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Highcourt: जिस बेटी की हत्या का आरोप पिता पर लगा, वो कनाडा में जिंदा; मामा की याचिका हाईकोर्ट ने की खारिज

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Wed, 10 Jun 2026 01:42 PM IST
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सार

एक महिला के लापता होने के बाद पिता पर उसकी हत्या का आरोप लगाया गया था। महिला के मामा ने मामले में एसआईटी बनाने की मांग की थी। हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया है। 

High Court dismisses maternal uncle petition Daughter whom father accused of murdering alive in Canada
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक चर्चित मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने की मांग खारिज करते हुए कहा कि जिस महिला की हत्या का आरोप उसके एनआरआई पिता पर लगाया जा रहा था, वह जीवित है और कनाडा में रह रही है। अदालत ने टिप्पणी की कि हत्या का दावा याचिकाकर्ता की कल्पना मात्र साबित हुआ है।


मामला एक महिला के कथित रूप से लापता होने से जुड़ा है। महिला के मामा ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि जर्मनी में रहने वाले उसके पिता और अन्य लोगों ने उसकी हत्या कर दी है। याचिका में मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एसआईटी गठित करने की मांग की गई थी।
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सुनवाई के दौरान पंजाब पुलिस ने अदालत को बताया कि महिला की तलाश के लिए व्यापक जांच की गई। जांच एजेंसी ने पासपोर्ट रिकॉर्ड, इमिग्रेशन दस्तावेज, रिश्तेदारों के बयान और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की पड़ताल की। इसके अलावा वीडियो कॉल के माध्यम से महिला की पहचान भी सत्यापित की गई। जांच में स्पष्ट हुआ कि महिला जीवित है और वर्तमान में कनाडा में रह रही है।
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न्यायमूर्ति सूर्य प्रताप सिंह ने अपने आदेश में कहा कि जांच एजेंसी ने महिला का पता लगाने के लिए हरसंभव प्रयास किए हैं। जब रिकॉर्ड पर यह स्थापित हो चुका है कि महिला जीवित है तो उसके पिता या अन्य व्यक्तियों के खिलाफ हत्या का मामला चलाने का कोई आधार नहीं बनता।

अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता का यह आरोप कि महिला की हत्या कर दी गई केवल उसकी कल्पना का परिणाम है। हाईकोर्ट ने यह भी माना कि पुलिस ने जांच में कोई लापरवाही या जानबूझकर निष्क्रियता नहीं बरती। उपलब्ध सभी माध्यमों से महिला के ठिकाने और पहचान की पुष्टि की गई है। ऐसे में मामले की दोबारा जांच या एसआईटी गठित करने की आवश्यकता नहीं है। कोर्ट ने कहा कि सच्चाई सामने आने के बाद हत्या और साजिश के आरोप स्वत: ही टिक नहीं सकते।
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