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Lalit Modi: ललित मोदी ने 2007 में द्रविड़-सचिन और गांगुली से किसी बात को लेकर मांगी थी 'भीख'? सुनाई पूरी कहानी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, लंदन
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Thu, 04 Jun 2026 12:51 PM IST
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सार
पूर्व आईपीएल कमिश्नर ललित मोदी ने खुलासा किया है कि 2007 में पहले टी20 विश्व कप से पहले उन्हें भारतीय खिलाड़ियों से टूर्नामेंट में खेलने की गुहार लगानी पड़ी थी। उनके अनुसार, कई वरिष्ठ खिलाड़ी टी20 क्रिकेट को गंभीरता से नहीं लेते थे और इसे बेवकूफी भरा खेल मानते थे।
ललित मोदी का बयान
- फोटो : ANI
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विस्तार
आज टी20 क्रिकेट दुनिया के सबसे लोकप्रिय प्रारूपों में से एक है और टी20 विश्व कप किसी भी क्रिकेटर के लिए सबसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंटों में गिना जाता है, लेकिन 2007 में हालात बिल्कुल अलग थे। उस समय न तो खिलाड़ियों को इस प्रारूप पर ज्यादा भरोसा था और न ही क्रिकेट प्रशासकों को इसकी लोकप्रियता का अंदाजा था। पूर्व आईपीएल कमिश्नर ललित मोदी ने एएनआई को दिए इंटरव्यू में खुलासा किया कि पहले आईसीसी टी20 विश्व कप से पहले उन्हें भारतीय खिलाड़ियों से व्यक्तिगत रूप से अनुरोध करना पड़ा था कि वे इस टूर्नामेंट में हिस्सा लें।
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2007 में भारत का इंग्लैंड दौरा, दिग्गज थे हिस्सा
भारत का 2007 इंग्लैंड दौरा 19 जुलाई से आठ सितंबर तक चला था, जिसमें तीन टेस्ट और सात वनडे मैचों की सीरीज खेली गई थी। यह दौरा पहले टी20 विश्व कप की शुरुआत से ठीक पहले समाप्त हुआ था, क्योंकि टूर्नामेंट 11 सितंबर 2007 से दक्षिण अफ्रीका में शुरू हुआ था। इंग्लैंड दौरे पर भारत की टीम में उस समय के दिग्गज खिलाड़ी राहुल द्रविड़, सचिन तेंदुलकर और सौरव गांगुली शामिल थे। हालांकि, टी20 विश्व कप के लिए चुनी गई भारतीय टीम काफी युवा थी और उसमें कई अनुभवी खिलाड़ियों को जगह नहीं मिली थी।
भारत ने उस टूर्नामेंट में एमएस धोनी की कप्तानी में हिस्सा लिया। टीम में वीरेंद्र सहवाग, युवराज सिंह, गौतम गंभीर, दिनेश कार्तिक, आरपी सिंह और इरफान पठान जैसे खिलाड़ी शामिल थे। यही युवा टीम आगे चलकर इतिहास रचते हुए पहले टी20 विश्व कप 2007 का खिताब जीतने में सफल रही, जिसने भारतीय क्रिकेट में टी20 युग की नींव रखी।
भारत का 2007 इंग्लैंड दौरा 19 जुलाई से आठ सितंबर तक चला था, जिसमें तीन टेस्ट और सात वनडे मैचों की सीरीज खेली गई थी। यह दौरा पहले टी20 विश्व कप की शुरुआत से ठीक पहले समाप्त हुआ था, क्योंकि टूर्नामेंट 11 सितंबर 2007 से दक्षिण अफ्रीका में शुरू हुआ था। इंग्लैंड दौरे पर भारत की टीम में उस समय के दिग्गज खिलाड़ी राहुल द्रविड़, सचिन तेंदुलकर और सौरव गांगुली शामिल थे। हालांकि, टी20 विश्व कप के लिए चुनी गई भारतीय टीम काफी युवा थी और उसमें कई अनुभवी खिलाड़ियों को जगह नहीं मिली थी।
भारत ने उस टूर्नामेंट में एमएस धोनी की कप्तानी में हिस्सा लिया। टीम में वीरेंद्र सहवाग, युवराज सिंह, गौतम गंभीर, दिनेश कार्तिक, आरपी सिंह और इरफान पठान जैसे खिलाड़ी शामिल थे। यही युवा टीम आगे चलकर इतिहास रचते हुए पहले टी20 विश्व कप 2007 का खिताब जीतने में सफल रही, जिसने भारतीय क्रिकेट में टी20 युग की नींव रखी।
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सचिन, द्रविड़ और गांगुली
- फोटो : Twitter
टी20 क्रिकेट एक बेवकूफी भरा खेल?
