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धार्मिक प्रतीकों पर सख्ती: कनाडा के क्यूबेक में 150 कर्मचारी बर्खास्त, सिख-मुस्लिम और यहूदी समुदाय प्रभावित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर
Published by: Nivedita
Updated Wed, 22 Apr 2026 08:25 AM IST
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सार
प्रांतीय सरकार के नियमों के अनुसार सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक सेवाओं में कार्यरत कर्मचारी ड्यूटी के दौरान पगड़ी, हिजाब, किप्पा या क्रॉस जैसे किसी भी धार्मिक प्रतीक का उपयोग नहीं कर सकते।
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Freepik
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विस्तार
कनाडा के क्यूबेक प्रांत में धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। मॉन्ट्रियल शहर में सरकार के अधीन कार्यरत करीब 150 कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। यह कार्रवाई ड्यूटी के दौरान धार्मिक प्रतीक पहनने के कारण की गई है।
बताया जा रहा है कि बर्खास्त कर्मचारियों में बड़ी संख्या पंजाबी सिख समुदाय से जुड़ी है। प्रांतीय सरकार के नियमों के अनुसार सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक सेवाओं में कार्यरत कर्मचारी ड्यूटी के दौरान पगड़ी, हिजाब, किप्पा या क्रॉस जैसे किसी भी धार्मिक प्रतीक का उपयोग नहीं कर सकते। संबंधित कर्मचारियों ने आदेश मानने से इन्कार किया था, जिसके बाद पहले उन्हें चेतावनी दी गई और फिर बर्खास्त कर दिया गया। यह कार्रवाई 2019 में लागू बिल 21 के तहत की गई है।
सरकार अब इस कानून को और सख्त बनाने की तैयारी में है। प्रस्ताव है कि इसे डे-केयर कर्मचारियों पर भी लागू किया जाए। साथ ही सार्वजनिक पार्कों में सामूहिक नमाज या प्रार्थना पर रोक और विश्वविद्यालयों में प्रार्थना कक्ष खत्म करने पर विचार चल रहा है। इस कानून से सिख मुस्लिम और यहूदी समुदाय सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। विरोधी इसे धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला बता रहे हैं जबकि सरकार इसे निष्पक्षता के लिए जरूरी मान रही है।
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बताया जा रहा है कि बर्खास्त कर्मचारियों में बड़ी संख्या पंजाबी सिख समुदाय से जुड़ी है। प्रांतीय सरकार के नियमों के अनुसार सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक सेवाओं में कार्यरत कर्मचारी ड्यूटी के दौरान पगड़ी, हिजाब, किप्पा या क्रॉस जैसे किसी भी धार्मिक प्रतीक का उपयोग नहीं कर सकते। संबंधित कर्मचारियों ने आदेश मानने से इन्कार किया था, जिसके बाद पहले उन्हें चेतावनी दी गई और फिर बर्खास्त कर दिया गया। यह कार्रवाई 2019 में लागू बिल 21 के तहत की गई है।
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सरकार अब इस कानून को और सख्त बनाने की तैयारी में है। प्रस्ताव है कि इसे डे-केयर कर्मचारियों पर भी लागू किया जाए। साथ ही सार्वजनिक पार्कों में सामूहिक नमाज या प्रार्थना पर रोक और विश्वविद्यालयों में प्रार्थना कक्ष खत्म करने पर विचार चल रहा है। इस कानून से सिख मुस्लिम और यहूदी समुदाय सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। विरोधी इसे धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला बता रहे हैं जबकि सरकार इसे निष्पक्षता के लिए जरूरी मान रही है।

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