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Chandigarh: अपने ही मेयर के खिलाफ भाजपा पार्षदों ने खोला मोर्चा, पानी की सबसे बड़ी परियोजना पर मचा बवाल
Wed, 05 Aug 2026 01:24 PM IST
Nivedita
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Wed, 05 Aug 2026 01:24 PM IST
सार
कजौली वाटर वर्क्स से सेक्टर-39 वाटर वर्क्स तक फेज-3 की 27 किलोमीटर पाइपलाइन को प्री-स्ट्रेस्ड कंक्रीट (पीएससी) से माइल्ड स्टील (एमएस) में बदलने की 227.70 करोड़ रुपये की परियोजना पर विवाद उठा है।
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मेयर साैरभ जोशी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
चंडीगढ़ नगर निगम की 31 जुलाई की सदन बैठक में 227.70 करोड़ रुपये की जलापूर्ति परियोजना बिना चर्चा के पास किए जाने को लेकर सियासी और प्रशासनिक विवाद खड़ा हो गया है।
भाजपा के ही चार पार्षदों ने अपनी पार्टी की मेयर की अध्यक्षता में पारित एजेंडे पर सवाल उठाते हुए निगम कमिश्नर अमित कुमार से मुलाकात की और सभी 15 टेबल एजेंडे रद्द करने की मांग की। पार्षदों ने चेतावनी दी है कि यदि बुधवार सुबह तक कार्रवाई नहीं हुई तो वे निगम कार्यालय के बाहर धरने पर बैठेंगे।
विवाद का केंद्र कजौली वाटर वर्क्स से सेक्टर-39 वाटर वर्क्स तक फेज-3 की 27 किलोमीटर पाइपलाइन को प्री-स्ट्रेस्ड कंक्रीट (पीएससी) से माइल्ड स्टील (एमएस) में बदलने की 227.70 करोड़ रुपये की परियोजना है। इसके तहत पानी की आपूर्ति क्षमता 20 एमजीडी से बढ़ाकर 40 एमजीडी करने का प्रस्ताव है।
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पार्षदों का आरोप है कि 227 करोड़ रुपये का अनुमान एजेंडे के पहले पृष्ठ पर स्पष्ट रूप से नहीं लिखा गया, बल्कि दूसरे पृष्ठ के बीच में उल्लेख किया गया। इसी कारण सदन में इस पर चर्चा ही नहीं हो सकी और इसे अन्य टेबल एजेंडों के साथ "पास माना जाए" कहकर अनुमोदित कर दिया गया।
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भाजपा के ही चार पार्षदों ने अपनी पार्टी की मेयर की अध्यक्षता में पारित एजेंडे पर सवाल उठाते हुए निगम कमिश्नर अमित कुमार से मुलाकात की और सभी 15 टेबल एजेंडे रद्द करने की मांग की। पार्षदों ने चेतावनी दी है कि यदि बुधवार सुबह तक कार्रवाई नहीं हुई तो वे निगम कार्यालय के बाहर धरने पर बैठेंगे।
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विवाद का केंद्र कजौली वाटर वर्क्स से सेक्टर-39 वाटर वर्क्स तक फेज-3 की 27 किलोमीटर पाइपलाइन को प्री-स्ट्रेस्ड कंक्रीट (पीएससी) से माइल्ड स्टील (एमएस) में बदलने की 227.70 करोड़ रुपये की परियोजना है। इसके तहत पानी की आपूर्ति क्षमता 20 एमजीडी से बढ़ाकर 40 एमजीडी करने का प्रस्ताव है।
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पार्षदों का आरोप है कि 227 करोड़ रुपये का अनुमान एजेंडे के पहले पृष्ठ पर स्पष्ट रूप से नहीं लिखा गया, बल्कि दूसरे पृष्ठ के बीच में उल्लेख किया गया। इसी कारण सदन में इस पर चर्चा ही नहीं हो सकी और इसे अन्य टेबल एजेंडों के साथ "पास माना जाए" कहकर अनुमोदित कर दिया गया।
निगम कमिश्नर से मिले भाजपा पार्षद
सीनियर डिप्टी मेयर जसमन प्रीत सिंह, पार्षद अनूप गुप्ता, कंवरजीत सिंह राणा, राजिंद्र शर्मा, पूनम तथा भाजपा नेता जगतार सिंह जग्गा ने मंगलवार को निगम कमिश्नर से मुलाकात कर कहा कि इतनी बड़ी परियोजना पर बिना चर्चा निर्णय लेना पारदर्शिता के खिलाफ है। उनका कहना है कि यदि परियोजना लागू होती है तो निगम के वार्षिक बजट का बड़ा हिस्सा इसी पर खर्च होगा।
पार्षदों ने केवल जलापूर्ति परियोजना ही नहीं, बल्कि सेक्टर-25 वेस्ट में 200 टन क्षमता के ड्राई एवं मिक्स वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट और अन्य टेबल एजेंडों को भी दोबारा सदन में चर्चा के लिए लाने की मांग की है।
उन्होंने बताया कि इससे पहले इस मुद्दे को लेकर वे पंजाब के राज्यपाल एवं यूटी प्रशासक गुलाब चंद कटारिया तथा लोकल बॉडी विभाग के सचिव से भी मिल चुके हैं। पार्षदों के अनुसार राज्यपाल ने निगम कमिश्नर से पूरे मामले की जानकारी लेने का आश्वासन दिया है।
सत्ता पक्ष में ही बगावत के सुर
दिलचस्प बात यह है कि जिस बैठक में ये एजेंडे पारित हुए, उसकी अध्यक्षता भाजपा के मेयर सौरभ जोशी कर रहे थे। अब भाजपा के ही पार्षद उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। पार्षदों का कहना है कि यदि बुधवार तक एजेंडे निरस्त नहीं किए गए तो सभी दलों के पार्षद निगम कार्यालय के बाहर धरना देंगे।
विवाद की जड़
227.70 करोड़ की जलापूर्ति परियोजना पर विवाद।
कजौली से सेक्टर-39 तक 27 किमी पाइपलाइन बदलने का प्रस्ताव।
पानी की क्षमता 20 एमजीडी से 40 एमजीडी करने की योजना।
15 टेबल एजेंडे बिना चर्चा "पास माने" गए।
भाजपा पार्षदों का आरोप- एस्टीमेट छिपाकर एजेंडा रखा गया।
चेतावनी- एजेंडे रद्द नहीं हुए तो निगम कार्यालय के बाहर धरना।
सीनियर डिप्टी मेयर जसमन प्रीत सिंह, पार्षद अनूप गुप्ता, कंवरजीत सिंह राणा, राजिंद्र शर्मा, पूनम तथा भाजपा नेता जगतार सिंह जग्गा ने मंगलवार को निगम कमिश्नर से मुलाकात कर कहा कि इतनी बड़ी परियोजना पर बिना चर्चा निर्णय लेना पारदर्शिता के खिलाफ है। उनका कहना है कि यदि परियोजना लागू होती है तो निगम के वार्षिक बजट का बड़ा हिस्सा इसी पर खर्च होगा।
पार्षदों ने केवल जलापूर्ति परियोजना ही नहीं, बल्कि सेक्टर-25 वेस्ट में 200 टन क्षमता के ड्राई एवं मिक्स वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट और अन्य टेबल एजेंडों को भी दोबारा सदन में चर्चा के लिए लाने की मांग की है।
उन्होंने बताया कि इससे पहले इस मुद्दे को लेकर वे पंजाब के राज्यपाल एवं यूटी प्रशासक गुलाब चंद कटारिया तथा लोकल बॉडी विभाग के सचिव से भी मिल चुके हैं। पार्षदों के अनुसार राज्यपाल ने निगम कमिश्नर से पूरे मामले की जानकारी लेने का आश्वासन दिया है।
सत्ता पक्ष में ही बगावत के सुर
दिलचस्प बात यह है कि जिस बैठक में ये एजेंडे पारित हुए, उसकी अध्यक्षता भाजपा के मेयर सौरभ जोशी कर रहे थे। अब भाजपा के ही पार्षद उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। पार्षदों का कहना है कि यदि बुधवार तक एजेंडे निरस्त नहीं किए गए तो सभी दलों के पार्षद निगम कार्यालय के बाहर धरना देंगे।
विवाद की जड़
227.70 करोड़ की जलापूर्ति परियोजना पर विवाद।
कजौली से सेक्टर-39 तक 27 किमी पाइपलाइन बदलने का प्रस्ताव।
पानी की क्षमता 20 एमजीडी से 40 एमजीडी करने की योजना।
15 टेबल एजेंडे बिना चर्चा "पास माने" गए।
भाजपा पार्षदों का आरोप- एस्टीमेट छिपाकर एजेंडा रखा गया।
चेतावनी- एजेंडे रद्द नहीं हुए तो निगम कार्यालय के बाहर धरना।
आप ने राज्यपाल से की शिकायत
आम आदमी पार्टी ने निगम की 363वीं जनरल हाउस बैठक में 227 करोड़ रुपये का प्रस्ताव टेबल एजेंडे के माध्यम से पारित कराने पर भाजपा और नगर निगम प्रशासन को घेरा है। पार्टी ने आरोप लगाया कि इतने बड़े वित्तीय प्रस्ताव को अंतिम समय में महज दो पन्नों के टेबल एजेंडे के रूप में सदन में लाकर बिना पर्याप्त चर्चा के पारित करा लिया गया। मामले की शिकायत पंजाब के राज्यपाल एवं यूटी प्रशासक से करते हुए प्रस्ताव को निरस्त कर नियमित प्रक्रिया के तहत दोबारा सदन में लाने की मांग की गई है।
बुधवार को सेक्टर 39 के आप कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में प्रदेश अध्यक्ष विजयपाल सिंह, महासचिव ओमकार सिंह औलख और मुख्य प्रवक्ता योगेश धींगरा ने कहा कि 31 जुलाई को हुई निगम हाउस बैठक में प्रस्ताव न तो तय समय से पहले पार्षदों को उपलब्ध कराया गया और न ही उन्हें इसका अध्ययन करने का अवसर मिला। उन्होंने दावा किया कि पंजाब म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन एक्ट, 1976 के तहत बैठक का एजेंडा 72 घंटे पहले और पूरक एजेंडा 48 घंटे पहले उपलब्ध कराया जाना अनिवार्य है, लेकिन इस मामले में प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
आप नेताओं ने परियोजना की तकनीकी जानकारी पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि एजेंडे में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि सेक्टर-39 और कजौली वाटर वर्क्स की किस पाइपलाइन पर काम होगा, नई पाइपलाइन डाली जाएगी या पुरानी बदली जाएगी, किस प्रकार के पाइप इस्तेमाल होंगे और मौजूदा पाइपलाइन को बदलने का तकनीकी आधार क्या है। उनका आरोप है कि 227 करोड़ रुपये की परियोजना के बावजूद ऐसी महत्वपूर्ण जानकारी साझा नहीं की गई।
पार्टी ने परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर), तकनीकी स्पेसिफिकेशन, लागत का मदवार ब्यौरा, टेंडर संबंधी जानकारी और पाइपलाइन का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि विवादित एजेंडा वापस नहीं लिया गया और जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई तो पार्टी धरना-प्रदर्शन करेगी। इसके अलावा भविष्य में करोड़ों रुपये के वित्तीय प्रस्ताव टेबल एजेंडे के जरिए लाने पर रोक लगाने और ऐसे प्रस्ताव निर्धारित समय से पहले सभी पार्षदों को उपलब्ध कराने की भी मांग की गई।
आम आदमी पार्टी ने निगम की 363वीं जनरल हाउस बैठक में 227 करोड़ रुपये का प्रस्ताव टेबल एजेंडे के माध्यम से पारित कराने पर भाजपा और नगर निगम प्रशासन को घेरा है। पार्टी ने आरोप लगाया कि इतने बड़े वित्तीय प्रस्ताव को अंतिम समय में महज दो पन्नों के टेबल एजेंडे के रूप में सदन में लाकर बिना पर्याप्त चर्चा के पारित करा लिया गया। मामले की शिकायत पंजाब के राज्यपाल एवं यूटी प्रशासक से करते हुए प्रस्ताव को निरस्त कर नियमित प्रक्रिया के तहत दोबारा सदन में लाने की मांग की गई है।
बुधवार को सेक्टर 39 के आप कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में प्रदेश अध्यक्ष विजयपाल सिंह, महासचिव ओमकार सिंह औलख और मुख्य प्रवक्ता योगेश धींगरा ने कहा कि 31 जुलाई को हुई निगम हाउस बैठक में प्रस्ताव न तो तय समय से पहले पार्षदों को उपलब्ध कराया गया और न ही उन्हें इसका अध्ययन करने का अवसर मिला। उन्होंने दावा किया कि पंजाब म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन एक्ट, 1976 के तहत बैठक का एजेंडा 72 घंटे पहले और पूरक एजेंडा 48 घंटे पहले उपलब्ध कराया जाना अनिवार्य है, लेकिन इस मामले में प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
आप नेताओं ने परियोजना की तकनीकी जानकारी पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि एजेंडे में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि सेक्टर-39 और कजौली वाटर वर्क्स की किस पाइपलाइन पर काम होगा, नई पाइपलाइन डाली जाएगी या पुरानी बदली जाएगी, किस प्रकार के पाइप इस्तेमाल होंगे और मौजूदा पाइपलाइन को बदलने का तकनीकी आधार क्या है। उनका आरोप है कि 227 करोड़ रुपये की परियोजना के बावजूद ऐसी महत्वपूर्ण जानकारी साझा नहीं की गई।
पार्टी ने परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर), तकनीकी स्पेसिफिकेशन, लागत का मदवार ब्यौरा, टेंडर संबंधी जानकारी और पाइपलाइन का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि विवादित एजेंडा वापस नहीं लिया गया और जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई तो पार्टी धरना-प्रदर्शन करेगी। इसके अलावा भविष्य में करोड़ों रुपये के वित्तीय प्रस्ताव टेबल एजेंडे के जरिए लाने पर रोक लगाने और ऐसे प्रस्ताव निर्धारित समय से पहले सभी पार्षदों को उपलब्ध कराने की भी मांग की गई।