{"_id":"6a6c3777a01b873ffe069bd6","slug":"high-court-husband-wife-can-be-granted-parole-simultaneously-2026-07-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाईकोर्ट का अहम फैसला: पति-पत्नी दोनों को एक साथ मिल सकती है पैरोल, एक की रिहाई दूसरे के अधिकार में बाधा नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाईकोर्ट का अहम फैसला: पति-पत्नी दोनों को एक साथ मिल सकती है पैरोल, एक की रिहाई दूसरे के अधिकार में बाधा नहीं
Fri, 31 Jul 2026 11:20 AM IST
Nivedita
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Fri, 31 Jul 2026 11:20 AM IST
सार
जस्टिस राजेश भारद्वाज और जस्टिस अमरजोत भट्टी की खंडपीठ ने सोनीपत निवासी बसंत कुमार उर्फ बंटी की याचिका स्वीकार करते हुए हरियाणा सरकार का 12 मई 2026 का आदेश रद्द कर दिया। अदालत ने उसे 10 सप्ताह की नियमित पैरोल पर रिहा करने का निर्देश दिया।
विज्ञापन
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि केवल इस आधार पर किसी दोषी की नियमित पैरोल नहीं रोकी जा सकती कि उसका पति या पत्नी पहले से पैरोल पर है।
विज्ञापन
अदालत ने स्पष्ट किया कि पति-पत्नी दोनों का पैरोल पाने का अधिकार अलग-अलग है और एक की रिहाई दूसरे के अधिकार को प्रभावित नहीं करती।
जस्टिस राजेश भारद्वाज और जस्टिस अमरजोत भट्टी की खंडपीठ ने सोनीपत निवासी बसंत कुमार उर्फ बंटी की याचिका स्वीकार करते हुए हरियाणा सरकार का 12 मई 2026 का आदेश रद्द कर दिया। अदालत ने उसे 10 सप्ताह की नियमित पैरोल पर रिहा करने का निर्देश दिया। सरकार ने यह कहते हुए पैरोल देने से इन्कार कर दिया था कि उसकी पत्नी सरिता पहले से पैरोल पर है और उसके जेल लौटने के बाद ही पति की पैरोल पर विचार होगा।
विज्ञापन
अदालत ने कहा कि यह आधार कानून के अनुरूप नहीं है। सुनवाई के दौरान बताया कि बसंत कुमार पहले भी पैरोल लेकर समय पर जेल लौट चुका है। वहीं, उसकी पत्नी की पैरोल के मामले में भी हाई कोर्ट पहले स्पष्ट कर चुका है कि पति के पैरोल पर होने से पत्नी की रिहाई नहीं रोकी जा सकती। अदालत ने कहा कि पैरोल सुधार और पुनर्वास की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। दोषियों का परिवार और समाज से संपर्क बनाए रखना आवश्यक है। इसलिए केवल पति या पत्नी के पैरोल पर होने के आधार पर दूसरे की पैरोल रोकना असंवैधानिक है। अदालत ने आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद तत्काल रिहाई के निर्देश दिए।
विज्ञापन