परेशानी: पढ़ाई के लिए अमेरिका जाना होगा मुश्किल, निश्चित अवधि वाले प्रवेश माॅडल को लागू करने की तैयारी
प्रस्तावित नियम लागू होने पर अधिकतर एफ-1 (शैक्षणिक छात्र), जे-1 (विनिमय विजिटर) और आई (विदेशी मीडिया प्रतिनिधि) वीजा धारकों को अमेरिका में अनिश्चितकाल तक रहने की अनुमति नहीं मिलेगी। इसके बजाय उन्हें एक निश्चित अवधि तक ही प्रवेश दिया जाएगा।
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अमेरिका में उच्च शिक्षा और विनिमय कार्यक्रमों के लिए जाने वाले लाखों अंतरराष्ट्रीय छात्रों एवं विजिटर्स को जल्द ही बड़ा झटका लग सकता है।
ट्रंप प्रशासन दशकों पुरानी ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस (डी/एस) व्यवस्था को समाप्त कर निश्चित अवधि वाले प्रवेश मॉडल को लागू करने की तैयारी में है। व्हाइट हाउस के प्रबंधन एवं बजट कार्यालय ने गृह सुरक्षा विभागद्वारा प्रस्तावित अंतिम विनियमन को मंजूरी दे दी है, जिसके बाद इसे फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित किया जाएगा।
प्रस्तावित नियम लागू होने पर अधिकतर एफ-1 (शैक्षणिक छात्र), जे-1 (विनिमय विजिटर) और आई (विदेशी मीडिया प्रतिनिधि) वीजा धारकों को अमेरिका में अनिश्चितकाल तक रहने की अनुमति नहीं मिलेगी। इसके बजाय उन्हें एक निश्चित अवधि तक ही प्रवेश दिया जाएगा।
चार साल तक ही रहने की अनुमति
नए प्रस्ताव के अनुसार अधिकतर एफ-1 छात्रों को उनके फॉर्म आई-20 की समाप्ति तिथि के अनुरूप प्रवेश दिया जाएगा, लेकिन यह अवधि अधिकतम चार वर्ष तक सीमित होगी। वर्तमान व्यवस्था में छात्र अपने शैक्षणिक कार्यक्रम की पूरी अवधि तक डी/एस स्थिति में अमेरिका में रह सकते हैं और उन्हें अलग से अवधि विस्तार की आवश्यकता नहीं पड़ती।
लंबे कोर्स करने वालों को लेनी होगी अतिरिक्त मंजूरी
यदि किसी छात्र का शैक्षणिक कार्यक्रम चार वर्ष से अधिक समय लेता है, जैसे पीएचडी, मेडिकल शिक्षा, शोध आधारित पाठ्यक्रम या डुअल डिग्री कार्यक्रम, तो उसे अमेरिका में रहने की अवधि बढ़ाने के लिए औपचारिक आवेदन करना होगा। इसके लिए यूनाइटेड स्टेट्स सिटीजनशिप एंड इमीग्रेशन सर्विसेज के समक्ष आवेदन देने के साथ बायोमेट्रिक प्रक्रिया भी पूरी करनी पड़ सकती है।
स्नातक के बाद मिलने वाला समय भी घट सकता है
मौजूदा नियमों के तहत पढ़ाई पूरी होने के बाद छात्रों को अमेरिका छोड़ने, वैकल्पिक व्यावहारिक प्रशिक्षण (ओपीटी) के लिए आवेदन करने या वीज़ा स्थिति बदलने के लिए 60 दिनों का ग्रेस पीरियड मिलता है। प्रस्तावित बदलाव के बाद यह अवधि घटाकर 30 दिन की जा सकती है। इससे छात्रों को नौकरी तलाशने और वर्क परमिट संबंधी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए कम समय मिलेगा।
बढ़ेगा आर्थिक और प्रशासनिक बोझ
विशेषज्ञों का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने पर अंतरराष्ट्रीय छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक और प्रशासनिक दबाव बढ़ सकता है। अवधि विस्तार के लिए आवेदन शुल्क, बायोमेट्रिक शुल्क और अन्य दस्तावेजी प्रक्रियाओं का खर्च उठाना पड़ेगा। इसके अलावा पाठ्यक्रम आधारित व्यावहारिक प्रशिक्षण (सीपीटी) और ओपीटी जैसी कार्य-अनुमति योजनाओं की निगरानी भी अधिक सख्त होने की संभावना है।
भारतीय छात्रों पर पड़ेगा सीधा असर
अमेरिका में बड़ी संख्या में भारतीय छात्र इंजीनियरिंग, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, चिकित्सा और शोध आधारित कार्यक्रमों में अध्ययन करते हैं। इनमें से कई कोर्स चार वर्ष से अधिक अवधि के होते हैं। ऐसे में भारतीय छात्रों को बार-बार इमिग्रेशन अधिकारियों से अनुमति लेने की जरूरत पड़ सकती है।
इसके अलावा वीजा अवधि बढ़ाने की प्रक्रिया से खर्च बढ़ेगा और आवेदन स्वीकृत होने को लेकर अनिश्चितता भी बनी रहेगी। शोध और लंबी अवधि की परियोजनाओं पर काम करने वाले छात्रों के लिए भविष्य की योजना बनाना अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
अंतरराष्ट्रीय छात्रों में बढ़ी चिंता
प्रस्तावित बदलावों को लेकर अंतरराष्ट्रीय छात्र समुदाय में चिंता बढ़ रही है। छात्रों का कहना है कि अतिरिक्त प्रशासनिक प्रक्रियाएं समय, धन और मानसिक दबाव बढ़ाएंगी। हालांकि अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि निश्चित अवधि वाली व्यवस्था से वीज़ा नियमों के अनुपालन की बेहतर निगरानी संभव होगी और आव्रजन प्रणाली अधिक प्रभावी बनेगी।
ओएमबी की मंजूरी के बाद अंतिम नियम फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित किया जाएगा। इसके 30 से 60 दिनों के भीतर प्रभावी होने की संभावना है। ऐसे में आने वाले शैक्षणिक सत्रों में अमेरिका जाने की तैयारी कर रहे छात्रों को नए नियमों पर नजर रखने और समय रहते आवश्यक तैयारी करने की सलाह दी जा रही है।