञापन


कानून में सार्वजनिक दृष्टि का महत्व 
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की दलील स्वीकार करते हुए कहा कि कानून में सार्वजनिक दृष्टि शब्द का विशेष महत्व है। यदि अपमान केवल फोन पर दो व्यक्तियों के बीच सीमित है तो उसे सार्वजनिक स्थान पर किया गया अपमान नहीं माना जा सकता। 
विज्ञापन
विज्ञापन


सर्वोच्च न्यायालय भी कई मामलों में यह स्पष्ट कर चुका है। एससी-एसटी एक्ट के लिए कथित अपमान का सार्वजनिक दृष्टि में होना आवश्यक है। उपलब्ध तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने आरोपी के खिलाफ कार्रवाई जारी रखना न्यायसंगत नहीं माना।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed