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Chandigarh: मेयर सौरभ जोशी ने रखा नेशनल अर्बन पार्लियामेंट ऑफ इंडिया के गठन का प्रस्ताव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Thu, 04 Jun 2026 01:11 PM IST
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सार
मेयर सौरभ जोशी के अनुसार, वर्तमान में निर्वाचित मेयरों के पास अपनी बात केंद्र सरकार तक मजबूती से पहुंचाने और बेस्ट प्रैक्टिसेज (सर्वोत्तम प्रथाओं) को साझा करने के लिए कोई औपचारिक राष्ट्रीय संस्थागत मंच मौजूद नहीं है।
मेयर साैरभ जोशी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
चंडीगढ़ के मेयर सौरभ जोशी ने 'ऑल इंडिया मेयर्स काउंसिल' के समक्ष भारत में 'नेशनल अर्बन पार्लियामेंट ऑफ इंडिया' स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है।
इसके अनुसार देश के तेजी से होते शहरीकरण और स्थानीय निकायों की चुनौतियों को देखते हुए एक स्थाई राष्ट्रीय मंच की सख्त जरूरत महसूस की जा रही है।
मेयर सौरभ जोशी के अनुसार, वर्तमान में निर्वाचित मेयरों के पास अपनी बात केंद्र सरकार तक मजबूती से पहुंचाने और बेस्ट प्रैक्टिसेज (सर्वोत्तम प्रथाओं) को साझा करने के लिए कोई औपचारिक राष्ट्रीय संस्थागत मंच मौजूद नहीं है। यह कदम शहरी स्थानीय निकायों को शासन के तीसरे स्तर के रूप में अधिक मजबूत और आत्मनिर्भर बनाएगा।
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सदन की रूपरेखा: इस प्रस्तावित संसद में देश के सभी नगर निगमों के मेयर, नगर परिषदों और नगर पालिकाओं के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसके अलावा आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के प्रतिनिधियों को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में जोड़ा जाएगा।
सालाना बैठक: नीतियों, शहरी गवर्नेंस, म्यूनिसिपल फाइनेंस, इंफ्रास्ट्रक्चर और क्लाइमेट रेजिलिएंस जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा के लिए साल में कम से कम एक बार इस पार्लियामेंट की बैठक अनिवार्य रूप से आयोजित की जाएगी।
नीतिगत सिफारिशें: यह संस्था सीधे भारत की संसद, नीति आयोग, राज्यों की सरकारों और शहरी विकास मंत्रालय को नीतिगत दस्तावेज और सिफारिशें सौंपने के लिए अधिकृत होगी।
इसके अनुसार देश के तेजी से होते शहरीकरण और स्थानीय निकायों की चुनौतियों को देखते हुए एक स्थाई राष्ट्रीय मंच की सख्त जरूरत महसूस की जा रही है।
मेयर सौरभ जोशी के अनुसार, वर्तमान में निर्वाचित मेयरों के पास अपनी बात केंद्र सरकार तक मजबूती से पहुंचाने और बेस्ट प्रैक्टिसेज (सर्वोत्तम प्रथाओं) को साझा करने के लिए कोई औपचारिक राष्ट्रीय संस्थागत मंच मौजूद नहीं है। यह कदम शहरी स्थानीय निकायों को शासन के तीसरे स्तर के रूप में अधिक मजबूत और आत्मनिर्भर बनाएगा।
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प्रस्ताव की मुख्य बातें
स्थाई राष्ट्रीय मंच: देश के सभी नगर निगमों के निर्वाचित मेयरों के लिए एक ऐसा मंच तैयार करना, जहां शहरी चुनौतियों पर सामूहिक रूप से चर्चा की जा सके।
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सदन की रूपरेखा: इस प्रस्तावित संसद में देश के सभी नगर निगमों के मेयर, नगर परिषदों और नगर पालिकाओं के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसके अलावा आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के प्रतिनिधियों को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में जोड़ा जाएगा।
सालाना बैठक: नीतियों, शहरी गवर्नेंस, म्यूनिसिपल फाइनेंस, इंफ्रास्ट्रक्चर और क्लाइमेट रेजिलिएंस जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा के लिए साल में कम से कम एक बार इस पार्लियामेंट की बैठक अनिवार्य रूप से आयोजित की जाएगी।
नीतिगत सिफारिशें: यह संस्था सीधे भारत की संसद, नीति आयोग, राज्यों की सरकारों और शहरी विकास मंत्रालय को नीतिगत दस्तावेज और सिफारिशें सौंपने के लिए अधिकृत होगी।