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Lalit Modi on Shashi Tharoor: सुनंदा के सवाल पर थरूर ने दी थी छापा मरवाने की धमकी? ललित मोदी का सनसनीखेज दावा
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, लंदन
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Thu, 04 Jun 2026 11:45 AM IST
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सार
पूर्व आईपीएल चेयरमैन ललित मोदी ने कांग्रेस सांसद शशि थरूर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मोदी का दावा है कि कोच्चि आईपीएल फ्रेंचाइजी में सुनंदा पुष्कर की हिस्सेदारी को लेकर सवाल उठाने पर थरूर ने उन्हें फोन कर चेतावनी दी थी कि यदि उन्होंने यह मुद्दा उठाया तो अगले दिन उनके यहां छापा पड़ जाएगा। ललित मोदी ने कहा कि उन्होंने दबाव के आगे झुकने से इनकार कर दिया और फ्रेंचाइजी समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए। यह पूरा मामला 2010 के चर्चित कोच्चि आईपीएल विवाद से जुड़ा है, जिसके बाद थरूर को केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
शशि थरूर, सुनंदा पुष्कर और ललित मोदी
- फोटो : Twitter
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विस्तार
आईपीएल के संस्थापक और पूर्व चेयरमैन ललित मोदी ने एक बार फिर कोच्चि आईपीएल फ्रेंचाइजी विवाद को लेकर बड़ा दावा किया है। न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने उन्हें सुनंदा पुष्कर को लेकर सवाल न उठाने की चेतावनी दी थी। ललित मोदी के मुताबिक, यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब उन्होंने कोच्चि कंसोर्टियम की शेयर संरचना में कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाए।
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'सुनंदा पुष्कर के बारे में मत पूछो'
ललित मोदी ने दावा किया कि उन्हें शशि थरूर का फोन आया था, जिसमें उनसे सुनंदा पुष्कर के बारे में सवाल न करने को कहा गया। उन्होंने कहा, 'मुझे शशि थरूर का फोन आया। उन्होंने कहा- ललित, सुनंदा पुष्कर के बारे में सवाल मत पूछो। वह मेरी अच्छी दोस्त हैं। मैंने पूछा क्यों? तब उन्होंने कहा- अगर तुमने ऐसा किया तो मैं सुबह तुम्हारे यहां रेड पड़वा दूंगा।'
मोदी ने कहा, 'इस पर मैंने तीखा जवाब दिया। तुम खुद को समझते क्या हो? तुम भारत के विदेश राज्य मंत्री हो सकते हो, लेकिन मुझसे इस तरह बात करने की हिम्मत मत करना। इसके बाद मैंने फोन काट दिया और साफ कह दिया कि मैं उस समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करूंगा।'
ललित मोदी ने दावा किया कि उन्हें शशि थरूर का फोन आया था, जिसमें उनसे सुनंदा पुष्कर के बारे में सवाल न करने को कहा गया। उन्होंने कहा, 'मुझे शशि थरूर का फोन आया। उन्होंने कहा- ललित, सुनंदा पुष्कर के बारे में सवाल मत पूछो। वह मेरी अच्छी दोस्त हैं। मैंने पूछा क्यों? तब उन्होंने कहा- अगर तुमने ऐसा किया तो मैं सुबह तुम्हारे यहां रेड पड़वा दूंगा।'
मोदी ने कहा, 'इस पर मैंने तीखा जवाब दिया। तुम खुद को समझते क्या हो? तुम भारत के विदेश राज्य मंत्री हो सकते हो, लेकिन मुझसे इस तरह बात करने की हिम्मत मत करना। इसके बाद मैंने फोन काट दिया और साफ कह दिया कि मैं उस समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करूंगा।'
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देर रात बैठक में अड़ गए थे ललित मोदी
ललित मोदी ने बताया कि बंगलूरू में हुई एक देर रात की बैठक के दौरान उन्होंने फ्रेंचाइजी समझौते पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था। उनका कहना था कि जब तक सभी शेयरधारकों और उनकी हिस्सेदारी की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं होगी, तब तक वह आगे नहीं बढ़ेंगे। उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं पता था कि सुनंदा पुष्कर कौन हैं। मैंने कंसोर्टियम के सदस्यों से पूछा कि यह महिला कौन है? किसी ने कहा कि वह एक ऑटोमोबाइल कारोबारी की बेटी हैं और एक जानी-मानी मार्केटिंग प्रोफेशनल हैं। मैंने कहा कि मैं खुद भारत में मार्केटिंग की दुनिया से जुड़ा हूं और मैंने उनका नाम तक नहीं सुना।'
ललित मोदी ने बताया कि बंगलूरू में हुई एक देर रात की बैठक के दौरान उन्होंने फ्रेंचाइजी समझौते पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था। उनका कहना था कि जब तक सभी शेयरधारकों और उनकी हिस्सेदारी की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं होगी, तब तक वह आगे नहीं बढ़ेंगे। उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं पता था कि सुनंदा पुष्कर कौन हैं। मैंने कंसोर्टियम के सदस्यों से पूछा कि यह महिला कौन है? किसी ने कहा कि वह एक ऑटोमोबाइल कारोबारी की बेटी हैं और एक जानी-मानी मार्केटिंग प्रोफेशनल हैं। मैंने कहा कि मैं खुद भारत में मार्केटिंग की दुनिया से जुड़ा हूं और मैंने उनका नाम तक नहीं सुना।'
25 प्रतिशत हिस्सेदारी पर उठाए सवाल
ललित मोदी का आरोप है कि सुनंदा पुष्कर को बिना किसी वित्तीय योगदान के बड़ी हिस्सेदारी दी जा रही थी, जो उन्हें संदिग्ध लगी। उन्होंने कहा, 'सभी शेयरधारक वहां मौजूद थे, सिर्फ सुनंदा पुष्कर नहीं थीं। मैंने पूछा कि एक ऐसी महिला को 25 प्रतिशत हिस्सेदारी क्यों दी जा रही है, जिसका नाम तक किसी ने नहीं सुना। आप 15 प्रतिशत राजस्व भी उन्हें दे रहे हैं। आखिर वह हैं कौन?'
