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नसबंदी से भाग रहे पुरुष: पंजाब में महिलाओं पर परिवार नियोजन का भार, राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Mon, 08 Jun 2026 12:22 PM IST
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सार
ग्रामीण पुरुषों में नसबंदी का प्रतिशत 0.7% है जबकि शहरों में यह प्रतिशत सिर्फ 0.3% है। इसी तरह परिवार नियोजन के लिए महिलाएं अन्य आधुनिक तरीके भी अपना रही हैं जिसमें गर्भ निरोधक दवाएं शामिल हैं।
परिवार नियोजन
- फोटो : Freepik.com
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विस्तार
पंजाब में परिवार नियोजन का भार सिर्फ महिलाओं के कंधे पर है। पुरुष नसबंदी से कतरा रहे हैं। दो साल के अंदर सूबे में 21.7 फीसदी महिलाओं ने नसबंदी कराई है जबकि पुरुषों का प्रतिशत सिर्फ 0.6 है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है।
रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं में भी नसबंदी का प्रतिशत कम हुआ है। वर्ष 2019-21 के दौरान 22.8 प्रतिशत महिलाएं नसबंदी करवा रही थीं। वर्ष 2023-24 में यह कम हो गया है। ग्रामीण महिलाएं नसबंदी में आगे हैं। गांवों में 24.9% महिलाएं नसबंदी करवा रही हैं जबकि शहरी महिलाओं में नसबंदी का प्रतिशत सिर्फ 16.6% है।
अगर पुरुषों की बात करें तो ग्रामीण पुरुषों में नसबंदी का प्रतिशत 0.7% है जबकि शहरों में यह प्रतिशत सिर्फ 0.3% है। इसी तरह परिवार नियोजन के लिए महिलाएं अन्य आधुनिक तरीके भी अपना रही हैं जिसमें गर्भ निरोधक दवाएं शामिल हैं।
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पुरुषों में जागरूकता की कमी है जिस कारण वे नसबंदी के लिए आगे नहीं आते हैं। साथ ही यह गलत धारण भी है कि इससे यौन क्षमता में कमी आएगी। हालांकि ऐसा कुछ नहीं होता है। साथ ही पुरुषों में नसबंदी का ऑपरेशन अधिक सुरक्षित है, वहीं महिलाओं में स्थायी ब्लॉकेज हो सकती है और दोबारा ऑपरेशन की प्रक्रिया भी जटिल है। - मनीषा मैनी, स्त्री रोग विशेषज्ञ
रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं में भी नसबंदी का प्रतिशत कम हुआ है। वर्ष 2019-21 के दौरान 22.8 प्रतिशत महिलाएं नसबंदी करवा रही थीं। वर्ष 2023-24 में यह कम हो गया है। ग्रामीण महिलाएं नसबंदी में आगे हैं। गांवों में 24.9% महिलाएं नसबंदी करवा रही हैं जबकि शहरी महिलाओं में नसबंदी का प्रतिशत सिर्फ 16.6% है।
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अगर पुरुषों की बात करें तो ग्रामीण पुरुषों में नसबंदी का प्रतिशत 0.7% है जबकि शहरों में यह प्रतिशत सिर्फ 0.3% है। इसी तरह परिवार नियोजन के लिए महिलाएं अन्य आधुनिक तरीके भी अपना रही हैं जिसमें गर्भ निरोधक दवाएं शामिल हैं।
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गर्भ निरोधक दवाएं लेने वालों का प्रतिशत बढ़ा
रिपोर्ट के अनुसार गर्भ निरोधक दवाएं लेने वाली महिलाओं का प्रतिशत बढ़ा है। 48.1 महिलाएं आधुनिक तरीका अपना रही हैं जबकि वर्ष 2019-21 के दौरान इसका प्रतिशत 50.5 था। इसी तरह परिवार नियोजन के लिए पारंपरिक तरीकों का प्रतिशत भी बढ़ा है। पहले 16.1% महिलाएं पारंपरिक तरीकों का उपयोग कर रही थी जबकि अब इसका प्रतिशत बढ़कर 21.4 हो गया है। इसमें किसी दवा या सर्जरी का उपयोग नहीं किया जाता है बल्कि ये तरीका मुख्य रूप से महिला के मासिक धर्म चक्र और शरीर के अन्य प्राकृतिक संकेतों को समझने पर आधारित होता है।इस कारण नसबंदी के लिए आगे नहीं आते पुरुष
विशेषज्ञों के अनुसार पुरुषों के मन में यौन क्षमता की कमी और नसबंदी फेल होने का डर प्रमुख कारण है जिस कारण वह नसबंदी के लिए आगे नहीं आते हैं। यही कारण है कि वे आसान और सुरक्षित नसबंदी नहीं करवा रहे हैं। पुरुषों में डर है कि यह दर्दनाक हो सकती है। वे नसबंदी प्रक्रिया को जटिल मानते हैं जबकि पुरुषों की नसबंदी महिलाओं की तुलना में अधिक आसान और सुरक्षित है। पुरुष नसबंदी से न ही शारीरिक कमजोरी आती है और न ही संक्रमण का डर होता है। इसके लिए बहुत सामान्य आपरेशन है। महिलाओं में नसबंदी के बाद पीरियड्स में बदलाव हो सकता है। ऑपरेशन के बाद हल्का रक्तस्राव हो सकता है। इसी तरह हल्का दर्द, सूजन, या संक्रमण का जोखिम भी रहता है।पुरुषों में जागरूकता की कमी है जिस कारण वे नसबंदी के लिए आगे नहीं आते हैं। साथ ही यह गलत धारण भी है कि इससे यौन क्षमता में कमी आएगी। हालांकि ऐसा कुछ नहीं होता है। साथ ही पुरुषों में नसबंदी का ऑपरेशन अधिक सुरक्षित है, वहीं महिलाओं में स्थायी ब्लॉकेज हो सकती है और दोबारा ऑपरेशन की प्रक्रिया भी जटिल है। - मनीषा मैनी, स्त्री रोग विशेषज्ञ