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हाईकोर्ट ने रद्द किया पीएचडी छात्रा का इस्तीफा: उत्पीड़न की शिकायत पर डाला था रिजाइन, आईआईटी रोपड़ का मामला

अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़ Published by: शाहिल शर्मा Updated Thu, 25 Jun 2026 06:51 PM IST
सार

हाईकोर्ट ने कहा छात्रा ने उत्पीड़न और दुर्व्यवहार की शिकायत करते हुए इस्तीफा दिया था लेकिन उसकी शिकायत पर बिना कार्रवाई के उसका इस्तीफ स्वीकार कर लिया गया। 

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High Court sets aside PhD student resignation
हाईकोर्ट का फैसला - फोटो : सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने आईआईटी रोपड़ की पीएचडी छात्रा का इस्तीफा रद्द करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि उत्पीड़न के आरोपों के बीच दिया गया इस्तीफा स्वैच्छिक नहीं माना जा सकता। हाईकोर्ट ने छात्रा को पीएचडी कार्यक्रम में दोबारा शामिल करने का आदेश दिया है। साथ ही उसकी पढ़ाई निर्बाध रूप से जारी रखने के लिए आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया है। जस्टिस कुलदीप तिवारी ने फातिमा मकसूद की याचिका स्वीकार करते हुए यह आदेश पारित किया। छात्रा ने 22 नवंबर 2025 को स्वीकार किए गए अपने इस्तीफे को अदालत में चुनौती दी थी।

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शिकायत के अगले ही दिन स्वीकार कर लिया इस्तीफा
याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि 21 नवंबर 2025 को उसने आईआईटी रोपड़ के निदेशक को ई-मेल भेजकर रसायन विभाग के कई फैकल्टी सदस्यों के खिलाफ उत्पीड़न और दुर्व्यवहार की शिकायत की थी। उसने आरोप लगाया था कि लगातार प्रताड़ना के कारण उसकी मानसिक स्थिति प्रभावित हुई और उसे उपचार के लिए पीजीआई तक जाना पड़ा। अदालत ने पाया कि शिकायत पर कोई प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय अगले ही दिन उसका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया। 

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इस्तीफे में भी छात्रा ने स्पष्ट रूप से लिखा था कि वह लगातार हो रहे दुर्व्यवहार और उत्पीड़न के कारण संस्थान छोड़ने के लिए मजबूर है। आईआईटी रोपड़ ने तर्क दिया कि छात्रा पहले भी कई फैकल्टी सदस्यों और छात्रों के खिलाफ शिकायतें करती रही है। हालांकि हाईकोर्ट ने कहा कि यह तर्क मामले के मूल प्रश्न से संबंधित नहीं है। कोर्ट ने पाया कि छात्रा के खिलाफ कभी कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई और न ही उसे कोई नोटिस जारी किया गया। 

इसके बावजूद शिकायत की जांच किए बिना उसी दिन इस्तीफे की अनुशंसा, समर्थन और स्वीकृति की पूरी प्रक्रिया पूरी कर दी गई। संस्थान की कार्रवाई से यह प्रतीत होता है कि वह छात्रा की शिकायतों का समाधान करने के बजाय उससे छुटकारा पाने की जल्दी में था।

हाईकोर्ट ने कहा कि इस्तीफे की भाषा स्वयं यह दर्शाती है कि यह सामान्य या स्वैच्छिक इस्तीफा नहीं था, बल्कि परिस्थितियों से मजबूर होकर लिया गया निर्णय था। फैसले के अंत में हाईकोर्ट ने आईआईटी रोपड़ के निदेशक से अपेक्षा जताई कि वे ऐसा शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करें, जिसमें छात्रा बिना किसी बाधा के अपनी शोध और पीएचडी पूरी कर सके।

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