उन्होंने आगे कहा, '75 प्रतिशत शेयरधारक पूरी लागत चुका रहे थे और कोई दूसरा व्यक्ति 25 प्रतिशत हिस्सेदारी मुफ्त में ले रहा था। यह गणित मुझे समझ नहीं आया। मुझे उसी समय लग गया था कि यह मॉडल ज्यादा दिन नहीं टिकेगा और दो साल बाद वही हुआ।'
ललित मोदी का आरोप है कि सुनंदा पुष्कर को बिना किसी वित्तीय योगदान के बड़ी हिस्सेदारी दी जा रही थी, जो उन्हें संदिग्ध लगी। उन्होंने कहा, 'सभी शेयरधारक वहां मौजूद थे, सिर्फ सुनंदा पुष्कर नहीं थीं। मैंने पूछा कि एक ऐसी महिला को 25 प्रतिशत हिस्सेदारी क्यों दी जा रही है, जिसका नाम तक किसी ने नहीं सुना। आप 15 प्रतिशत राजस्व भी उन्हें दे रहे हैं। आखिर वह हैं कौन?'
उन्होंने आगे कहा, '75 प्रतिशत शेयरधारक पूरी लागत चुका रहे थे और कोई दूसरा व्यक्ति 25 प्रतिशत हिस्सेदारी मुफ्त में ले रहा था। यह गणित मुझे समझ नहीं आया। मुझे उसी समय लग गया था कि यह मॉडल ज्यादा दिन नहीं टिकेगा और दो साल बाद वही हुआ।'
'थरूर ने कोच्चि टीम को IPL में लाने के लिए दबाव बनाया'
ललित मोदी ने यह भी दावा किया कि केरल में उस समय उपयुक्त स्टेडियम तक नहीं था, फिर भी उन्होंने कोच्चि को आईपीएल में शामिल होने का मौका दिया।उन्होंने कहा, 'उस समय शशि थरूर लगातार मेरे संपर्क में रहते थे और कोच्चि टीम को आईपीएल में लाने के लिए काफी प्रयास कर रहे थे। वह मेरे घर भी आते थे। वह बेहद प्रभावशाली वक्ता थे और मैं उनकी बातों में आ गया था।'
ललित मोदी ने यह भी दावा किया कि केरल में उस समय उपयुक्त स्टेडियम तक नहीं था, फिर भी उन्होंने कोच्चि को आईपीएल में शामिल होने का मौका दिया।उन्होंने कहा, 'उस समय शशि थरूर लगातार मेरे संपर्क में रहते थे और कोच्चि टीम को आईपीएल में लाने के लिए काफी प्रयास कर रहे थे। वह मेरे घर भी आते थे। वह बेहद प्रभावशाली वक्ता थे और मैं उनकी बातों में आ गया था।'
एक सीजन बाद ही खत्म हो गई थी फ्रेंचाइजी
कोच्चि टस्कर्स केरल ने आईपीएल में सिर्फ 2011 का सीजन खेला था। टीम का प्रदर्शन भी खास नहीं रहा और वह 10 टीमों में आठवें स्थान पर रही। बाद में बीसीसीआई ने फ्रेंचाइजी समझौते की शर्तों के उल्लंघन का हवाला देते हुए टीम को लीग से बाहर कर दिया। वहीं, 2010 में सुनंदा पुष्कर की हिस्सेदारी को लेकर उठे विवाद के बाद शशि थरूर को केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। हालांकि, ललित मोदी द्वारा लगाए गए इन आरोपों पर फिलहाल शशि थरूर की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
कोच्चि टस्कर्स केरल ने आईपीएल में सिर्फ 2011 का सीजन खेला था। टीम का प्रदर्शन भी खास नहीं रहा और वह 10 टीमों में आठवें स्थान पर रही। बाद में बीसीसीआई ने फ्रेंचाइजी समझौते की शर्तों के उल्लंघन का हवाला देते हुए टीम को लीग से बाहर कर दिया। वहीं, 2010 में सुनंदा पुष्कर की हिस्सेदारी को लेकर उठे विवाद के बाद शशि थरूर को केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। हालांकि, ललित मोदी द्वारा लगाए गए इन आरोपों पर फिलहाल शशि थरूर की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।