ललित मोदी के मुताबिक, उस समय कई खिलाड़ी टी20 प्रारूप को लेकर उत्साहित नहीं थे। खिलाड़ियों का मानना था कि टी20 क्रिकेट एक बेवकूफी भरा खेल है और लंबे इंग्लैंड दौरे के बाद वे अपने परिवार के साथ समय बिताना चाहते थे। मोदी ने कहा कि उस दौर में टी20 क्रिकेट को उतनी गंभीरता से नहीं लिया जाता था, जितनी आज दी जाती है। उन्होंने मौजूदा समय से तुलना करते हुए कहा कि अब टी20 विश्व कप का महत्व इतना बढ़ चुका है कि यदि कोई बड़ा खिलाड़ी विश्व कप खेलने से इनकार कर दे तो फैंस, खिलाड़ियों और क्रिकेट प्रशासकों के बीच भारी नाराजगी और विवाद खड़ा हो जाएगा। उनके मुताबिक, 2007 में जिस प्रारूप को लेकर खिलाड़ियों में संदेह था, वही आज विश्व क्रिकेट का सबसे लोकप्रिय और प्रभावशाली प्रारूप बन चुका है।
ललित मोदी के मुताबिक, उस समय कई खिलाड़ी टी20 प्रारूप को लेकर उत्साहित नहीं थे। खिलाड़ियों का मानना था कि टी20 क्रिकेट एक बेवकूफी भरा खेल है और लंबे इंग्लैंड दौरे के बाद वे अपने परिवार के साथ समय बिताना चाहते थे। मोदी ने कहा कि उस दौर में टी20 क्रिकेट को उतनी गंभीरता से नहीं लिया जाता था, जितनी आज दी जाती है। उन्होंने मौजूदा समय से तुलना करते हुए कहा कि अब टी20 विश्व कप का महत्व इतना बढ़ चुका है कि यदि कोई बड़ा खिलाड़ी विश्व कप खेलने से इनकार कर दे तो फैंस, खिलाड़ियों और क्रिकेट प्रशासकों के बीच भारी नाराजगी और विवाद खड़ा हो जाएगा। उनके मुताबिक, 2007 में जिस प्रारूप को लेकर खिलाड़ियों में संदेह था, वही आज विश्व क्रिकेट का सबसे लोकप्रिय और प्रभावशाली प्रारूप बन चुका है।
'मैं ड्रेसिंग रूम में जाकर भीख मांगा करता था'
ललित मोदी ने बताया कि 2007 में इंग्लैंड दौरे के दौरान वह भारतीय टीम के ड्रेसिंग रूम में गए थे और खिलाड़ियों से टी20 विश्व कप खेलने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा, 'मैं 2007 में इंग्लैंड दौरे पर भारतीय टीम के हर खिलाड़ी के पास ड्रेसिंग रूम में गया। मैंने उनसे कहा- कृपया टी20 खेलिए, मैं आपसे विनती करता हूं। लेकिन उन्होंने कहा- ललित, क्या आप मजाक कर रहे हैं? यह कैसा बेवकूफी भरा खेल है? हम इसे नहीं खेलना चाहते। ड्रेसिंग रूम में लगभग हर खिलाड़ी ने मुझसे यही कहा। वे कहते थे कि हमने लंबा दौरा किया है और अब अपने परिवार के साथ समय बिताना चाहते हैं।'
ललित मोदी ने बताया कि 2007 में इंग्लैंड दौरे के दौरान वह भारतीय टीम के ड्रेसिंग रूम में गए थे और खिलाड़ियों से टी20 विश्व कप खेलने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा, 'मैं 2007 में इंग्लैंड दौरे पर भारतीय टीम के हर खिलाड़ी के पास ड्रेसिंग रूम में गया। मैंने उनसे कहा- कृपया टी20 खेलिए, मैं आपसे विनती करता हूं। लेकिन उन्होंने कहा- ललित, क्या आप मजाक कर रहे हैं? यह कैसा बेवकूफी भरा खेल है? हम इसे नहीं खेलना चाहते। ड्रेसिंग रूम में लगभग हर खिलाड़ी ने मुझसे यही कहा। वे कहते थे कि हमने लंबा दौरा किया है और अब अपने परिवार के साथ समय बिताना चाहते हैं।'
2007 टी20 विश्वकप में भारत-पाकिस्तान मैच
- फोटो : Twitter
सचिन-द्रविड़-गांगुली नहीं खेले थे टी20 विश्व कप
ललित मोदी ने कहा कि बीसीसीआई ने भी उस समय टी20 विश्व कप को उतनी अहमियत नहीं दी थी और दक्षिण अफ्रीका में युवा टीम भेजने का फैसला किया गया। उन्होंने कहा, 'बीसीसीआई ने अपना मुख्य भारतीय दल ही दक्षिण अफ्रीका नहीं भेजा। उन्होंने कहा कि नई टीम भेजते हैं और उसकी कप्तानी महेंद्र सिंह धोनी को देते हैं। टीम पूरी तरह युवा और अनुभवहीन थी। सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और सौरव गांगुली जैसे खिलाड़ी उस विश्व कप में नहीं खेले थे।' उन्होंने यह भी कहा कि आज के दौर में किसी विश्व कप में 'बी टीम' भेजने की कल्पना भी नहीं की जा सकती।
ललित मोदी ने कहा कि बीसीसीआई ने भी उस समय टी20 विश्व कप को उतनी अहमियत नहीं दी थी और दक्षिण अफ्रीका में युवा टीम भेजने का फैसला किया गया। उन्होंने कहा, 'बीसीसीआई ने अपना मुख्य भारतीय दल ही दक्षिण अफ्रीका नहीं भेजा। उन्होंने कहा कि नई टीम भेजते हैं और उसकी कप्तानी महेंद्र सिंह धोनी को देते हैं। टीम पूरी तरह युवा और अनुभवहीन थी। सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और सौरव गांगुली जैसे खिलाड़ी उस विश्व कप में नहीं खेले थे।' उन्होंने यह भी कहा कि आज के दौर में किसी विश्व कप में 'बी टीम' भेजने की कल्पना भी नहीं की जा सकती।
युवराज के छह छक्कों ने बदल दी तस्वीर
ललित मोदी का दावा है कि शुरुआती दौर में टी20 विश्व कप को दर्शकों का खास समर्थन नहीं मिल रहा था। लेकिन युवराज सिंह द्वारा स्टुअर्ट ब्रॉड के एक ओवर में लगाए गए छह छक्कों ने पूरे टूर्नामेंट की तस्वीर बदल दी। उन्होंने कहा, 'दक्षिण अफ्रीका में हुए टी20 विश्व कप की रेटिंग युवराज सिंह के छह छक्कों से पहले बहुत खराब थी। उसी घटना के बाद लोगों का ध्यान इस टूर्नामेंट की ओर गया और इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी।'
ललित मोदी का दावा है कि शुरुआती दौर में टी20 विश्व कप को दर्शकों का खास समर्थन नहीं मिल रहा था। लेकिन युवराज सिंह द्वारा स्टुअर्ट ब्रॉड के एक ओवर में लगाए गए छह छक्कों ने पूरे टूर्नामेंट की तस्वीर बदल दी। उन्होंने कहा, 'दक्षिण अफ्रीका में हुए टी20 विश्व कप की रेटिंग युवराज सिंह के छह छक्कों से पहले बहुत खराब थी। उसी घटना के बाद लोगों का ध्यान इस टूर्नामेंट की ओर गया और इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी।'
2007 टी20 विश्वकप में भारत-पाकिस्तान मैच
- फोटो : Twitter
दुनिया को टी20 का भविष्य दिख रहा था
ललित मोदी ने कहा कि जब अधिकांश लोग टी20 क्रिकेट की सफलता को लेकर आश्वस्त नहीं थे, तब उन्हें विश्वास था कि यह प्रारूप भविष्य में क्रिकेट की दिशा बदल देगा। उन्होंने कहा, 'मैं दुनिया भर में घूम-घूमकर लोगों को समझाने की कोशिश कर रहा था क्योंकि मुझे पता था कि यह प्रारूप सफल होगा। उस समय बहुत कम लोग थे जो टी20 क्रिकेट पर भरोसा करते थे।' आज आईपीएल दुनिया की सबसे बड़ी क्रिकेट लीग बन चुकी है और टी20 क्रिकेट वैश्विक खेल उद्योग का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में ललित मोदी का यह खुलासा बताता है कि जिस प्रारूप को कभी खिलाड़ी गंभीरता से नहीं लेते थे, वही आज क्रिकेट की सबसे बड़ी ताकत बन चुका है।
ललित मोदी ने कहा कि जब अधिकांश लोग टी20 क्रिकेट की सफलता को लेकर आश्वस्त नहीं थे, तब उन्हें विश्वास था कि यह प्रारूप भविष्य में क्रिकेट की दिशा बदल देगा। उन्होंने कहा, 'मैं दुनिया भर में घूम-घूमकर लोगों को समझाने की कोशिश कर रहा था क्योंकि मुझे पता था कि यह प्रारूप सफल होगा। उस समय बहुत कम लोग थे जो टी20 क्रिकेट पर भरोसा करते थे।' आज आईपीएल दुनिया की सबसे बड़ी क्रिकेट लीग बन चुकी है और टी20 क्रिकेट वैश्विक खेल उद्योग का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में ललित मोदी का यह खुलासा बताता है कि जिस प्रारूप को कभी खिलाड़ी गंभीरता से नहीं लेते थे, वही आज क्रिकेट की सबसे बड़ी ताकत बन चुका है।